3 यूहन्ना 1:8 बाइबल पद की व्याख्या
3 यूहन्ना 1:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए ऐसों का स्वागत करना चाहिए, जिससे हम भी सत्य के पक्ष में उनके सहकर्मी हों।
3 यूहन्ना 1:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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3 यूहन्ना 1:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 कुरिन्थियों 7:2 (HINIRV) »
हमें अपने हृदय में जगह दो: हमने न किसी से अन्याय किया, न किसी को बिगाड़ा, और न किसी को ठगा।

1 कुरिन्थियों 3:5 (HINIRV) »
अपुल्लोस कौन है? और पौलुस कौन है? केवल सेवक, जिनके द्वारा तुम लोगों ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया।

3 यूहन्ना 1:10 (HINIRV) »
इसलिए यदि मैं आऊँगा, तो उसके कामों की जो वह करता है सुधि दिलाऊँगा, कि वह हमारे विषय में बुरी-बुरी बातें बकता है; और इस पर भी सन्तोष न करके स्वयं ही भाइयों को ग्रहण नहीं करता, और उन्हें जो ग्रहण करना चाहते हैं, मना करता है और कलीसिया से निकाल देता है।
मूल अर्थ
3 यूहन्ना 1:8 का संकेत सरल है: जो लोग सच्चाई के काम में दूसरे सेवकों का समर्थन करते हैं, उनका स्वागत और सहयोग किया जाना चाहिए ताकि वे सत्य की सेवा में साझीदार बन सकें। यह आमंत्रण लाभ-दायकता से ऊपर उठकर आध्यात्मिक सहयोग की आवश्यकता को दर्शाता है।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
यह पत्र यूहन्ना द्वारा लिखे गए छोटे-पत्रों में से एक है और खासकर यात्रियों, मिशनरियों और सत्कार करने वालों के व्यवहार पर ध्यान देता है। लेखक उस समय की चर्च परामर्श और यात्रा-स्थिति से अवगत था जहाँ सेवक सिद्धान्त और धार्मिक सच्चाई के प्रचार के लिए अन्य जगहों पर जाते थे और स्थानीय समुदायों को उन यात्रियों का स्वागत करना पड़ता था।
विवेचनात्मक टिप्पणियाँ
• "ऐसों का स्वागत" — यहाँ केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि समर्थन और भरण-पोषण का संबंध है: आवास, भोजन, तथा आवश्यक सामग्री जो यात्रियों को उनके कार्य में स्थिर रखे।
• "सत्य के पक्ष में उनके सहकर्मी हों" — सच्चाई का विषय केवल विचार नहीं, बल्कि सक्रिय साझेदारी है; स्वागत करने वाला व्यक्ति उसी मिशन का भाग बनता है।
• सामाजिक और आध्यात्मिक प्रभाव — यही आतिथ्य और सहयोग स्थानीय चर्च की एकता और सुदृढीकरण को दर्शाता है; परवाह नहीं कि सेवक अनजान हों, उनके साथ दयनीयता और समान विश्वास के कारण व्यवहार किया जाना चाहिए।
थीमगत बिंदु
संबंधित शास्त्र-स्थान और सम्बन्ध
— मत्ती 25:35—36: अतिथ्यों और जरूरतमंदों की सेवा का परमेश्वर के प्रति सेवा के रूप में मूल्यांकन। यह 3 यूहन्ना में आतिथ्य की धार्मिक महत्ता को पुष्ट करता है।
— प्रेरितों के काम 16:15; 28:7: स्थानीय विश्वासियों द्वारा यात्रियों और सेवकों का स्वागत—इन घटनाओं से देखा जा सकता है कि शुरुआती चर्च में आतिथ्य और सहयोग कैसे व्यवहार में था।
— रोमियों 16:1–2: कुछ व्यक्तियों और परिवारों का स्वागत और सहायता, जिससे उनका नामशेष और योगदान चर्च के लिए स्मरणीय रहा। यह दर्शाता है कि स्वागत करने का काम समुदाय में मान्यता प्राप्त था।
सैन्यजनक उद्धरण
मैथ्यू हेनरी का सार रूपांतरण उपयुक्त रूप से वर्णन करता है: "यह सही है कि हमें ऐसे लोगों का स्वागत करना चाहिए जो ईश्वर के कार्य में लगे हैं," (संक्षिप्त उद्धरण)।
व्यावहारिक निष्कर्ष
3 यूहन्ना 1:8 हमें याद दिलाता है कि व्यक्तिगत आतिथ्य और सार्वजनिक समर्थन केवल दया नहीं बल्कि सच्चाई के कार्य का हिस्सा हैं। आज भी चर्च और व्यक्ति दोनों को चाहिए कि वे मिशन में लगे प्रवासियों, शिक्षकों और सेवकों का खुले दिल से स्वागत करें—इससे उनका कार्य जारी रहे और समुदाय सच्चाई में मजबूत बने।