3 यूहन्ना 1:12 बाइबल पद की व्याख्या
3 यूहन्ना 1:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
दिमेत्रियुस के विषय में सब ने वरन् सत्य ने भी आप ही गवाही दी: और हम भी गवाही देते हैं, और तू जानता है, कि हमारी गवाही सच्ची है।
3 यूहन्ना 1:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
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3 यूहन्ना 1:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 तीमुथियुस 3:7 (HINIRV) »
और बाहरवालों में भी उसका सुनाम हो ऐसा न हो कि निन्दित होकर शैतान के फंदे में फंस जाए।

यूहन्ना 21:24 (HINIRV) »
यह वही चेला है, जो इन बातों की गवाही देता है* और जिस ने इन बातों को लिखा है और हम जानते हैं, कि उसकी गवाही सच्ची है।

यूहन्ना 19:35 (HINIRV) »
जिस ने यह देखा, उसी ने गवाही दी है, और उसकी गवाही सच्ची है; और वह जानता है, कि सच कहता है कि तुम भी विश्वास करो।
3 यूहन्ना 1:12 – दिमेत्रियुस के विषय में गवाही की पक्का सत्यता
सीधी व्याख्या: इस वचन में हमें यह संदेश मिलता है कि दिमित्रियुस के बारे में सभी ने निष्ठापूर्वक सरहना की, और जो सच्चे मित्रों का आशीर्वाद है, वही हमारे भी शब्दों की सत्यता को पुष्ट करता है। गवाही देनहार सभी मिलकर कह रहे हैं कि उनका अच्छा चरित्र और विश्वास स्पष्ट है; और हम भी यही गवाही देते हैं, ताकि तुम्हारे विश्वास की जड़ें मजबूत हों।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
तीन यूहन्ना नामक पत्र प्रेरिताइयों का एक छोटा पत्र है जो प्रीस्टो-प्रेरित जिओन के दौर के मित्रों के बीच था। यहाँ गोस्पेल के व्यवहारिक पक्ष पर जोर है—विश्वासयोग्य व्यक्ति किस प्रकार चर्च के लिए उदाहरण बन सकता है। दिमेत्रियुस एक विशिष्ट ईमानदार सेवक है, जिसकी ख्याति बाहरी और भीतरी गतिविधियों में दोनों जगह सत्य और प्रेम से भरी है।
व्याख्यात्मक बिंदु
मुख्य विचार
अन्य पवित्र ग्रंथ से सम्बन्ध (संक्षिप्त स्पर्श)
- प्रेरित यूहन्ना की शुरुआत में यह स्पष्ट है कि विश्वसनीय मित्रता में सत्य और प्रेम दोनों प्रमुख हैं; दिमेत्रियुस के संदर्भ से यह स्पष्ट होता है कि आस्था के साथ व्यवहार भी मांगता है। - थिसलोनिकी के कुछ हिस्सों में भी उद्धृत किया गया है कि विश्वास के साथ आचरण और प्रेम संस्था को सुदृढ़ बनाते हैं।
सूक्ष्म उद्धरण द्वारा संकेतित विचार
यदि उपलब्ध हो तो नीचे के पुराने टीका-टिप्पणियों से संक्षिप्त प्रेरणा मिलती है:
“गवाही की सत्यता” (पूर्व लेखक के रुख से संकेतित) — अत्यंत सरल और स्पष्ट जीवन-चरित्र ही सबसे शक्तिशाली प्रमाण है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
प्रयोजन यह है कि हम दिमेत्रियुस की तरह अपने छोटे-छोटे अलायनों में भी ईमानदार हों, और समुदाय के सामने अपने व्यवहार से यह दिखाएं कि हम भी सत्य और प्रेम का साक्षी हैं। एक ऐसा जीवन जो विश्वास के साथ बतौर मित्रता और सेवा चलती हो, वह चर्च के लिए प्रेरणा बनता है।
पक्का takeaway
हम में से हर एक को अपने चरित्र और शब्दों के मेल पर नजर रखनी चाहिए: क्या हमारी गवाही हमारे विश्वास की सच्चाई को दर्शाती है? अगर हाँ, तो हम भी दिमेत्रियुस जैसे भरोसेमंद नमूने बन सकते हैं, जो सत्य के साथ प्रेम और सेवा का मार्ग दिखाते हैं।
संक्षिप्त संदर्भ
1) 3 यूहन्ना 1:9–10 — चर्च के भीतर नेतृत्व और संतुलन की चर्चा; 2) 3 यूहन्ना 1:5–8 — भाइयों के प्रति विनम्र सहायता और फसल के लाभ का आह्वान; 4) यूहन्ना 13:34–35 — प्रेम का नया आदेश, जो सत्य के साथ एकता का संकेत देता है।