Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 12:1 प्रेरितों के काम 12:2 प्रेरितों के काम 12:3 प्रेरितों के काम 12:4 प्रेरितों के काम 12:5 प्रेरितों के काम 12:6 प्रेरितों के काम 12:7 प्रेरितों के काम 12:8 प्रेरितों के काम 12:9 प्रेरितों के काम 12:10 प्रेरितों के काम 12:11 प्रेरितों के काम 12:12 प्रेरितों के काम 12:13 प्रेरितों के काम 12:14 प्रेरितों के काम 12:15 प्रेरितों के काम 12:16 प्रेरितों के काम 12:17 प्रेरितों के काम 12:18 प्रेरितों के काम 12:19 प्रेरितों के काम 12:20 प्रेरितों के काम 12:21 प्रेरितों के काम 12:22 प्रेरितों के काम 12:23 प्रेरितों के काम 12:24 प्रेरितों के काम 12:25



प्रेरितों के काम 12:5 — पतरस बन्दीगृह में और समुदाय की प्रार्थना
परिस्थितिको देखते हुए यह पाठ प्रकट करता है कि ईश्वर की शक्ति वे समय-समय पर कैसे क्रिया करती है, जब उसका संदेश कठिनाइयों से घिरा हो। बंदीगृह में पतरस की सुरक्षा के बीच भी कलीसिया की प्रार्थना-ekas prarthana—एक एकजुट विश्वास का प्रतिध्वनि बनती है, जो परमेश्वर के निर्देशों के अनुरूप है।
Immediate setting
यहोशना-पत्रों की पंक्तियों में रामबाँध दिया गया पतरस बन्दीगृह में था, और अति सतर्क गार्डों के बीच उसकी रक्षा हो रही थी। इस समय कलीसिया का समुदाय निर्बल नहीं हुआ, बल्कि उसकी प्रार्थनाओं की दीवार ऊँची हुई थी। इस दृश्य से पाठक जानता है कि संघर्ष के समय भी विश्वास और प्रार्थना कैसे संकट को पार कर सकती है।
क्या इस पाठ से ईश्वर पर विश्वास स्पष्ट होता है
यह बताता है कि ईश्वर स्वयं परिस्थिति पर नियंत्रण रखता है और प्रार्थना सिंहासन के नजदीक पहुँचती है। कलीसिया सिर्फ दूसरों के बारे में नहीं सोचती; वे परमेश्वर से सहायता माँगते हैं, यह दिखाते हुए कि समुदाय की एकता और संघर्ष के समय प्रार्थना का प्रभाव कितना गहरा होता है।
अर्थपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
— बन्दीगृह: वह स्थान जहाँ मनुष्य अधिकारों से सीमित होते हैं; पर ईश्वर की योजनाओं में यह भी एक जगह हो सकता है जहाँ दया और शक्ति प्रकट होती है।
— प्रार्थना: एक ऐसी क्रिया जो विश्वास को जीवित बनाती है और परमेश्वर के उद्देश्य के साथ सहभागिता स्थापित करती है।
संबंधित आयतें
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि प्रार्थना और विश्वास कैसे संकट के बीच ईश्वर की करुणा को उजागर करते हैं।
आज के संदेशन पर अनुप्रयोग
हम भी चुनौतियों के बीच एकजुट प्रार्थना के साथ ईश्वर के सामने आते हैं। समुदाय की दुआएँ एक-दूसरे को धैर्य, साहस और आशा देती हैं। यह पाठ स्मरण देता है कि परमेश्वर विश्वसनीय है, और जो उसकी इच्छा के अनुसार मांगते हैं, वही पाते हैं। संघर्ष के समय भी भक्तजन एक दूसरे के लिए खड़े हों, ताकि आशा की रोशनी न बुझे।
पंक्तियों के भीतर एक छोटे-से सच का सार
कलीसिया की दुआ और पतरस की स्थिति—यह बताता है कि ईश्वर अपने तरीके से आगे बढ़ते हैं और विश्वासियों के सामूहिक प्रार्थना से शक्तिशाली उपाय करते हैं।
महत्वपूर्ण उद्धरण (यदि उपलब्ध): नीचे अनुच्छेदों में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के प्रकाशित उद्धरणों से अनुच्छेद-सार लिया जा सकता है; पूर्ण वाक्यों की प्रतिलिपि केवल वही उद्धरण होंगे जो सार्वजनिक डोमेन के भीतर हो और पाठ में सीधे उद्धृत किए जाएँ।
नोट
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