Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 12:1 प्रेरितों के काम 12:2 प्रेरितों के काम 12:3 प्रेरितों के काम 12:4 प्रेरितों के काम 12:5 प्रेरितों के काम 12:6 प्रेरितों के काम 12:7 प्रेरितों के काम 12:8 प्रेरितों के काम 12:9 प्रेरितों के काम 12:10 प्रेरितों के काम 12:11 प्रेरितों के काम 12:12 प्रेरितों के काम 12:13 प्रेरितों के काम 12:14 प्रेरितों के काम 12:15 प्रेरितों के काम 12:16 प्रेरितों के काम 12:17 प्रेरितों के काम 12:18 प्रेरितों के काम 12:19 प्रेरितों के काम 12:20 प्रेरितों के काम 12:21 प्रेरितों के काम 12:22 प्रेरितों के काम 12:23 प्रेरितों के काम 12:24 प्रेरितों के काम 12:25



प्रेरितों के काम 12:9 पर टिप्पणी (HINIRV)
पद 9 में पेत्रुस के जीवन से निकला एक चमत्कारिक पल आता है: वह मरणासन्न हिरासत से छुटकर जेल से बाहर आ खड़ा होता है, परन्तु उसका उद्देश्य यहाँ एक स्पष्टीकरण से जुड़ा है—क्या वह सचमुच दर्शन देखकर जगा था या उसने कुछ स्वप्न जैसा माना? संदेश यह है कि परमेश्वर के काम कभी-कभी हमारी धारणा के अनुसार नहीं चलते; कभी-कभी वह हमारे विचारों के पार जाकर अपनी योजना पूरी करता है।
पद के संदर्भ में अध्याय का संक्षिप्त अवलोकन
प्रेरितों के काम अध्याय 12 में रोम के बाद की चर्चाएं और ईसाईयत के कठिन दौर को दर्शाती है। राजा हरोदेस ने पेत्रुस को जेल में डाला ताकि लोग ईश्वर की उपासना से विचलित न हों, परन्तु प्रभु के चमत्कारों ने जेल की दीवारों को नहीं रोका। यह कथा विश्वास, prayer, और मुक्तिदायनी दया की शक्तियों की मिसाल प्रस्तुत करती है—जब मानव योजना निष्फल हो जाती है, तब परमेश्वर अपने उद्देश्य को पूरा करता है।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
इस पद की सबसे महत्त्वपूर्ण शिक्षा है—विश्वास के समय परमेश्वर के निवास के सत्य के दर्शन। पेत्रुस ने यह नहीं समझा कि वह दर्शन देख रहा है या वास्तविक हो रहा है; फिर भी उसने जो देखा वह सच था। यह हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के उपाय मनुष्यों की समझ से बहुत परे होते हैं; हमारी अपेक्षाओं के अनुरूप यदि परिणाम न मिलें, तब भी वह अपने समय और तरीके से कार्य करता है।
अन्य बाइबिल प्रवचनों से तुलनात्मक संकेत
कई चुने हुए क्रॉस-रेफरेंसेज और उनके छोटे उल्लेख
1) प्रेरितों के काम 5:19—स्वर्गदूत द्वारा जेल से छुड़ाने का संकेत; 2) भजन 34:7—स्वर्गदूत का आश्वासन और भय को दूर करना; 3) मेरियम 4:5—आस्था के मार्ग में दिव्य नज़रें। इन संदर्भों से ठोस पाठ मिलता है कि परमेश्वर अपने लोगों की सुरक्षा के लिए चमत्कार कर सकता है, और उनके विश्वास को दृढ़ बनाता है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
सार और निष्कर्ष
इस पद से निकलती केंद्रीय चेतना है कि परमेश्वर अपने समय-सारिणी में चमत्कार दिखाता है—भले ही हम उसे सही ढंग से समझ न पाएं। पेत्रुस की स्थिति एक भाष्य के भीतर भी बताती है कि ईश्वर के काम में सुरक्षा और सत्ता का मेल होता है। ऐसे क्षणों में हमारा उत्तरदायित्व विश्वास के साथ देखना, pray करना, और प्रभु के मार्ग पर चलते रहना है।