Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 15:1 प्रेरितों के काम 15:2 प्रेरितों के काम 15:3 प्रेरितों के काम 15:4 प्रेरितों के काम 15:5 प्रेरितों के काम 15:6 प्रेरितों के काम 15:7 प्रेरितों के काम 15:8 प्रेरितों के काम 15:9 प्रेरितों के काम 15:10 प्रेरितों के काम 15:11 प्रेरितों के काम 15:12 प्रेरितों के काम 15:13 प्रेरितों के काम 15:14 प्रेरितों के काम 15:15 प्रेरितों के काम 15:16 प्रेरितों के काम 15:17 प्रेरितों के काम 15:18 प्रेरितों के काम 15:19 प्रेरितों के काम 15:20 प्रेरितों के काम 15:21 प्रेरितों के काम 15:22 प्रेरितों के काम 15:23 प्रेरितों के काम 15:24 प्रेरितों के काम 15:25 प्रेरितों के काम 15:26 प्रेरितों के काम 15:27 प्रेरितों के काम 15:28 प्रेरितों के काम 15:29 प्रेरितों के काम 15:30 प्रेरितों के काम 15:31 प्रेरितों के काम 15:32 प्रेरितों के काम 15:33 प्रेरितों के काम 15:34 प्रेरितों के काम 15:35 प्रेरितों के काम 15:36 प्रेरितों के काम 15:37 प्रेरितों के काम 15:38 प्रेरितों के काम 15:39 प्रेरितों के काम 15:40 प्रेरितों के काम 15:41



प्रेरितों के काम 15:17 पर ध्यानाकर्षण
पक्का संदर्भ: प्रेरितों के काम 15 अध्याय में आयोजित निर्णय-सभा के बाद एक उद्देश्य स्पष्ट किया गया है: ईश्वर का उद्देश्य सभी जातियों तक पहुँचना है। पवित्र आत्मा द्वारा प्रेरित असहमति के बाद, चाचाओं ने यह तय किया कि नस्ल-भेद से ऊपर उठकर हर जाति को प्रभु पाने की राह खुली है। इस पद में उद्धृत वाक्यांश देहलीन रूप से बताता है कि प्रभु सभी मानवों के लिए और उनके नाम के लिए बुलाने की योजना में हैं।
मुख्य अर्थ
यह वाक्य बताता है कि संसार के शेष लोग—यानी वे सब जो ईश्वर के नाम को स्वीकार कर अपने आप को इस योजना में जोड़ेँ—प्रभु को ढूंढ़ेंगे। इसका आशय यह है कि गैर-यहूदियों के भीतर भी उद्धार की राह खुली है और ईश्वर ने अपने उद्देश्य को सभी के लिए प्रकाशित किया है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबद्ध पाठों के संदर्भ
1) प्रेरितों के काम 10:34-35: ईश्वर के दरबार में कोई भेद नहीं—प्रत्येक वर्ग के लोग सम्मान और उद्धार पा सकते हैं।
2) रोम 10:12-13: हर व्यक्ति के लिए प्रभु का नाम बुलाने की व्यवस्था, चाहे वह यहूदी हो या यूनानी।
3) गया 22:21: यीशु ने सभी जातियों के लिए अपनी प्रस्तुति तय की, ताकि वे ईश्वर के सामने प्रवेश कर सकें।
इन संदर्भों से संकेत मिलता है कि यीशु के अनुसरण में जाति और पंथ की बाधाओं को चुनौती देकर ईश्वर का उद्देश्य सार्वभौमिक है।
व्यावहारिक चिंतन
हम अपने जीवन में कैसे इस व्यापक उद्धार के दायरे को अनुभव कर सकते हैं? - दूसरों के साथ समान सम्मान बनाए रखें, उन स्थानों तक पहुँचें जहाँ प्रभु के प्रेम की जरूरत है, और चेतावनी के बजाय আশ्वासन दें कि ईश्वर हर one के लिए है। - समुदाय-निर्माण में विविधता को स्वीकार करें, ताकि हर जाति और पृष्ठभूमि के लोग चर्च की एकजुटता में सहभागी बन सकें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
प्रेरितों के काम 15:17 हमें बताता है कि ईश्वर की उद्धार योजना सार्वभौमिक है। प्रभु के नाम के जाप और खोज में सभी जातियाँ जुड़ सकती हैं, क्योंकि ईश्वर का प्रेम भेद-भाव से परे है। इस दृष्टि से चर्च का दायित्व है कि हम हर किसी को उद्धार की राह के करीब लाने के लिए सहयोग करें और विविधताओं में एकता बनाए रखें।
उद्धृत प्रेरक टिप्पणियाँ (संक्षेप)
मत्तीहेनरी, बार्न्स, एडम क्लार्क जैसी सार्वजनिक डोमेन टीकाओं से मिलती-जुलती पंक्तियाँ इस निष्कर्ष को पुष्ट करती हैं कि यह वाक्य ईश्वर की सार्वभौमिक रचना को उजागर करता है—युवा से वृद्ध, राजा से दास तक, सबके लिए ईश्वर की खोज खुली है।
संक्षेपित cross-reference विचार: प्रेरितों के काम 10:34-35 और रोम 10:12-13 के अनुसार प्रभु का नाम सबके लिए है, और जाति-भेद से परे उद्धार की योजना है।