Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 23:1 प्रेरितों के काम 23:2 प्रेरितों के काम 23:3 प्रेरितों के काम 23:4 प्रेरितों के काम 23:5 प्रेरितों के काम 23:6 प्रेरितों के काम 23:7 प्रेरितों के काम 23:8 प्रेरितों के काम 23:9 प्रेरितों के काम 23:10 प्रेरितों के काम 23:11 प्रेरितों के काम 23:12 प्रेरितों के काम 23:13 प्रेरितों के काम 23:14 प्रेरितों के काम 23:15 प्रेरितों के काम 23:16 प्रेरितों के काम 23:17 प्रेरितों के काम 23:18 प्रेरितों के काम 23:19 प्रेरितों के काम 23:20 प्रेरितों के काम 23:21 प्रेरितों के काम 23:22 प्रेरितों के काम 23:23 प्रेरितों के काम 23:24 प्रेरितों के काम 23:25 प्रेरितों के काम 23:26 प्रेरितों के काम 23:27 प्रेरितों के काम 23:28 प्रेरितों के काम 23:29 प्रेरितों के काम 23:30 प्रेरितों के काम 23:31 प्रेरितों के काम 23:32 प्रेरितों के काम 23:33 प्रेरितों के काम 23:34 प्रेरितों के काम 23:35



प्रेरितों के काम 23:11 — इस रात की उपदेश देकर प्रभु की प्रतिज्ञा
तत्काल संदर्भ: प्रेरितों के काम 23 अध्याय में पौलुस को यरूशलेम के बाद रोम की यात्रा की.prepare के संकेत मिलते हैं। इस वाक्य में उसे अगली साक्ष्य के लिए धैर्य और दृढ़ विश्वास दिया गया, ताकि वह रोम में भी गवाही दे सके। उसी रात प्रभु पौलुस के पास आ खड़े होकर यह कह रहे हैं कि धैर्य रख, जो तूने यरूशलेम में किया वैसी ही तुझे रोम में भी करना होगा।
ईश्वर की गवाही और विश्वास में धैर्य
इस वचन में परमेश्वर अपने सेवक को व्यक्तिगत अनुरोध और दिव्य प्रेरणा से भर देता है। प्रभु की उपस्थिति का अनुभव पौलुस को यह विश्वास देता है कि कठिन मार्ग भी गवाही के मार्ग हैं। इससे स्पष्ट होता है कि विश्वासी जीवन में परमेश्वर अपने लोग को दिशा देता है, भले ही अगली मंज़िल कितनी भी कठिन क्यों न हो। यह धैर्य मात्र मानव शक्ति से नहीं आता, बल्कि परमेश्वर के साथ चलने के भरोसे से प्राप्त होता है।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
– धैर्य (हिन: धैर्य): जोखिम और असुविधाओं के बीच स्थिर रहना, जब परिणाम सामने नहीं दिखते।
– गवाही (हिन: गवाही): सच देवयानी का जीवन से निकलकर दूसरों के सामने ईश्वरीय सत्य को व्यक्त करना।
– वह मार्ग (हिन: रोम): नियत लक्ष्य की ओर संयम और दृढ़ तपस्या के साथ बढ़ना—यही प्रेरित जीवन का मूल संकेत है।
मुख्य क्रॉस-रेफरेंसेस
इन संदर्भों से दिखता है कि पवित्र आत्मा की प्रेरणा और परमेश्वर की योजना के अनुरूप धैर्य बनाये रखना एक सामान्य ढांचे का हिस्सा है।
आज का अनुप्रयोग
यथार्थ-उद्धरण (संदर्भित टिप्पणीकारों से संक्षेप)
जहाँ आवश्यक हो, पारंपरिक सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से संक्षिप्त विचार मिलते हैं:
Matthew Henry: “The Lord Jesus encourages Paul to be of good cheer; for as thou hast testified at Jerusalem, so must thou bear testimony at Rome.”
Albert Barnes: “God’s word to Paul here is a pledge of continued fidelity; a pledge that the danger and imprisonment in Jerusalem would not break his calling, but sanctify it for a broader witness.”
Adam Clarke: “The exhortation to be of good cheer, and the assurance of future trial in Rome, show that the divine purpose advances through pain, yet never forsakes the believer.”
नोट: इन टिप्पणीकारों के छोटे-फुटे उद्धरण यहाँ पंक्तिगत सार के रूप में प्रयुक्त हैं और पूर्ण पाठ नहीं हैं।
समापन विचार: प्रभु की आज्ञा में धैर्य का यह संदेश स्मरण कराता है कि जीवन के हर चरण में, चाहे चुनौती कितनी भी भारी लगे, ईश्वर की गवाही देना हमारे जीवन का उद्देश्य है।