Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 23:1 प्रेरितों के काम 23:2 प्रेरितों के काम 23:3 प्रेरितों के काम 23:4 प्रेरितों के काम 23:5 प्रेरितों के काम 23:6 प्रेरितों के काम 23:7 प्रेरितों के काम 23:8 प्रेरितों के काम 23:9 प्रेरितों के काम 23:10 प्रेरितों के काम 23:11 प्रेरितों के काम 23:12 प्रेरितों के काम 23:13 प्रेरितों के काम 23:14 प्रेरितों के काम 23:15 प्रेरितों के काम 23:16 प्रेरितों के काम 23:17 प्रेरितों के काम 23:18 प्रेरितों के काम 23:19 प्रेरितों के काम 23:20 प्रेरितों के काम 23:21 प्रेरितों के काम 23:22 प्रेरितों के काम 23:23 प्रेरितों के काम 23:24 प्रेरितों के काम 23:25 प्रेरितों के काम 23:26 प्रेरितों के काम 23:27 प्रेरितों के काम 23:28 प्रेरितों के काम 23:29 प्रेरितों के काम 23:30 प्रेरितों के काम 23:31 प्रेरितों के काम 23:32 प्रेरितों के काम 23:33 प्रेरितों के काम 23:34 प्रेरितों के काम 23:35



प्रेरितों के काम 23:6 पर हिंदी टिप्पणी
यह पद पौलुस के वार्ता कौशल और परिस्थितिजन्य विवेक को दर्शाता है जब सभा (महासभा) दो दलों के बीच विभाजित थी— सदूकीय और फरीसी— और वह जानकर अपनी बात इस प्रकार कहता है कि वह एक ही मुद्दे पर नहीं था, बल्कि “मरे हुओं की आशा और पुनरुत्थान” के विषय में है। इस कथन से पौलुस ने सभा की धारणाओं को मोड़ने की कोशिश की ताकि उसे प्रतिरोध के बजाय समझौते का मार्ग मिले।
पद का पाठ और संदर्भ में उसका अध्यायीय महत्त्व
पौलुस महासभा में यह स्पष्ट करता है कि उसका मुकद्दमा किन मुद्दों पर टिका है: वह यह नहीं कह रहा कि वह किसी राजनीतिक या सभात्मक खतरे के विरुद्ध बोल रहा है, बल्कि वह ईश्वर की कार्यवाही—मरे हुओं के पुनरुत्थान—के बारे में चर्चित प्रश्न को उठाता है। इस विवरण से स्पष्ट होता है कि पौलुस अपने जीवन के ध्येय को गलती से भी अलग नहीं कर रहा है; वह यीशु मसीह के संदेश को यहूदियों के धार्मिक विमर्श से जोड़ देता है और पुनरुत्थान के साथ जुड़ी आशा को केंद्र बनाकर बहस करता है।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
अन्य पवित्र ग्रंथों से तुलनात्मक संकेत
- परमेश्वर की पुनरुत्थान की साक्षी बातें—प्रचीन और प्रेरितों के कार्य में बारम्बार देखी जाती हैं कि पुनरुत्थान की आशा विश्वासियों के लिए केन्द्रक बनती है।
- पवित्र आत्मा से प्रेरणा का प्रभाव: अन्य स्थानों में भी दिग्गजों के ऊपर विभाजन तोड़ा गया है ताकि ईश्वर के संदेश की एकता बनी रहे।
- यीशु मसीह के मरे हुओं की जी उठान के आधार पर भीषण बहसों के बीच भी संदेश स्पष्ट किया गया है।
व्यावहारिक आवेदन
- कठिन बहसों के बीच धैर्य के साथ श्रोताओं की मजबूरियों को समझना चाहिए; पौलुस ने इसी में सफलता पाई कि वह अपने दावे को एक सार्वभौमिक आशा से जोड़े।
- प्रेरितों के अनुभव से सीखें कि व्यक्तिगत आस्था को साझा करते समय विषय से संबन्धित स्पष्टता और नम्रता बनाए रखना चाहिए ताकि बहस से अधिक मार्गदर्शन मिले।
पठन-सहयोगी संदर्भ
1) प्रेरितों के काम 26:6-8 — पथ के बारे में धारणा बनाते समय पुनरुत्थान की आशा मुख्य भूमिका में रहती है।
2) बेरनाउस 17:3 और रोम 6:5 — मरे हुओं की जीवनधारा से संबंधित विवेचन में पुनरुत्थान की मान्यता साथ रहती है।
3) 1 कुरिन्थियियों 15:12-20 — पुनरुत्थान का चर्चित संदेश और उसका महत्त्व, विशेषकर हार-जीत के विचारों के विरुद्ध।
याद रहे: जिस प्रकार पौलुस ने यहूदियों के नियमों में फंसी बहस से बाहर आकर एक सामान्य आशा को केन्द्रित किया, वही हमारे नित्यमानव जीवन में प्रयोजन बन सकता है—खुद यीशु मसीह में जीवित आशा।
महत्वपूर्ण उद्धरण (जहाँ उपलब्ध): मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क आदि के पब्लिक-डॉमेन विचारों से संकलित आम सचाइयों का संकेत इस पाठ में समाहित है; नीचे उनके अनुसार छोटे कथन जो सीधे इस विषय से जुड़े हैं:
“उद्धार की आख़िरी बातों पर दृढ़ विश्वास, सच्ची शिक्षा को मजबूत बनाता है।”
संक्षेप: प्रेरितों के काम 23:6 में पौलुस की रणनीति एक प्रेरक उदाहरण है कि कैसे एक व्यक्तिगत धार्मिक विषय को साझा करते समय सार्वजनिक हित और आशा को साथ ले जाना चाहिए। यह हमें सिखाता है कि सुसमाचार की एकता धर्म-वर्ग की सीमाओं से ऊपर है और जीवन की सचमुच की आशा—पुनरुत्थान—हमें एक साथ पुनःस्थापित कर सकती है।