Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 24:1 प्रेरितों के काम 24:2 प्रेरितों के काम 24:3 प्रेरितों के काम 24:4 प्रेरितों के काम 24:5 प्रेरितों के काम 24:6 प्रेरितों के काम 24:7 प्रेरितों के काम 24:8 प्रेरितों के काम 24:9 प्रेरितों के काम 24:10 प्रेरितों के काम 24:11 प्रेरितों के काम 24:12 प्रेरितों के काम 24:13 प्रेरितों के काम 24:14 प्रेरितों के काम 24:15 प्रेरितों के काम 24:16 प्रेरितों के काम 24:17 प्रेरितों के काम 24:18 प्रेरितों के काम 24:19 प्रेरितों के काम 24:20 प्रेरितों के काम 24:21 प्रेरितों के काम 24:22 प्रेरितों के काम 24:23 प्रेरितों के काम 24:24 प्रेरितों के काम 24:25 प्रेरितों के काम 24:26 प्रेरितों के काम 24:27



प्रेरितों के काम 24:15 पर दृश्य-आ两ार
पद 24:15 में प्रेरित पॉल का विश्वास-सम्बन्धी धारणा प्रकट होती है कि परमेश्वर सभी लोगों के भविष्य के सोच-विचार से ऊपर है—धर्मी और अधर्मी दोनों का जी उठना होगा। यह संदेष दानीय 12:2 के साथ समन्वित होकर बताता है कि इतिहास एक निर्णायक मुकाम की दिशा में बढ़ रहा है, जहाँ हर कदम पर ईश्वरीय न्याय और पुनर्जीवन का नज़ारा मिलेगा। इस आयत में आशा की उस निश्चितता को प्रस्तुत किया गया है जो दर्शाती है कि समय के भीतर परमेश्वर का उद्देश्य सच है और उसका दिन निश्चय ही आ पहुँचेगा।
मुख्य अर्थ
पौलुस यहाँ यह स्पष्ट करता है कि जीवन के आख़िरी दिन एक परिणाम-भरा समय लाएगा: देव-न्याय और पुनर्जीवन। धर्मी और अधर्मी—दोनों का भविष्य ऐसा होगा जैसे प्रत्येक के लिए एक-एक मुकदमे का समय निर्धारित है। यह केवल दया नहीं, बल्कि न्याय की संतुलित दृष्टि है, जिसमें परमेश्वर के समक्ष हर व्यक्ति अपने कर्मों के अनुसार प्रतिफल पाएगा।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबद्ध संदर्भ
इन विचारों को समझाने के लिए निम्न से मिलती-जुलती बाइबिल संदर्भ विचार योग्य हैं:
संक्षेप में: पुनर्जीवन के यह संदेश वह आधार बनाते हैं जिस पर संतोष और उत्तरदायित्व की नैतिक जीवनशैली टिकती है। पवित्रता और विश्वास के साथ जीना परमेश्वर के न्याय-युग के आश्वासन की ओर बढ़ना है।
व्यावहारिक अन्वेषण
1) अपने दैनिक निर्णयों में निष्कलंक ईमानदारी को प्राथमिकता दें; 2) कठिन समय में विश्वास-आशा को बनाए रखें, क्योंकि परमेश्वर का न्याय संपूर्ण है; 3) भीड़-भाड़ और आत्म-स्वार्थ से दूर रहकर दूसरों के प्रति करुणा और दया दिखाने का प्रयास करें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह आयत यह याद दिलाती है कि इतिहास के अंत में ईश्वर का न्यायपूर्ण सिंहासन स्थिर होगा। धर्मी और अधर्मी के लिए न्याय का दिन निश्चित है, और इस आशा के साथ जीवन जीना हमारे लिए प्रेरणा है कि हम परमेश्वर के Kingdom के अनुरूप जीवन बनाएं।
पूर्व-उद्धरण उद्धरण (संकेतित पाठ)
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी-उद्धरण यदि उपयोग हो, तो नीचे संक्षेप में संकेतित हैं:
“धर्मी और अधर्मी दोनों का जी उठना होगा”—यह पंक्ति प्रेरितों के काम 24:15 के मूल भाव का सरल सार है और पैग़ंबरों के भविष्यवाणी-आधार से जुड़ता है।
नोट: ऊपर उद्धरण केवल उनके सामान्य विचार-रेखाओं के अनुरूप हैं; पूर्ण पाठ उद्धरण यहाँ प्रयुक्त नहीं किया गया है।