Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीदानिय्येल 12:2 बाइबल पद की व्याख्या
दानिय्येल 12:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और जो भूमि के नीचे सोए रहेंगे उनमें से बहुत से लोग जाग उठेंगे, कितने तो सदा के जीवन के लिये, और कितने अपनी नामधराई और सदा तक अत्यन्त घिनौने ठहरने के लिये। (यूह. 5:28-29)
दानिय्येल 12:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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दानिय्येल 12:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 26:19 (HINIRV) »
तेरे मरे हुए लोग जीवित होंगे, मुर्दे उठ खड़े होंगे। हे मिट्टी में बसनेवालो, जागकर जयजयकार करो! क्योंकि तेरी ओस ज्योति से उत्पन्न होती है, और पृथ्वी मुर्दों को लौटा देगी*।

यूहन्ना 5:28 (HINIRV) »
इससे अचम्भा मत करो; क्योंकि वह समय आता है, कि जितने कब्रों में हैं, उसका शब्द सुनकर निकलेंगे।

तत्कालिक परिप्रेक्ष्य
दानिय्येल 12:2 भविष्यवक्ता दानिय्येल के अंतिम भाग में आता है, जहां दानिय्येल ने अंत समय और राष्ट्रों की परीक्षा के संदर्भ में दिव्य आकाशदृष्टियाँ देखीं। पूरा अध्याय न्याय, संकट और परमेश्वर के उद्धार की बात करता है। इस विशेष वचन में "भूमि के नीचे सोए रहना" मरे हुए लोगों के प्रतीक के रूप में उपयोग हुआ है और यह संदेश स्पष्ट करता है कि दिन आएगा जब मृत्यु पर प्रभु का निर्णायक न्याय प्रकट होगा।
क्या यह वचन परमेश्वर और आस्था के बारे में बताता है?
यह वचन परमेश्वर की प्रभुता, जीवित और मृत पर उसके निर्णायक अधिकार तथा अंतिमपटल पर लोकन्याय की आशा व्यक्त करता है। यह बताता है कि मृत्यु अंतिम सीमा नहीं है; परमेश्वर के न्याय से नया विभाजन और भाग-निर्धारण होगा — कुछों को "सदा के जीवन" और कुछों को "सदा तक अत्यन्त घिनौने" ठहराया जाएगा। निहित भाव: परमेश्वर न केवल इतिहास का निर्णायक है, बल्कि अनन्त परिणामों का निर्धारक भी है।
महत्वपूर्ण शब्द और रूपक
सम्बंधित पहुँचाएँ और छोटा स्पष्टीकरण
यूहन्ना 5:28–29 इस वचन के साथ सीधे सम्बन्ध रखता है; वहाँ भी यीशु मृतकों के उठने और न्याय के दो हिस्सों का उल्लेख करते हैं। 1 कुरिन्थियों 15 में पौलुस ने पुनरुत्थान के स्वरूप और पुरुषार्थ का व्याख्यान दिया है, जो दानिय्येल के दर्शन के व्यावहारिक पहलुओं को स्पष्ट करता है। मकबरे से उठने की आशा और न्याय का विभाजन मत्ती 25:31–46 में मसीह के न्याय के चित्र से भी मेल खाता है।
कठोर शब्दों पर ध्यान
वाक्य में "घिनौने" का अर्थ केवल सामाजिक अपमान नहीं है, बल्कि धार्मिक और नैतिक परिणाम का स्थायी स्थिति बतलाता है—परमेश्वर के न्याय के समक्ष अस्वीकृति का अनन्त प्रभाव। इस प्रकार भाषा का उद्देश्य भय उत्पन्न करना नहीं, बल्कि सुनने वालों को परमेश्वर के सामने अपने जीवन का मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित करना है।
पूरक सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियाँ
मैथ्यू हेनरी ने कहा है कि पुनरुत्थान ईश्वर के न्याय का सुनिश्चित प्रमाण है — "those who sleep in the dust shall awake" (संक्षेप उद्धरण)। अल्बर्ट बार्न्स ने इस वचन के न्यायिक पक्ष पर बल दिया और उसे व्यक्तिगत उत्तरदेहिता से जोड़ा। एडम क्लार्क ने पुनरुत्थान की परिस्थितियों और काल के बारे में व्याख्या करते समय ऐतिहासिक-भाषाई बिंदुओं पर रौशनी डाली।
आधुनिक जीवन के लिये अनुप्रयोग
दानिय्येल 12:2 हमें दो बातें याद दिलाता है: पहले, जीवन का अंतिम आकलन अवश्य आएगा; इसलिए नैतिकता, धर्मनिष्ठा और करुणा में निरंतरता आवश्यक है। दूसरे, मृत्यु अंतिम विजय नहीं है — विश्वासियों के लिये आशा है कि परमेश्वर अनन्त जीवन देता है। व्यक्तिगत स्तर पर यह वचन प्रेरित करता है कि हम अपनी प्राथमिकताओं की जाँच करें: क्या हमारा जीवन दयालुता, न्याय और परमेश्वर की आज्ञा के अनुरूप है? सार्वजनिक और व्यक्तिगत न्याय के लिए भी यह चुनौती देता है कि हम ऐसे समाज के निर्माण में काम करें जहाँ सच्चाई और दया के सिद्धांत टिकें।
निष्कर्ष: दानिय्येल 12:2 पुनरुत्थान और अंतिम न्याय की स्पष्ट घोषणा है। यह परमेश्वर की सत्ता, मानवीय जवाबदेही और आशा—तीनों को एक साथ रखता है।