Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीदानिय्येल 12:7 बाइबल पद की व्याख्या
दानिय्येल 12:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब जो पुरुष सन का वस्त्र पहने हुए नदी के जल के ऊपर था, उसने मेरे सुनते दाहिना और बायाँ अपने दोनों हाथ स्वर्ग की ओर उठाकर, सदा जीवित रहनेवाले की शपथ खाकर कहा, “यह दशा साढ़े तीन काल तक ही रहेगी; और जब पवित्र प्रजा की शक्ति टूटते-टूटते समाप्त हो जाएगी, तब ये बातें पूरी होंगी।” (प्रका. 10:5-7)
दानिय्येल 12:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
दानिय्येल 12:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

दानिय्येल 7:25 (HINIRV) »
और वह परमप्रधान के विरुद्ध बातें कहेगा, और परमप्रधान के पवित्र लोगों को पीस डालेगा, और समयों और व्यवस्था के बदल देने की आशा करेगा, वरन् साढ़े तीन काल तक वे सब उसके वश में कर दिए जाएँगे। (प्रका. 13:6-7)

प्रकाशितवाक्य 12:14 (HINIRV) »
पर उस स्त्री को बड़े उकाब के दो पंख दिए गए, कि साँप के सामने से उड़कर जंगल में उस जगह पहुँच जाए, जहाँ वह एक समय, और समयों, और आधे समय तक पाली जाए।

दानिय्येल 8:24 (HINIRV) »
उसका सामर्थ्य बड़ा होगा, परन्तु उस पहले राजा का सा नहीं; और वह अद्भुत रीति से लोगों को नाश करेगा, और सफल होकर काम करता जाएगा, और सामर्थियों और पवित्र लोगों के समुदाय को नाश करेगा।
दानिय्येल 12:7 पर मंथन — एक अंतर्दृष्टिपूर्ण व्याख्या
दानिय्याेल की विभीषण-भविष्यवाणी अस्थिर समयों के बीच भी विश्वास को बनाए रखने की exhortation देती है. इस पद में ऐसे समय का संकेत है जब पवित्र प्रजा की शक्ति टूटती है और तब परमेश्वर की योजना पूरी हो जाती है। यह उद्धार-युग की अंतिम अवधि का संकेत देता है जब सभी बातें ईश्वर के स्थिर शासन के अनुसार घटती हैं।
पद का पाठ और संदर्भ
तब जो पुरुष सन का वस्त्र पहने हुए नदी के जल के ऊपर था, उसने मेरे सुनते दाहिना और बायाँ अपने दोनों हाथ स्वर्ग की ओर उठाकर, सदा जीवित रहनेवाले की शपथ खाकर कहा, “यह दशा साढ़े-three काल तक ही रहेगी; और जब पवित्र प्रजा की शक्ति टूटते-टूटते समाप्त हो जाएगी, तब ये बातें पूरी होंगी।”
यह विवरण परमेश्वर के उत्सव या ज्ञान-आधार पर सीधे विश्वास की पुष्टि करता है: समय की गिनती, न्याय की निश्चितता और मसीही प्रतिश्रुति का अंतकालीन स्वरूप। संदर्भ नीचे दिए गए प्रकरणों से जुड़ता है—प्रकाशित वचन-ग्रंथ के साथ संयोजन में यह स्पष्ट हो जाता है कि धरती के इतिहास का वह भाग जिसमें दुष्ट शक्तियाँ दबदबा बनाती दिखती हैं, अंततः ईश्वर के कड़े न्याय और उद्धार-कार्य के साथ समाप्त होगा।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस अंश की केंद्रीय सीख है: कठिन समय में भी ईश्वर की योजना अनिश्चित नहीं रहती; विश्व के हालात कितने भी भयावह क्यों न दिखें, पवित्र प्रजा को संहार नहीं मिलेगा, बल्कि उनके पथ पर परमेश्वर की पुष्टि और सुरक्षा रहती है। धर्मी लोग जब बंधन और कमी देखते हैं, तब भी वे सच्चे विश्वास के साथ टिके रहते हैं; क्योंकि यह समय साढ़े तीन काल तक है—यह एक अलांन-चुने समय की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है, न कि पूर्ण-सीमा. जब पवित्र प्रजा की शक्ति टूट जाती है, तब भी न्याय-सम्पूर्ण योजना पूरी होती है।
अनुशासनात्मक अनुप्रयोग
पवित्र सम्बन्धपूर्ण क्रॉस-रेफरेंसे
विश्वास के समय के महत्व पर ध्यान देने के लिए इस अध्याय से जुड़े कुछ प्रमुख संदर्भ:
- प्रेरितों के लेखन में समय-सीमा और विधान-न्याय का विचार मिलता है; संकेत मिलता है कि कठिन समय के बीच ईश्वर का योजनाबद्ध कार्य प्रकट होता है।
- प्रकाशित-वाक्यों (प्रका. 10:5-7) के साथ दानिय्येल के समय-आकलन में भी पूर्णता और अंतिम सिद्धांत दिखता है कि परमेश्वर समयानुसार ही सब घटित करता है।
इन क्रॉस-रेफरेंसेज़ से एक संदेश स्पष्ट होता है: समय के हर मोड़ पर ईश्वर के नियम और न्याय, दोनों एक साथ क्रियाशील रहते हैं तथा विश्वासी भक्ति में बल मिलता है।
संक्षेप और निष्कर्ष
दानिय्येल 12:7 एक ऐसी राहत देता है कि बड़े संकट के बीच भी परमेश्वर की सत्य-प्रतिज्ञा अचल है. “यह दशा साढ़े तीन काल तक ही रहेगी” का उल्लेख संकेत-भर है कि अधर्म की व्याप्ति एक निश्चित क्रम में घटती है और उसके बाद ईश्वर की परीक्षा और उद्धार-कार्य पूर्ण होंगे. यह पठन प्रेरित करता है कि हम कठिन समय में भी विश्वास, धैर्य और प्रार्थना के साथ खड़े रहें, और अंत में परमेश्वर के न्याय-विधान के अनुसार ही सब कुछ पूरा होगा।
इस संदेश का एक संतुलित समापन: समय-सीमा के संकेतों के भीतर भी, पवित्र प्रजा की सुरक्षा और परमेश्वर के विजय-कार्य की गारंटी है। यह उद्धार का उन्मुख मार्ग है—बल, धैर्य और ईश्वर-विश्वास के साथ चलना।
टिप्पणियाँ: यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन सिद्धांतों के सार-सार को समेकित करती है; जहाँ संभव हो, उनके शब्दों के छोटे उद्धरण अलग से स्पष्ट रूप से चिन्हित किए गए हैं.