Old Testament
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दानिय्येल 12:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यह बात मैं सुनता तो था परन्तु कुछ न समझा। तब मैंने कहा, “हे मेरे प्रभु, इन बातों का अन्तफल क्या होगा?”
दानिय्येल 12:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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दानिय्येल 12:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रेरितों के काम 1:7 (HINIRV) »
उसने उनसे कहा, “उन समयों या कालों को जानना, जिनको पिता ने अपने ही अधिकार में रखा है, तुम्हारा काम नहीं।

दानिय्येल 10:14 (HINIRV) »
और अब मैं तुझे समझाने आया हूँ, कि अन्त के दिनों में तेरे लोगों की क्या दशा होगी। क्योंकि जो दर्शन तूने देखा है, वह कुछ दिनों के बाद पूरा होगा।”

दानिय्येल 12:6 (HINIRV) »
तब जो पुरुष सन का वस्त्र पहने हुए नदी के जल के ऊपर था, उससे उन पुरुषों में से एक ने पूछा, “इन आश्चर्यकर्मों का अन्त कब तक होगा?”
दानीएल 12:8 पर टिप्पणी: स्पष्ट न समझ पाने की स्थिति और विश्वास की प्रतीक्षा
यह संदर्भ दानीएल के स्वपन और रहस्योद्घाटन को समझने के संघर्ष को दर्शाता है। दानीएल ने उन बातों को सुना है, जिनका अर्थ उसे तत्काल स्पष्ट नहीं हुआ। उसकी गहरी चाहत है कि अंतफल, समय-सार, और भविष्य की योजनाएं समझ में आएँ। परमेश्वर ने उसे धैर्य और विश्वास के साथ देखते रहने की शिक्षा दी, ताकि वह विश्वास और प्रार्थना के साथ आगे चले।
पाद का पठन-परिप्रेक्ष्य
दानीएल 12 अध्याय एक समय-सीमा और अंतिम घटनाओं के विस्तृत विवरण को खोलता है। इस अध्याय में मर्यादित संकेत और गुप्त बातों की चर्चा है, जो भविष्य के उद्धार की योजना के साथ जुड़ी हैं। 8वाँ पद बताता है कि दानीएल ने पढ़े या सुने इन बातों की सच्चाई को समझने की कोशिश की, पर उसे पूर्ण अर्थ नहीं मिल पाया। यह संकेत है कि कुछ दिव्य रहस्य मानव क्षमताओं से परे होते हैं और ईश्वर के समय पर निर्भर रहते हैं।"
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस पंक्ति का मूल पाठ यह है कि ज्ञान की सीमाएं मानव-सीमा से बाहर होती हैं और परमेश्वर के संदर्भ में विश्वास-की प्रतीक्षा और आज्ञाकारिता आवश्यक है। दानीएल स्पष्ट रूप से यह मानते हैं कि सत्य-स्वरूप को जानने की प्रेरणा ईश्वर की प्रेरणा और आदेश से आती है; जब तक वह उचित समय न हो, मनुष्यों को धैर्य और विनम्रता से प्रार्थना और contemplative जीवन रखना चाहिए।
अन्य बाइबल पंक्तियों से सम्बन्ध
जीवन में लागू करने योग्य सीख
संक्षेप में
दानीएल 12:8 में पूछा गया प्रश्न दिखाता है कि दिव्य रोशनी कभी-कभी मानव क्षमताओं से ऊपर होती है। परमेश्वर के समय का सम्मान करते हुए हमें विश्वास, धैर्य और प्रार्थना से आगे बढ़ना चाहिए। यह पंक्ति ऐसी उम्मीद जगाती है कि ईश्वर अपने पवित्र समय पर सभी राज और रहस्य उजागर करेंगे।
संक्षिप्त उद्धरणs (संकेतित स्रोत):
यदि उपलब्ध हो, तो नीचे के पैराग्राफ में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के छोटे प्रत्यक्ष उद्धरणों के स्थान पर छोड़े जा सकते हैं:
— Matthew Henry: “यह बात मैं सुनता तो था परन्तु कुछ न समझा” जैसी अनुभूति एक संतुष्ट दर्शन है कि आध्यात्मिक सत्य कभी-न-कभी गूढ़ रहते हैं।
— Albert Barnes: यह पंक्ति मानव समझ की सीमा को उजागर करती है और ईश्वर के समय की महत्ता बताती है।
— Adam Clarke: रहस्यमय वस्तुओं के लिए धैर्य और विश्वास की विवेकपूर्ण आवश्यकता पर टिप्पणी करते हैं।
क्रॉस-संदर्भों के संदर्भ में आप इनमें से इन पंक्तियों को देखें: यशाए 55:8-9; 1 कुरिन्थियों 13:12; यूहन् 16:12।