Old Testament
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दानिय्येल 12:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब जो पुरुष सन का वस्त्र पहने हुए नदी के जल के ऊपर था, उससे उन पुरुषों में से एक ने पूछा, “इन आश्चर्यकर्मों का अन्त कब तक होगा?”
दानिय्येल 12:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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दानिय्येल 12:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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दानिय्येल 8:13 (HINIRV) »
तब मैंने एक पवित्र जन को बोलते सुना; फिर एक और पवित्र जन ने उस पहले बोलनेवाले से पूछा, “नित्य होमबली और उजड़वानेवाले अपराध के विषय में जो कुछ दर्शन देखा गया, वह कब तक फलता रहेगा; अर्थात् पवित्रस्थान और सेना दोनों का रौंदा जाना कब तक होता रहेगा*?” (प्रका. 11:2)

यहेजकेल 9:2 (HINIRV) »
इस पर छः पुरुष, उत्तर की ओर ऊपरी फाटक के मार्ग से अपने-अपने हाथ में घात करने का हथियार लिए हुए आए; और उनके बीच सन का वस्त्र पहने, कमर में लिखने की दवात बाँधे हुए एक और पुरुष था; और वे सब भवन के भीतर जाकर पीतल की वेदी के पास खड़े हुए।

दानिय्येल 8:16 (HINIRV) »
तब मुझे ऊलै नदी के बीच से एक मनुष्य का शब्द सुन पड़ा, जो पुकारकर कहता था, “हे गब्रिएल, उस जन को उसकी देखी हुई बातें समझा दे।”
दानिय्येल 12:6 का संक्षेप व्याख्यान और संदर्भ
पद 12:6 में वे दिशा-निर्देशन की प्रतीक्षा करते हुए पूछा गया है कि “इन आश्चर्यकर्मों का अन्त कब तक होगा?” यह दृश्य दानिय्येल को भविष्य-घटनाओं के क्रम और समय-चक्र की स्पष्टता पाने की लालसा दिखाता है। यहाँ ‘जो पुरुष सन का वस्त्र पहने हुए नदी के जल के ऊपर था’ वह अत्यंत महत्त्वपूर्ण प्रतीक है—आश्वासन देता है कि समय-क्रम में गूढ़ घटनाओं के बीच एक संकल्पित क्रम है, जिसे परमेश्वर की योजना निर्धारित करती है। पवित्र ग्रंथों के अन्य भागों के साथ यह वाक्य दर्शाता है कि आख़िर कैसे ईश्वर की प्रेरणा और संदेशवाहक (नबी) इतिहास की गहन सूचनाओं को समझ पाने के लिए धैर्य बनाए रखते हैं।
केंद्रीय अर्थ
इस प्रश्न-चिह्न भरे दृश्य में समय की अवधि का अनिश्चितपन और परमेश्वर के नियोजन की ठोस गति दिखती है। “इन आश्चर्यकर्मों” से पक्का संकेत मिलता है कि दृष्टान्तों के पीछे दैवीय क्रिया जारी है और अन्त तक एक निश्चित समाधान मिलेगा। यह नबी दानिय्येल के लिए नहीं, हमारे लिए भी चेतावनी देता है—हमे भी ईश्वर की योजना के पूर्ण प्रकाशन के लिए धैर्य और विश्वास बनाए रखना चाहिए।
मुख्य विषय
संबद्ध अनुभाग-विचार
- संदर्भ: दनिय्येल 7–9 के काल-खंड में भी स्वर्गीय रहस्य उजागर होते हैं; वहाँ वनक और राज्य का परिवर्तन ईश्वर के sovereignty को दिखाता है।
- संदर्भ: मत्ती 24–25 में यीशु भविष्य की घटनाओं की पुनरावृत्ति करता है ताकि विश्वासियों को तैयारी के लिए सचेत किया जा सके।
- संदर्भ: प्रकाशितवाक्य 6–8 भी समय-चक्र और अध्याय-समाप्ति की आशंका को समझाते हैं, जहाँ धैर्य और दृढ़ विश्वास श्रेष्ठ गहना बनाते हैं।
व्यावहारिक चिंतन
हमारे दैनिक जीवन में भी ऐसी धैर्य की आवश्यकता है कि बड़ी परिस्थितियाँ कभी-कभी अस्पष्ट लगती हैं; पर ईश्वर के उपदेश से प्रेरित होकर हम विश्वास और वाचा पर टिके रहते हैं। कठिन समय में प्रार्थना, पवित्रशास्त्र का अध्ययन और समुदाय के साथ सहयोग हमें धैर्य देता है ताकि हम नियत समय के प्रकाश को पहचान सकें।
संक्षिप्त समापन
दानिय्येल 12:6 वह स्मरण कराता है कि आकाशीय योजना की गहराई में समय एक निर्धारित क्रम में चलता है, और यह क्रम अंततः ईश्वर के उद्धार-कार्य के प्रकाश में पूरा होगा। नबी की यह उत्कंठा आज भी हमारे लिए प्रेरणा है—हम भी परमेश्वर के समय के भरोसे में स्थिर रहें।
संदेश-संयोजन (अनुमानित उद्धरण): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक डोमेन टीका-भाव पूछे जाते हैं; नीचे के उद्धरण केवल संदर्भ के लिए उपयोगी हैं, पूरी वाक्यांशों का पाठ नहीं दिया गया है।
संकेत-उद्धरण (संक्षिप्त)
- Albert Barnes: “समय की गति और देव-योजन का भाग यही होता है कि विश्वासियों को धैर्य प्राप्त हो।”
क्रॉस-रेफरेंसेस
1) मत्ती 24:6–14 से समझिए कि भविष्य में होने वाले कथनों में धैर्य और जागरूकता कैसे आवश्यक है; यह दृढ़ विश्वास को बनाए रखने के महत्व को दर्शाता है।
2) दानिय़े़ल 7–9: स्वर्गीय राज की स्थापना और समय-चक्र का चित्रण; परमेश्वर की सत्ता और न्याय की पुष्टि दर्शाता है।
3) प्रकाशन 6–8: परीक्षाओं के बीच भी ईश्वर के नियन्त्रण पर भरोसा बनाए रखने की आवश्यकता।