Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 5:1 यूहन्ना 5:2 यूहन्ना 5:3 यूहन्ना 5:4 यूहन्ना 5:5 यूहन्ना 5:6 यूहन्ना 5:7 यूहन्ना 5:8 यूहन्ना 5:9 यूहन्ना 5:10 यूहन्ना 5:11 यूहन्ना 5:12 यूहन्ना 5:13 यूहन्ना 5:14 यूहन्ना 5:15 यूहन्ना 5:16 यूहन्ना 5:17 यूहन्ना 5:18 यूहन्ना 5:19 यूहन्ना 5:20 यूहन्ना 5:21 यूहन्ना 5:22 यूहन्ना 5:23 यूहन्ना 5:24 यूहन्ना 5:25 यूहन्ना 5:26 यूहन्ना 5:27 यूहन्ना 5:28 यूहन्ना 5:29 यूहन्ना 5:30 यूहन्ना 5:31 यूहन्ना 5:32 यूहन्ना 5:33 यूहन्ना 5:34 यूहन्ना 5:35 यूहन्ना 5:36 यूहन्ना 5:37 यूहन्ना 5:38 यूहन्ना 5:39 यूहन्ना 5:40 यूहन्ना 5:41 यूहन्ना 5:42 यूहन्ना 5:43 यूहन्ना 5:44 यूहन्ना 5:45 यूहन्ना 5:46 यूहन्ना 5:47



मुख्य व्याख्यामूलक बिंदु
यूहन्ना 5:28 में यीशु हमें यह दर्शाते हैं कि वह समय आ रहा है जब कब्रों में स्थित लोग उसके शब्द सुनकर उठेंगे। यह वचन अंतिम प्रत्यक्ष বিচার और उद्धार की आशा को एक साथ जोड़ता है: एक ओर यह विश्वास दिलाता है कि मृत्यु के बाद जीवन है और परमेश्वर के चेतावनों का परिणामस्वरूप पुनर्जीवन होगा; दूसरी ओर यह बुलावा देता है कि हर व्यक्ति अपने कर्मों के अनुसार उत्तर देगा।
पाठ-संदर्भ का साहित्यिक परिवेश
यह अधिकारीक समारोह में यीशु के प्रशासनिक कार्य के क्रम में आता है, जहाँ उसने த उसकी पहचान और उसके अधिकारों को स्पष्ट किया। यह शिक्षा "जीवित के साथ जीवित में प्रवेश" की गूढ़ बातों में से एक है—यानी जो लोग स्मरणीय शब्द सुनते हैं वे भी एक दिन यीशु के सामने उठेंगे और न्याय पाएंगे।
पंच-आयामी theological significance
मेथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क से संकल्पित निशानियाँ
डायरेक्शनल सार में:
मेथ्यू हेनरी का सार यह है कि यह पुनर्जीवन शासन के दिनों की तात्कालिकता और महान न्याय के समय की चमत्कारपूर्ण ध्वनि को दर्शाता है; वे इसे ईश्वर के समक्ष मानवीय उत्तरदायित्व के प्रकाश में देखते हैं।
ऐल्बर्ट बार्न्स ने इसे भविष्य के जीवन के सत्य के रूप में समझाया है—जो लोग कब्रों से उठेंगे वे वही होंगे जो शब्द सुनकर सचेत हुए हैं।
एडम क्लार्क ने भी इस उद्धरण के साथ सीधे तौर पर पुनर्जीवन तथा निर्णय के अवसर का उल्लेख किया है, परन्तु उन्होंने इसे पवित्रता और धैर्य के साथ समझाने की कोशिश की है—यानी समय की योजना में यह घटना ईश्वर के न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप है।
इन तीनों के दायरे में, छोटे-छोटे उद्धरण सार्वजनिक-डायरी-स्तर के हैं और चिकित्सा योग्य हैं; आने वाले उद्धरणों में यदि स्पष्ट शब्द-चयन उपलब्ध हो तो नीचे दिया जाएगा।
क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनके संकेत
1) ईसाई पुनर्जीवन का विचार रोम 6:23 के साथ संबंध रखता है—प्राप्ति के बदले मृत्यु; 2) स्पष्ट न्याय के संदर्भ में पतरस 1:17-18—उचित उत्तरदायित्व और उच्च मानक; 3) एंथेक की प्रेरणा 1 कुरिन्थ 15—जीवन-मृत्यु के संघर्ष में पुनर्जीवन की चमत्कारिक स्थापना।
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि शब्द की शक्ति जीवन देने वाली है और अंतिम निर्णय के समय कड़ी परखी जाएगी।
स्व-चिंतन के संकेत—प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस वाक्य के माध्यम से यीशु पुनर्जीवन के समय की उद्घोषणा करते हैं: हर कब्र से उठना और हर कर्म की गिनती होना निश्चित है। यह चेतावनी नहीं, बल्कि आश्वासन है कि परमेश्वर के शब्द के साथ जीवन की दिशा बनती है। इसे अपनाने वाला व्यक्ति उद्धार की आशा को बनाए रखता है और अंत समय के न्याय से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि वही न्याय ने पहले से सचेत किया है।