Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 5:1 यूहन्ना 5:2 यूहन्ना 5:3 यूहन्ना 5:4 यूहन्ना 5:5 यूहन्ना 5:6 यूहन्ना 5:7 यूहन्ना 5:8 यूहन्ना 5:9 यूहन्ना 5:10 यूहन्ना 5:11 यूहन्ना 5:12 यूहन्ना 5:13 यूहन्ना 5:14 यूहन्ना 5:15 यूहन्ना 5:16 यूहन्ना 5:17 यूहन्ना 5:18 यूहन्ना 5:19 यूहन्ना 5:20 यूहन्ना 5:21 यूहन्ना 5:22 यूहन्ना 5:23 यूहन्ना 5:24 यूहन्ना 5:25 यूहन्ना 5:26 यूहन्ना 5:27 यूहन्ना 5:28 यूहन्ना 5:29 यूहन्ना 5:30 यूहन्ना 5:31 यूहन्ना 5:32 यूहन्ना 5:33 यूहन्ना 5:34 यूहन्ना 5:35 यूहन्ना 5:36 यूहन्ना 5:37 यूहन्ना 5:38 यूहन्ना 5:39 यूहन्ना 5:40 यूहन्ना 5:41 यूहन्ना 5:42 यूहन्ना 5:43 यूहन्ना 5:44 यूहन्ना 5:45 यूहन्ना 5:46 यूहन्ना 5:47



पद का संदर्भ और संदर्भ-योजना
यूहन्ना 5:14 में यीशु मन्दिर में उस चंगे रोगी से मिले, जो अब स्वस्थ हो चुका था। पहले उसने रोगी को चेताया कि वह पाप न करे, ताकि अधिक विपत्ति न आ पड़े। यह पाठ हमें चंगा होने के पीछे धर्मिक और नैतिक चेतना की आवश्यकता पर केंद्रित करता है; यीशु भौतिक चंगाई के साथ आधिकारिक चंगेहों और आध्यात्मिक प्राप्तियों के समन्वय की बात कराते हैं।
मुख्य अर्थ
यूहन्ना 5:14 उस बात की ओर संकेत करता है कि चंगाई केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आत्मिक सुरक्षा और एक नई जीवन-यात्रा के आरम्भ के साथ जुड़ी है। यीशु रोगी को एक सुरक्षा-आह्वान देते हैं: फिर से पाप मत करो, ताकि उसके रहने के लिए नई विपत्ति न हो।यह संयोजित चेतावनी बताती है कि परम पिता के पल-पल की कृपा के उत्तर में हमें पुनः पाप से बचना चाहिए और विश्वास-जीवन को दृढ़ बनाये रखना चाहिए।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबद्ध वाक्यांश और पारंपरिक विचार
पूर्व-चर्म के टिप्पणीकारों के अनुसार, यह पाठ यह दर्शाता है कि मसीह कितनी गहराई से मनुष्य के वास्तविक परिवर्तन को मापते हैं—शारिरिक चंगाई के साथ नैतिक और आध्यात्मिक परिवर्तन भी अनिवार्य है।
कठिन-आइडियाँ और स्पष्ट पाठ
एक व्याख्या यह बताती है कि रोगी ने आश्चर्यजनक रूप से पुराने जीवन-आचरण में लौटने की संभावना हो सकती है; इसलिए पवित्रता की देखरेख और पाप से दूर रहना एक सतर्क जीवन-शैली की ओर संकेत करता है।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में) और उनका स्पष्टीकरण
1) मत्ती 9:12–13 — यीशु कहते हैं कि बीमारी वाले को चिकित्सक की आवश्यकता है; यह बताता है कि आत्मिक रोग भी चिकित्सा चाहता है, और यीशु एक नैतिक परिवर्तन को भी लक्षित करते हैं।
2) लूका 17:14 — रोगी पुनः स्वच्छ होने पर अपनी नई आस्था के साथ जीवन में स्थिर रहने की बात; चंगा होने के बाद चरित्र-उन्नयन भी आवश्यक है।
3) रोम 6:1–2 — पाप की पुरानी सोच से नहीं, बल्कि नई जीवनी में प्रवेश करना चाहिए; पाप से मृत्यु नहीं, बल्कि नया जीवन प्राप्त होता है।
व्यावहारिक चिंतन
इस Verse के अनुसार आज भी हमें चंगाई मिलने के बाद अपनी दिनचर्या में नैतिक दायित्वों को बरकरार रखना चाहिए। मानसिक और व्यवहारिक पवित्रता का अभ्यास, साथ ही दायित्व-भाव और नम्रता, हमारे विश्वास को बनाए रखते हैं।
संक्षिप्त सार
यूहन्ना 5:14 हमें बताता है कि यीशु ने रोगी को चंगा कर सिर्फ शारीरिक तंदुरुस्ती नहीं दी, बल्कि उसे एक नई जीवन-मार्ग पर आने के लिए प्रेरित किया: फिर से पाप न करना, ताकिAdditional विपत्तियाँ न आएं। यह संदेश यह है कि ईश्वर की कृपा का सही उत्तर है नैतिक जीवन और विश्वास-जीवन में स्थिरता।
महत्वपूर्ण उद्धरण (पूर्व-उद्धरणकर्ता से)
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke की सामान्य टिप्पणियों के साथ पाठ की प्रकृति के अनुरूप संकेतों को शामिल किया गया है; किसी ठोस पूर्ण उद्धरण का पूर्ण पाठ यहाँ नहीं है, पर उनके विचार इन बिंदुओं में समाहित रहे हैं।