Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 5:1 यूहन्ना 5:2 यूहन्ना 5:3 यूहन्ना 5:4 यूहन्ना 5:5 यूहन्ना 5:6 यूहन्ना 5:7 यूहन्ना 5:8 यूहन्ना 5:9 यूहन्ना 5:10 यूहन्ना 5:11 यूहन्ना 5:12 यूहन्ना 5:13 यूहन्ना 5:14 यूहन्ना 5:15 यूहन्ना 5:16 यूहन्ना 5:17 यूहन्ना 5:18 यूहन्ना 5:19 यूहन्ना 5:20 यूहन्ना 5:21 यूहन्ना 5:22 यूहन्ना 5:23 यूहन्ना 5:24 यूहन्ना 5:25 यूहन्ना 5:26 यूहन्ना 5:27 यूहन्ना 5:28 यूहन्ना 5:29 यूहन्ना 5:30 यूहन्ना 5:31 यूहन्ना 5:32 यूहन्ना 5:33 यूहन्ना 5:34 यूहन्ना 5:35 यूहन्ना 5:36 यूहन्ना 5:37 यूहन्ना 5:38 यूहन्ना 5:39 यूहन्ना 5:40 यूहन्ना 5:41 यूहन्ना 5:42 यूहन्ना 5:43 यूहन्ना 5:44 यूहन्ना 5:45 यूहन्ना 5:46 यूहन्ना 5:47



यूहन्ना 5:46—“यदि तुम मूसा पर विश्वास करते, तो मुझ पर भी विश्वास करते”
घटना का स्पष्ट संदर्भ यह है कि यीशु ने यहूदियों के सामने बार-बार प्रमाण दिया कि पुरानी व्यवस्था के मुख्य लेखक मूसा ने भविष्य में उनके आगमन की ओर संकेत किया है; अभी के प्रकट में वह स्वयं मसीह हैं। इस पद पर ज़ोर है कि मूसा पर विश्वास करना सिधा रूप से यीशु पर विश्वास करने के समान है, क्योंकि मूसा ने जो लिखा वह मसीह के बारे में है।
क्या बताता है यह पाठ ईश्वर और विश्वास के बारे में
इस वचन में प्रभु यीशु अपना तात्पर्य स्पष्ट कर देते हैं: धर्मशास्त्र के इतिहास में ईश्वर के लक्ष्य क्रिस्त के बिना पूरे नहीं होते। अगर वे मूसा के लेखों में मुझ तक पहुंचते, तो वे मेरे आगमन की योजना को देखकर उनकी आत्मा से आत्मविश्वास करते। इसका संदेश है कि ग्रहणशील विश्वास सही दिशा में ईश्वर के उद्देश्य को पहचानना है—जो बाइबल के समस्त पाठ का एक साथ विवेचन करने से सामने आता है।
महत्वपूर्ण शब्दों/चित्रों की स्पष्ट व्याख्या
संबंधी पद और उपवाक्य
यह विचार लूका 24:27 में भी आता है, जहाँ यीशु ने मास्टरों के साथ उसके सभी पीढ़ियों के लिए मोशे और सभी भविष्यवाणियों को उनके बारे में समझाया। इससे स्पष्ट होता है कि पुरानी व्यवस्था का मूल उद्देश्य नए क्रिया-कलाप में प्रकाशित होता है—यही विश्वास का केंद्र है।
छोटी लेकिन स्पष्ट उद्धरण (एतिहासिक टिप्पणीकारों से)
Matthew Henry के अनुसार, यीशु यह दिखाते हैं कि मूसा ने मसीह के आगमन को उद्घाटित किया है; बिना उद्धार के मानना भविष्य की दृष्टि से अंधा रहता है। Albert Barnes ने यह दर्शाया है कि यदि मूसा की बातों में ईमानदारी है, तो वे मसीह के लिए भी स्पष्ट प्रमाण हैं। Adam Clarke समझाते हैं कि यह वाक्य यह घोषणा करता है कि परिपूर्ण ईमानदारी मूसा के लेखों के साथ-साथ मसीह के साथ भी है।
पवित्रशास्त्री संदर्भ
1) लूका 24:27—यीशु ने मूसा और अन्य नबियों के लेखों को उनके बारे में समझाया।
2) यूहन्ना 5:39—यही विचार जहाँ मूसा पर विश्वास मसीह पर विश्वास के समान है।
3) मत्ती 5:17—यहोवा की योजना पुरानी व्यवस्था में भी पूरी होती है।
आज का अनुप्रयोग
हमारे जीवन में यह संदेश याद दिलाता है कि सच्चा विश्वास केवल लोक-धार्मिकता नहीं है, बल्कि परमेश्वर की योजना को पहचानना है—यानी अपने समय और जीवन में यीशु मसीह को केंद्र बनाना। बाइबल के बाकी भागों के साथ यह समझना कि पुराने विश्वास का लक्ष्य यीशु ही हैं, हमारे καθημεριν व्यवहार में श्रद्धा, पवित्रता और धैर्य लाता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यूहन्ना 5:46 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की उद्धार योजना को सही ढंग से समझने के लिए मूसा के लेखों में तत्कालीन प्रतीकात्मक संकेतों को भी देखना आता है, जो अंततः मसीह के माध्यम से पूर्ण होती है। इस विश्वास से हम अपने जीवन में परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप चलें।