Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 5:1 यूहन्ना 5:2 यूहन्ना 5:3 यूहन्ना 5:4 यूहन्ना 5:5 यूहन्ना 5:6 यूहन्ना 5:7 यूहन्ना 5:8 यूहन्ना 5:9 यूहन्ना 5:10 यूहन्ना 5:11 यूहन्ना 5:12 यूहन्ना 5:13 यूहन्ना 5:14 यूहन्ना 5:15 यूहन्ना 5:16 यूहन्ना 5:17 यूहन्ना 5:18 यूहन्ना 5:19 यूहन्ना 5:20 यूहन्ना 5:21 यूहन्ना 5:22 यूहन्ना 5:23 यूहन्ना 5:24 यूहन्ना 5:25 यूहन्ना 5:26 यूहन्ना 5:27 यूहन्ना 5:28 यूहन्ना 5:29 यूहन्ना 5:30 यूहन्ना 5:31 यूहन्ना 5:32 यूहन्ना 5:33 यूहन्ना 5:34 यूहन्ना 5:35 यूहन्ना 5:36 यूहन्ना 5:37 यूहन्ना 5:38 यूहन्ना 5:39 यूहन्ना 5:40 यूहन्ना 5:41 यूहन्ना 5:42 यूहन्ना 5:43 यूहन्ना 5:44 यूहन्ना 5:45 यूहन्ना 5:46 यूहन्ना 5:47



यूहन्ना 5:12 पर टिप्पणी: वह कौन मनुष्य है जिसने तुझ से कहा, ‘खाट उठा और, चल फिर’?
यह दृश्य यूहन्ना 5 अध्याय में बाल्टिमोर के जिसे यीशु ने बेथेस्दा के pool के पास खड़े रोगी को चंगा किया, उसके बाद का हाल है। इन पंक्तियों में रोगी से पूछा गया कि जिसने उसे चंगा किया, वह कौन है? यह सवाल गहराई से स्मरण दिलाता है कि चंगाई केवल शारीरिक नहीं, आस्था और पहचान का प्रश्न भी है।
प्रसंग की मूल समझ
यूहन्ना 5 में यह घटना यहूदियों के नगर के वृत्त में घटती है जहाँ रोगी उस समय परिष्ट था। यीशु ने उसे चंगा किया, पर उस व्यक्ति ने तुरंत यह नहीं समझा कि कितनी राहत किसके द्वारा आई है। दूसरे शब्दों में, चंगाई के स्रोत की स्पष्ट पहचान का प्रश्न उन्होंने पूछा— कौन सा आगाम कौन है जिसने उसे यह आशीष दी? यह स्पष्ट करता है कि चंगाई के पीछे व्यक्तिगत पहचान का भाव भी है: यीशु एक दिव्य सत्ता के रूप में प्रकट होते हैं, जो मानव जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाता है।
मुख्य संदेश
इस पद के मूल संदेश में यह स्पष्ट है कि चंगा होना केवल एक संकेत नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत और पहचान का प्रमाण है। जिसने यह शब्द कहा, उसने रोगी के जीवन में एक नया पक्ष प्रकाशित किया: विश्वास की संविदा और उन अदृश्य शक्तियों की उपलब्धि जिन्हें मानव समझ नहीं पाती। यह पद हमें याद दिलाता है कि ईश्वरीय क्रिया मनुष्य की दैनिक ज़िंदगी में उभरती है, पर वह क्रिया जब व्यक्त होती है, तो उसकी सत्ता की पहचान भी आवश्यक है।
पवित्रशास्त्रीय विषय और थीम
पवित्रशास्त्रीय क्रॉस-रेफरेंसे
इन संदर्भों से यह अनुभूति मिलती है कि चंगाई और पहचान का प्रश्न कैसे बार-बार प्रेरित होता है:
पूर्ववत चर्चित टिप्पणीकारों के संकलन से एक संयुक्त दृष्टि
मैथ्यू हेन्की, आेम-एबर्न्स और अडम क्लार्क के व्याख्यानों में यह बात उभरती है कि चंगाई की प्रक्रिया में प्रभु की पहचान स्पष्ट होती है और यह व्यक्ति-केन्द्रित अनुभव बनकर सामने आती है। अगर उपयोगी एक short उद्धरण चाहें, तो नीचे उनके विचारों से संकलित आंशिक भाव मिलते हैं:
“ईश्वर के काम यहाँ वही मिलता है जो विश्वास से सामने आता है।” — मैथ्यू हेन्की
“चंगाई मात्र देह तक सीमित नहीं, यह आत्मा की स्थिति और विमर्श का भी परिवर्तन है।” — अलेक्जेंडर ए. बर्न्स
“यह चंगा होने की घटना एक संकेत है कि प्रभु की शक्ति मानव इतिहास के भीतर क्रियात्मक रूप से चलती है।” — अडम क्लार्क
संक्षिप्त devotional विचार
हम इस पद से सीखते हैं कि यीशु का आना और शब्द ‘खाट उठा और चल’ जीवन में परिवर्तन के लिए बुलावा है। क्या आप भी उस आवाज को पहचानते हैं जो आपका नाम लेकर कहती है, “चल"— विश्वास में आगे बढ़ो? ईश्वर का समर्थ हाथ हर दिन हमारे साथ है, चाहे हमारे विचार या परिस्थितियाँ कितनी भी उलझी क्यों न हों।
सार विषय-वस्तु
यह पंक्ति हमें यह समझाती है कि चंगाई केवल दिखावे की बात नहीं, बल्कि पहचान और विश्वास का सवाल है। जो भी प्रभु के नाम से आया, उसने नया जीवन पाया।