Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 5:1 यूहन्ना 5:2 यूहन्ना 5:3 यूहन्ना 5:4 यूहन्ना 5:5 यूहन्ना 5:6 यूहन्ना 5:7 यूहन्ना 5:8 यूहन्ना 5:9 यूहन्ना 5:10 यूहन्ना 5:11 यूहन्ना 5:12 यूहन्ना 5:13 यूहन्ना 5:14 यूहन्ना 5:15 यूहन्ना 5:16 यूहन्ना 5:17 यूहन्ना 5:18 यूहन्ना 5:19 यूहन्ना 5:20 यूहन्ना 5:21 यूहन्ना 5:22 यूहन्ना 5:23 यूहन्ना 5:24 यूहन्ना 5:25 यूहन्ना 5:26 यूहन्ना 5:27 यूहन्ना 5:28 यूहन्ना 5:29 यूहन्ना 5:30 यूहन्ना 5:31 यूहन्ना 5:32 यूहन्ना 5:33 यूहन्ना 5:34 यूहन्ना 5:35 यूहन्ना 5:36 यूहन्ना 5:37 यूहन्ना 5:38 यूहन्ना 5:39 यूहन्ना 5:40 यूहन्ना 5:41 यूहन्ना 5:42 यूहन्ना 5:43 यूहन्ना 5:44 यूहन्ना 5:45 यूहन्ना 5:46 यूहन्ना 5:47



यूहन्ना 5:35 पर टिप्पणी — एक दीपक की प्रकाशन और उसका उद्देश्य
परिचय: इस पद में यीशु जिक्र करते हैं उस दीपक का जो जल रहा है और चमक रहा है। वह दीपक उस समय के यहूदियों के बीच के विश्वास-चेतना का प्रतिरूप है, जिसे प्रकाशक “मंगलमय” समझते थे, ताकि वे अंधकार से निकलकर सच की ज्योति पाएं। यह पाठ ईश्वर के एक अनुग्रहपूर्ण उद्देश्य को प्रकट करता है: सत्य की उद्घोषणा और आत्मा में जागरण।
परिचय—पद के अध्याय के भीतर स्थिति
यूहन्ना 5 में यीशु झील के पास रोगीों को चकित करते हैं और यहूदियों के साथ उनके संवाद का मंच बनता है। 35वाँ पद एक प्रकार की नज़ाकत में है, जहाँ यीशु एक पूर्वसज्जित दृश्य देता है: एक दीपक है जो जल रहा है और चमक रहा है। यह उन लोगों की अस्थिर रुचि की ओर संकेत है जो थोड़े समय के लिए प्रकाश को स्वीकार करते हैं, परन्तु स्थायी परिवर्तन के लिए नहीं।
मुख्य आत्मिक शिक्षा
इस वाक्य का मूल संदेश है—परमेश्वर के प्रकाश का उद्देश्य दूसरों को मार्गदर्शित करना है, शोर-शराबे या अपने आप को महिमामंडित करना नहीं। दीपक जलना, प्रज्वलित रहना और दूसरों के लिए रोशनी छोड़ना—यही ईश्वर के राज्य के जीवित जीवन का प्रमाण है। और यह भी कि मानवीय स्वार्थ या अस्थायी रुचियाँ कभी भी स्थायी वास्तविकता नहीं दे सकतीं; केवल प्रकाश की निरंतरता ही आंतरिक परिवर्तन और आत्म-आत्मसंतुष्टि को जन्म दे सकती है।
अनुरूप उद्धरण और तुलनात्मक पाठ
यहाँ तीन सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से आस्वादनिक बिंदु मिलते हैं:
इन टिप्पणियों से एक सामान्य निष्कर्ष निकलता है: प्रकाश का स्थायित्व और दूसरों तक पहुँच उसका प्रमुख उद्देश्य है।
शास्त्रीय क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में)
क्योंकि नीचे दिए गए संदर्भ पूरी धारणा को गहराई देते हैं, उनमें से तीन संक्षेप में:
ये संदर्भ बताते हैं कि प्रकाश और जीवन का असली उद्देश्य स्वयं को नहीं, वरन् दूसरों को दिशा देना है।
व्यावहारिक आवेदन
व्यवहारिक उदाहरण: न केवल चर्च में, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में जागरूकता, करुणा और नैतिकता से अपने आस-पास के लोगों की सहायता करें।
संक्षिप्त सार
यह पद बताता है कि ईश्वर की प्रकाश-यात्रा स्थायी है और यह हमें दूसरों की दिशा में प्रेरित करती है। दीपक के समान हमें भी जलते रहना चाहिए ताकि अंधकार में बैठे लोग भी सत्य की रोशनी पाएं।