Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 5:1 यूहन्ना 5:2 यूहन्ना 5:3 यूहन्ना 5:4 यूहन्ना 5:5 यूहन्ना 5:6 यूहन्ना 5:7 यूहन्ना 5:8 यूहन्ना 5:9 यूहन्ना 5:10 यूहन्ना 5:11 यूहन्ना 5:12 यूहन्ना 5:13 यूहन्ना 5:14 यूहन्ना 5:15 यूहन्ना 5:16 यूहन्ना 5:17 यूहन्ना 5:18 यूहन्ना 5:19 यूहन्ना 5:20 यूहन्ना 5:21 यूहन्ना 5:22 यूहन्ना 5:23 यूहन्ना 5:24 यूहन्ना 5:25 यूहन्ना 5:26 यूहन्ना 5:27 यूहन्ना 5:28 यूहन्ना 5:29 यूहन्ना 5:30 यूहन्ना 5:31 यूहन्ना 5:32 यूहन्ना 5:33 यूहन्ना 5:34 यूहन्ना 5:35 यूहन्ना 5:36 यूहन्ना 5:37 यूहन्ना 5:38 यूहन्ना 5:39 यूहन्ना 5:40 यूहन्ना 5:41 यूहन्ना 5:42 यूहन्ना 5:43 यूहन्ना 5:44 यूहन्ना 5:45 यूहन्ना 5:46 यूहन्ना 5:47



यानि इस पद का सीधा मतलब
यहोवा के पुत्र के रूप में यीशु ने अपने आप को परमेश्वर के समान ठहराते हुए यहूदियों को चकित नहीं किया कि वह शब्त के दिन पर निर्भरता नहीं रखते, बल्कि यह दिखाता है कि वह परमेश्वर की बड़ाई और भक्तियों की सही नियमावली को नया रूप दे रहा है। इस कारण यहूदियों ने उसे मौत पर टीका-तिरस्कार किया क्योंकि वह न केवल सब्त के दायित्वों की भावना से विचलित करता है, बल्कि परमेश्वर को अपने पिता कहकर उसे परमेश्वर के तुल्य ठहराता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहूदियों के साथ टकराव उनके धर्म-व्यवस्था के भीतर गहराते थे—शब्त के दिन के नियमों के पालन से जुड़े कठोर अभ्यासों के बीच यीशु यह दिखाते हैं कि उसने परमेश्वर के साथ अपनी विशेष सदस्यता और उनके-designated कार्य को भीतर से परिवर्तन-संरचना दी है। उनके अनुसार शब्त के तामझाम से ऊपर वह जीवन का स्रोत है और सत्य-जीवन को मानवीय नियमों से Azure नहीं किया जा सकता।
interpretive observations
मुख्य विचारों की छोटी सूची
अन्य संबंधित पदों के साथ संक्षिप्त संबंध-व्याख्या
1) यूहन्ना 10:30—“मैं और पिता एक हैं”—यह दिखाता है कि पिता-सम्बन्ध और पुत्र-स्थिति में समानता का भाव है।
2) मिस्र के स्रोतों के संदर्भ से दूर नहीं, परन्तु मत्ती 12:8—“मनुष्य का पुत्र शब्त से ऊपर है”—यह व्यवस्था के भीतर जीवन के आयाम को उजागर करता है।
3) यूहन्ना 14:9—“जो मुझ को देखे, उसने पिता को देखा”—यह कहकर यीशु ने दिखाया कि परमेश्वर की प्रकृति को मानव-आवाज में कैसे व्यक्त किया गया है।
उचित व्यावहारिक निष्कर्ष
खुलासा यह है कि यीशु के वक्तव्य मनुष्य के लिए क्योंकि वे परमेश्वर के प्रेम और जीवन के भरोसे को उजागर करते हैं। नियम-पालन के साथ-साथ प्रेम-कार्य से जीवन मिलता है। यीशु के भीतर परमेश्वर की सत्ता का सच ठहरता है: यह केवल नियमों का कठोर पालन नहीं, बल्कि परमेश्वर के पुत्र के रूप में जीवन की दिशा-संस्कार है।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण (पूर्व-प्रकाशित टिप्पणीकारों से)
एडम क्लार्क और अॅल्बर्ट बार्न्स जैसी पुराने प्रकाशकों के अनुसार, यीशु का यह दावा परमेश्वर के साथ अपने संबंध की उच्च स्थिति को दर्शाता है कि वह स्वयं परमेश्वर के तुल्य-प्रधान हैं। क्लार्क और होर्स की टिप्पणी में यह कहा गया है कि यीशु ने स्वयं को परमेश्वर के बराबर बताया, जो यहूदियों के लिए अत्यंत विरोधी था और उन्होंने उसे मार डालने की योजना बनाई।
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