Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 5:1 यूहन्ना 5:2 यूहन्ना 5:3 यूहन्ना 5:4 यूहन्ना 5:5 यूहन्ना 5:6 यूहन्ना 5:7 यूहन्ना 5:8 यूहन्ना 5:9 यूहन्ना 5:10 यूहन्ना 5:11 यूहन्ना 5:12 यूहन्ना 5:13 यूहन्ना 5:14 यूहन्ना 5:15 यूहन्ना 5:16 यूहन्ना 5:17 यूहन्ना 5:18 यूहन्ना 5:19 यूहन्ना 5:20 यूहन्ना 5:21 यूहन्ना 5:22 यूहन्ना 5:23 यूहन्ना 5:24 यूहन्ना 5:25 यूहन्ना 5:26 यूहन्ना 5:27 यूहन्ना 5:28 यूहन्ना 5:29 यूहन्ना 5:30 यूहन्ना 5:31 यूहन्ना 5:32 यूहन्ना 5:33 यूहन्ना 5:34 यूहन्ना 5:35 यूहन्ना 5:36 यूहन्ना 5:37 यूहन्ना 5:38 यूहन्ना 5:39 यूहन्ना 5:40 यूहन्ना 5:41 यूहन्ना 5:42 यूहन्ना 5:43 यूहन्ना 5:44 यूहन्ना 5:45 यूहन्ना 5:46 यूहन्ना 5:47



यूहन्ना 5:5 — तुरंत सेटिंग और संदर्भ
यूहन्ना 5 में यीशु ने बपतिस्मा के समय के बाद एक खास अवसर पर बहुधा दिखाई देने वाले चिकित्सक चमत्कारों के नमूने प्रस्तुत किए। यह पद वह है जिसमें एक ऐसा व्यक्ति दिखा जाता है जो अड़तीस वर्षों से बीमारी से जूझ रहा था। यह संदर्भ हमें उस समय के जनजीवन की वास्तविकता, रोग और सामाजिक दूरी के साथ जुड़ी जटिलताओं का आभास कराता है, और यह भी दिखाता है कि ईश्वर की योजना कितनी दयालु और सशक्त है।
यही पाठ क्या बताता है — परमेश्वर या आस्था के बारे में
इस पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर का उपचार केवल भौतिक शारीरिक स्थिति तक सीमित नहीं है; वह जीवन के हर क्षेत्र में आस्था के साथ काम करता है। एक दीर्घ रोगी के जीवन में आशा की क्षीण होती स्थितियों के बीच भी ईश्वर की कृपा की प्रतीक्षा संभव है। यह भी संकेत है कि यीशु मनुष्यों के दर्द को जानते हैं और उनके समय-सारिणी के अनुरूप कार्य करते हैं, भले ही रोगी अपने आप को कितनी भी निराश महसूस करे।
शब्दों की पहचान और चिन्हित इमेज
“अड़तीस वर्ष से बीमारी” एक दीर्घकालिक अवस्था दर्शाती है—एक ऐसी स्थिति जिसमें व्यक्ति समाज से अलग-थलग पड़ सकता है और उम्मीद कम हो जाती है। इस विशिष्ट रोगी के चित्रण से प्रेरणा मिलती है कि ईश्वर की शक्ति समय और सीमा को नहीं मानती; चंगे करने में प्रभु का अपना नियत समय होता है।
प्रमुख क्रॉस-रेफरेंसेज़ (चर्चनीय पथ)
इन संदर्भों में स्पष्ट है कि विश्वास के साथ ईश्वर की उपस्थिति रोग के साथ-साथ जीवन में भी उन्नয়ন ला सकती है और समय-निर्धारण उनकी योजना का एक भाग है।
पवित्रशास्त्र के साथ आज की अनुप्रयोग
आज भी गहरे रोग, निराशा और लंबे समय तक चली कठिनाइयों के बीच हमें यीशु के इनहर샤द का स्मरण करना चाहिए। ईश्वर के समय पर भरोसा रखें, न कि केवल अपनी स्थिति के कारण डरें। यदि आप दीर्घकालिक संघर्ष में हैं, तो निम्न बातें उपयोगी हो सकती हैं:
संक्षिप्त निष्कर्ष
यूहन्ना 5:5 हमें यह सिखाता है कि दीर्घ रोग भी ईश्वर के प्रेम की दृष्टि से अनदेखा नहीं किया जाता। विश्वास, धैर्य और प्रभु के समय पर भरोसा करने से आत्मा-स्वास्थ्य और सामाजिक sambandh सुधरते हैं।
Exact quotes from recognized commentators (if used): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के पते-खींचे शब्द सीधे उद्धृत न होते हुए, उनकी सामान्य शिक्षा-योग्यता के अनुसार समाहित किए गए हैं।