Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 5:1 यूहन्ना 5:2 यूहन्ना 5:3 यूहन्ना 5:4 यूहन्ना 5:5 यूहन्ना 5:6 यूहन्ना 5:7 यूहन्ना 5:8 यूहन्ना 5:9 यूहन्ना 5:10 यूहन्ना 5:11 यूहन्ना 5:12 यूहन्ना 5:13 यूहन्ना 5:14 यूहन्ना 5:15 यूहन्ना 5:16 यूहन्ना 5:17 यूहन्ना 5:18 यूहन्ना 5:19 यूहन्ना 5:20 यूहन्ना 5:21 यूहन्ना 5:22 यूहन्ना 5:23 यूहन्ना 5:24 यूहन्ना 5:25 यूहन्ना 5:26 यूहन्ना 5:27 यूहन्ना 5:28 यूहन्ना 5:29 यूहन्ना 5:30 यूहन्ना 5:31 यूहन्ना 5:32 यूहन्ना 5:33 यूहन्ना 5:34 यूहन्ना 5:35 यूहन्ना 5:36 यूहन्ना 5:37 यूहन्ना 5:38 यूहन्ना 5:39 यूहन्ना 5:40 यूहन्ना 5:41 यूहन्ना 5:42 यूहन्ना 5:43 यूहन्ना 5:44 यूहन्ना 5:45 यूहन्ना 5:46 यूहन्ना 5:47



मुख्य व्याख्या निष्कर्ष
यरूशलेम के भेड़-फाटक के पास स्थित कुण्ड “बैथहसदा” परमेश्वर के निवास के निकटता, प्रतीकात्मक रूप से जीवन के प्यासे को पवित्र स्थान तक आकर्षित करने की चाह दिखाता है। यहाँ का मूल वाक्य यह बताता है कि एक ऐसी स्थान की पहचान है जहाँ पाँच ओसारे हैं और यह यहूदियों के प्राचीन रीति-रिवाज और मंदिर-परिसर के भीतर जीवन के रिश्ते को दर्शाता है। यह पाठ भी हमारी आत्मिक प्यास और उद्धार के लिए यीशु के आगमन के प्रतीक के रूप में समझ सकता है: पानी से जीवन की तलाश, जिसका पूर्ण समाधान वह स्वयं हैं।
काव्यात्मक-साक्षात्कारिक संदर्भ (लिटरेरीContext)
यूहन्ना 5 अध्याय का संदर्भ, जहाँ यीशु शहर के निकट एक कुण्ड के साथ चमत्कार दिखाते हैं, जीवन के स्रोत के रूपक को उजागर करता है। बैथहसदा का कुण्ड, इब्रानी नाम में भी प्राचीन परंपरा की याद दिलाता है। यह दृश्य दर्शाता है कि कैसे व्यक्तिगत प्यास—शारीरिक या आध्यात्मिक—ईश्वर के सामने निष्क्रिय नहीं रहती; वह यीशु के वर्तमान आह्वान के साथ उद्धार की दिशा में मोड़ लेती है।
धार्मिक-तत्व और थियोलॉजिकल संदेश
1) स्थान का संकेत: बैथहसदा—“ईश्वर के घर” से जुड़ा नाम—यह दर्शाता है कि ईश्वर के निकटता का स्थान कभी-भी मामूली नहीं रहता; यह वह जगह है जहाँ जीवन अबाध रूप से उपलब्ध है। 2) पाँच ओसारे: समाज में विविध प्रकार के प्यासे व्यक्तियों के लिए आश्रय और उपचार के संकेत हैं; यीशु बताने वाले हैं कि वह जीवन के स्रोत हैं जो सभी को बाँटते नहीं, बल्कि प्यास बुझाते हैं। 3) उद्धार का केंद्र: यीशु स्वयं जीवन का पानी होने का दावा करते हैं, जहाँ मनुष्य को शुद्धता और चंगाई मिलती है।
पवित्र शास्त्रों से सम्बद्ध-कोर सन्निकटन
आत्म-चिंतन के प्रश्न
सीख-सार और निष्कर्ष
बैथहसदा कुण्ड का चित्र केवल एक भौतिक स्थान नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि ईश्वर के साथ निकटता में जीवन का सही स्रोत किस प्रकार काम करता है। यीशु स्वयं को जीवन का जल बतलाते हैं; जो उसका सेवन करता है वह जीवन बना रहता है। यह पाठ हमें स्मरण कराता है कि धार्मिक रीति-रिवाजों से आगे बढ़कर हमारी आस्था का केन्द्र कौन है—यही है उद्धारकर्ता।
प्लग-इन उद्धरण (public-domain विचारधारा से)
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के प्रवचनों के सार से प्रेरित उपयुक्त अभिवचन इस प्रकार मिलते हैं: कुछ पंक्तियाँ उनके विशद-उद्धरण से उद्धृत हैं जहाँ उन्होंने यह दर्शाया है कि यह स्थान परमेश्वर की उपस्थिति और जीवन के वास्तविक स्रोत के रूप में काम करता है।
Cross-references (संक्षिप्त-व्याख्या)
1) यूहन्ना 4:14 — प्यास बुझाने का पानी ईश्वर के दूत से परे जीवन देता है; यह कहानी में यीशु के जल-स्वरूप के साथ जुड़ता है।
2) योब 28:14-15 — आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन का स्रोत शाश्वत है; यह पाठ जीवन के जल के प्रतीक के समान धारणा को पुष्ट करता है।
3) यशायाह 55:1 — सभी को प्यासों के लिए जल-आह्वान; यह उद्धार के जल की सार्वभौमिकता को दिखाता है।
नोट: यह commentary हल्का-सार और एकीकरण पर केंद्रित है; यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke की विशिष्ट पंक्तियाँ देखना चाहें, तो वे सार्वजनिक-डोमेन खोजों में उपलब्ध हैं और यहाँ संक्षेप में उनका सार प्रस्तुत किया गया है।