Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 27:1 प्रेरितों के काम 27:2 प्रेरितों के काम 27:3 प्रेरितों के काम 27:4 प्रेरितों के काम 27:5 प्रेरितों के काम 27:6 प्रेरितों के काम 27:7 प्रेरितों के काम 27:8 प्रेरितों के काम 27:9 प्रेरितों के काम 27:10 प्रेरितों के काम 27:11 प्रेरितों के काम 27:12 प्रेरितों के काम 27:13 प्रेरितों के काम 27:14 प्रेरितों के काम 27:15 प्रेरितों के काम 27:16 प्रेरितों के काम 27:17 प्रेरितों के काम 27:18 प्रेरितों के काम 27:19 प्रेरितों के काम 27:20 प्रेरितों के काम 27:21 प्रेरितों के काम 27:22 प्रेरितों के काम 27:23 प्रेरितों के काम 27:24 प्रेरितों के काम 27:25 प्रेरितों के काम 27:26 प्रेरितों के काम 27:27 प्रेरितों के काम 27:28 प्रेरितों के काम 27:29 प्रेरितों के काम 27:30 प्रेरितों के काम 27:31 प्रेरितों के काम 27:32 प्रेरितों के काम 27:33 प्रेरितों के काम 27:34 प्रेरितों के काम 27:35 प्रेरितों के काम 27:36 प्रेरितों के काम 27:37 प्रेरितों के काम 27:38 प्रेरितों के काम 27:39 प्रेरितों के काम 27:40 प्रेरितों के काम 27:41 प्रेरितों के काम 27:42 प्रेरितों के काम 27:43 प्रेरितों के काम 27:44



कथन का सीधे अर्थ
प्रेरितों के काम 27:6 में कहा गया है कि एक सूबेदार ने सिकंदरिया का जहाज इतालिया भेजा और उसे हमारे ऊपर चढ़ा दिया गया। इस वाक्य से तात्पर्य है कि पौलों-यात्रा के कठिन मार्ग में राजसी और सैन्य संरक्षित व्यवस्था ने पनगाही के स्थान पर प्रभु के दिशा-निर्देशन के अनुसार संवाद बनाए रखा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ प्रेरितों के मार्ग के उन चरणों का भाग है जहाँ पौलुस और उसका दल समुद्री यात्रा कर रहे थे। सूबेदार के जहाज द्वारा सहायता मिलना एक सामान्य सैनिक-सम्बोधन का संकेत है, जो पवित्र मिशन के लिए मानवीय सुरक्षा और व्यवस्थित व्यवस्था प्रदान करता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि नई सच्चाई का प्रचार साधनों के भीतर भी सुरक्षित रूप से आगे बढ़ सकता है, भले ही रोम-समाज की यात्रा कठिन हो।
व्याख्या के मूल बिंदु
महत्वपूर्ण विचार (सूत्र-संयोजन)
यह अध्याय यह दिखाता है कि परमेश्वर के काम में मानवीय व्यवस्था आवश्यक भूमिका अदा करती है—यद्यपि सब कुछ दृढ़ विश्वास के साथ किया जाए। साथ ही यह याद दिलाता है कि संघर्षों के बीच भी ईश्वरीय संरक्षण और मार्गदर्शन मौजूद रहता है।
संकेतित क्रॉस-रेफरेंसेस
1) प्रेरितों के काम 23:11 — प्रभु ने पौलुस को मानसिक और आंतरिक सुरक्षा दी, यही बताता है कि प्रभु के दायरे में यात्रा का नियंत्रण है।
2) प्रेरितों के काम 28:30-31 — कैद में भी सुसमाचार आज भी खुले आकाश की तरह फैलता है: परिस्थितियाँ चाहे जैसी हों, संदेश पहुँचता है।
3) प्रेरितों के काम 16:9-10 — मार्गदर्शक स्वप्न से मार्गनिर्देशन मिलता है ताकि सही मार्ग चुना जाए।
इन संदर्भों में यह स्पष्ट है कि विपरीत परिस्थितियों में भी परमेश्वर की योजना चलती है और मानवीय सहायता उससे जुड़ती है।
संक्षिप्त निष्कर्ष और व्यवहारिक take-away
कठिन समुद्री यात्राओं में भी परमेश्वर अपने लोगों की सुरक्षा और मार्गदर्शन रखता है; मानवीय संस्थाएं भी इस मिशन के लिए उपकरण बनती हैं। विश्वास रखें, और उपलब्ध सेवाओं का सदुपयोग करें। जब भी अवसर मिले, परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप सहयोग को स्वीकार करें।
उद्धरण नोट: इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के उपयुक्त सार-उद्धरण केवल जहाँ उपयुक्त थे, सीधे संरचित किए गए हैं; नीचे उनमें से किसी एक के सटीक उद्धरण यदि संग्रहीत हो, तो केवल वह उल्लेखित किया गया है:
“The Lord stood by him” (Matthew Henry) — यह संकेत देता है कि परमेश्वर व्यक्ति के साथ बना रहता है।