Old Testament
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प्रेरितों के काम 8:1 प्रेरितों के काम 8:2 प्रेरितों के काम 8:3 प्रेरितों के काम 8:4 प्रेरितों के काम 8:5 प्रेरितों के काम 8:6 प्रेरितों के काम 8:7 प्रेरितों के काम 8:8 प्रेरितों के काम 8:9 प्रेरितों के काम 8:10 प्रेरितों के काम 8:11 प्रेरितों के काम 8:12 प्रेरितों के काम 8:13 प्रेरितों के काम 8:14 प्रेरितों के काम 8:15 प्रेरितों के काम 8:16 प्रेरितों के काम 8:17 प्रेरितों के काम 8:18 प्रेरितों के काम 8:19 प्रेरितों के काम 8:20 प्रेरितों के काम 8:21 प्रेरितों के काम 8:22 प्रेरितों के काम 8:23 प्रेरितों के काम 8:24 प्रेरितों के काम 8:25 प्रेरितों के काम 8:26 प्रेरितों के काम 8:27 प्रेरितों के काम 8:28 प्रेरितों के काम 8:29 प्रेरितों के काम 8:30 प्रेरितों के काम 8:31 प्रेरितों के काम 8:32 प्रेरितों के काम 8:33 प्रेरितों के काम 8:34 प्रेरितों के काम 8:35 प्रेरितों के काम 8:36 प्रेरितों के काम 8:37 प्रेरितों के काम 8:38 प्रेरितों के काम 8:39 प्रेरितों के काम 8:40



प्रेरितों के काम 8:14—परिपत्रन का आरम्भ और सामरीय मानना
इस पद में प्रेरित यरूशलेम के उन शिष्यों की प्रतिक्रिया दिखाते हैं जोSamaria में परमेश्वर का वचन फैलने की सूचना पाकर तत्पर हुए। प्रस्तावित संदर्भ में परमशक्ति का स्रोत यशायाह नहीं, बल्कि पवित्र आत्मा का प्रवाह है जो गेहूं और कुटुंब के बाहर भी फैलता है। जब सामरिया के लोग संकेतित पाठ को स्वीकार कर लेते हैं, तब प्रेरित पतरस और यूहन्ना जिन्हें येन ओर एकत्र किया गया था, उन के पास यह संदेश पहुँचा: परमेश्वर ने सबके हृदय खोल दिए हैं और विश्वास की गवाही आगे बढ़ाने के लिए कुछ-कुछ क्रम तय किया गया है।
मुख्य संदेश
यह वाक्य दृश्य-परक है कि यीशु के सुसमाचार का प्रभाव सार्वभौमिक है—येरूशलेम से बाहर के लोगों तक भी पहुंच सकता है। सामरिया, जिसने पहले प्रभु के बारे में गहरी धारणा नहीं मानी थी, अब मान्यता प्राप्त कर रहा है। प्रेरितों का उत्साह यह है कि परमेश्वर का वचन सभी के लिए खुला है और वह आश्रय देता है कि विश्वास के संकेतों के अनुसार समूह बढ़े।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबद्ध पाठ (Cross-references)
1) प्रेरितों के काम 1:8 — विश्व के हर कोने तक सुसमाचार का विस्तार होने की प्रेरणा। यह verse स्पष्ट करता है कि आत्मा से प्रेरित शक्ति कैसे समुदाय-निर्माण और मिशन को संचालित करती है।
2) मिस्र-फरऔन की घटना (यूहन्ना 4:39-42 की तरह संदर्भ): पहले यीशु के विचार का प्रसार एक समुदाय से दूसरे समुदाय में कैसे संचरित होता है, इसका उदाहरण सामरिया के मानवीय अनुभव से मिलता है।
3) प्रेरितों के काम 10:34-35: परमेश्वर हर जाति के लोगों को स्वीकारते हैं—यह पवित्र आत्मा की सार्वभौमता का स्पष्ट परिचय है.
वैचारिक और व्यावहारिक अनुप्रयोग
1) समुदाय के नये अनुभवों के लिए खुले मन से स्वागत करें: जब परमेश्वर नए लोगों में विश्वास डालता है, तब हमारी पूर्व धारणाओं को छोड़कर सहयोग बढ़ाना चाहिए।
2) नेतृत्व और सहयोग: पतरस-यूहन्ना की उपस्थिति बताती है कि आरोहण के बाद भी प्रेरित समुदाय एकजुट रहता है और मिलकर निर्णय लेता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
प्रेरितों के काम 8:14 में दर्शाया गया है कि परमेश्वर के वचन का प्रभाव तथा विश्वास की गवाही समय-समय पर समुदाय-परिर्वतन का आधार बनती है। सामरिया के लोगों का परमेश्वर के वचन को मानना यह चिह्न है कि ईश्वर सभी पर दयालु है और उसकी योजना सभी राष्ट्रों तक फैलती है।
पारिशिष्ट टिप्पणियाँ
इस पद के अनुकूल Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकेत-उद्धरण इस प्रकार हैं:
• Matthew Henry: “The church rejoiced to see souls converted to God, and therefore sent men to confirm and lay the foundation anew.”
• Albert Barnes: “The sending of Peter and John shows that the accession of the gospel to Samaria was not a private whim, but a divinely guided addition to the church.”
• Adam Clarke: “It was necessary to confirm the truth of conversion among the Samaritans by the apostles, showing that grace came through the same channel to all nations.”