Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 3:1 दानिय्येल 3:2 दानिय्येल 3:3 दानिय्येल 3:4 दानिय्येल 3:5 दानिय्येल 3:6 दानिय्येल 3:7 दानिय्येल 3:8 दानिय्येल 3:9 दानिय्येल 3:10 दानिय्येल 3:11 दानिय्येल 3:12 दानिय्येल 3:13 दानिय्येल 3:14 दानिय्येल 3:15 दानिय्येल 3:16 दानिय्येल 3:17 दानिय्येल 3:18 दानिय्येल 3:19 दानिय्येल 3:20 दानिय्येल 3:21 दानिय्येल 3:22 दानिय्येल 3:23 दानिय्येल 3:24 दानिय्येल 3:25 दानिय्येल 3:26 दानिय्येल 3:27 दानिय्येल 3:28 दानिय्येल 3:29 दानिय्येल 3:30
दानिय्येल 3:11 का संदर्भ और अर्थ
यह पद एक महा-स्थिति का हिस्सा है जिसमें बाबेलोनियन राजा नबूकदनीदर के शासन के तहत शास्त्र-पूर्व काल की कथा चलती है। शिड्दीन-शहादत के समय, जब लोग धातु के भट्ठों के भीतर बिना किसी भेदभाव दंडवत करने के लिए दबाव में थे, तब यह चेतावनी स्पष्ट करती है कि परमेश्वर के विरुद्ध सीधे विरोध करने पर भी परिणाम कितने कठोर हो सकते हैं। व्यावहारिक रूप से यह संदेश विश्वास की बुलंदी और परमेश्वर के एक-एक सत्य के लिए अडिग रहने की प्रेरणा देता है।
मुख्य विचार
इस verse में तीन तत्व स्पष्ट हैं: दण्डवत् न करने पर आत्म-त्याग नहीं; दण्डव Ner; और दंय-भट्ठे की कठोर परीक्षा की वास्तविकता। अत्याचार के समय भी शुद्ध उपासना और परमेश्वर के लिए निष्ठा की मांग बन जाती है, और यह उद्धार और परीक्षण के बीच के संतुलन को दर्शाता है।
केंद्रीय विषय
पवित्र-विवेचन से संबंधित pasaj
अतिरिक्त संदर्भों में धर्म-सम्मत निष्ठा और परीक्षा के विचार मिलते हैं; जैसे कि दानिय्येल में बालक-केस, और अन्य हुनरवर इतिहास-उद्धरण जहां ईश्वर के भक्तों को कठोर परिस्थितियों में भी भरोसा कर के आगे बढ़ना सिखाते हैं।
सहगामी शास्त्रीय टिप्पणी (संयुक्त सार)
हेन्री, बार्न्स और क्लार्क जैसी प्रसिद्ध पवित्र-ग्रंथ टीका में से: यह घटनाक्रम विश्वास के प्रयोग के रूप में उद्धृत है कि परमेश्वर अपने प्रमादों-आख्यानों के बीच भी भक्तों को सुरक्षित रखेगा। वे कहते हैं कि लोग अपने मन मुताबिक इकबाल बनाते हैं, पर परमेश्वर की सत्ता अपरिवर्तनीय है। इसके साथ, कठिनाई के पल में निष्ठा से खड़े रहने के लिए नम्रता और साहस की आवश्यकता वर्णित है। “जो गिरकर दण्डवत् न करे” वह एक निर्णय है—आसन्न बाधाओं में भी सत्य के प्रति असहमति नहीं। यह दृढ़ता हमें यह सिखाती है कि परमेश्वर पर भरोसा करना और उसकी योजना में सम्मान बनाए रखना किस प्रकार बुराइयों के सामने विजयी बन सकता है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
छोटी-सी समापन पंक्ति
यह verse हमें याद दिलाता है कि आस्था के लिए दबावों के बावजूद ईश्वर के वास्तविक महत्त्व और विश्वास की निष्ठा से अडिग रहना परमेश्वर के साथ संरक्षित यात्रा बनाता है, और समय आने पर उद्धार की कृपा दिखाता है।
संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंस
1) दानिय्येल 3:17-18 — निर्भय विश्वास के साथ असत्य-परिस्थितियों में परमेश्वर की अनुमति पर निर्भर रहना; 2) ड ferment कुसमझ में विश्वास-उद्धार के लिए दृढ़ता की आवश्यकता पर जोर देता है; 3) परन्तु समान प्रकार के परीक्षणों में ईश्वर की शक्ति पर भरोसा रखने की शिक्षा देता है।