Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 3:1 दानिय्येल 3:2 दानिय्येल 3:3 दानिय्येल 3:4 दानिय्येल 3:5 दानिय्येल 3:6 दानिय्येल 3:7 दानिय्येल 3:8 दानिय्येल 3:9 दानिय्येल 3:10 दानिय्येल 3:11 दानिय्येल 3:12 दानिय्येल 3:13 दानिय्येल 3:14 दानिय्येल 3:15 दानिय्येल 3:16 दानिय्येल 3:17 दानिय्येल 3:18 दानिय्येल 3:19 दानिय्येल 3:20 दानिय्येल 3:21 दानिय्येल 3:22 दानिय्येल 3:23 दानिय्येल 3:24 दानिय्येल 3:25 दानिय्येल 3:26 दानिय्येल 3:27 दानिय्येल 3:28 दानिय्येल 3:29 दानिय्येल 3:30



दानिय्येल 3:5 पर संस्था और अर्थ
यह पद दर्शाता है कि जब संगीत के सभी प्रकार के बाजे बजेंगे—नरसिंगे, बाँसुरी, वीणा, सारंगी, सितार, शहनाई—तब राजा नबूकदनेस्सर की सोने की मुर्त्ति के आगे सब लोग झुकें। यह परमादेश का परीक्षण है: भीड़ के साथ-साथ शासन में भी दबाव और दमन की स्थितियाँ बन पड़ती हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
दानिय्येल की पुस्तक की घटना बाबुल के समय की है, जब बाबुल साम्राज्य में नबूकदनेस्सर ने एक विशाल स्वर्ण-मूर्ति बनवाई और उसे हर प्रकार के बाजे के साथ घंटी बजी। जो लोग उस ध्वनि के साथ नमन नहीं करेंगे, उन्हें दंडित करने की धमकी दी गई। इसका उद्देश्य राज्य की एकता और बहुदेववादी संस्कृति के भीतर ईश्वर-विश्वास की परीक्षा करना था।
व्याख्यात्मक निष्कर्ष
क्रॉस-रेफरेंस और उनके अर्थ
- उत्पत्ति 22:12 जैसा कि आस्था के कड़े अवसरों पर परमेश्वर की आज्ञाओं के पालन की मांग आती है; यहाँ भी शास्त्रीय परीक्षण है कि भय के समय श्रद्धा किस दिशा में मोड़ लेती है।
- निर्गमन 20:3-5 में पहले आदेश और वस्त्र-प्रतिष्ठा के बंधन का विरोधाभास दिखता है, जहाँ मनुष्य के worship के केन्द्र को परमेश्वर से हटाने की कोशिश होती है।
- मत्ती 4:9-10 में शैतानी व्यवस्था के सामने यीशु की निष्ठा का मॉडल मिलता है, जो दबाव के बावजूद परमेश्वर की पूजा को सर्वोपरि मानते हैं।
संक्षेप अर्थ: सत्ता के संकेतक आस्था की कसौटी बनते हैं; परन्तु विश्वास में स्वतंत्रता—ईश्वर के सम्मुख प्रतिदान—बरकरार रहता है।
शब्द-चित्रण और महत्त्वपूर्ण चिह्न
स्वर्ण-युक्त मुर्ति का चित्रण यह दर्शाता है कि संसार की बहुमूल्य चीजें भी दमनकारी आदेश के साथ मिश्रित हो सकती हैं। संगीत यहाँ एक राजनीतिक-धार्मिक संकेतक है—जो लोग हरेक ध्वनि के साथ नमन करते, वे अपनी आस्था को एकीकृत दिखाते हैं। यह दृश्य शास्त्र के भीतर “दबाव के समय विश्वास की सच्ची दिशा” के विषय को उजागर करता है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
पूर्ववर्ती चर्चीय दृष्टिकोण (संक्षेप)
इस पाठ पर प्रसिद्ध पादरियों के संकलनों से मिलते-जुलते मूल्य संकेत मिलते हैं: जॉन मेहरी (Matthew Henry) और एडम क्लार्क तथा अॅल्बर्ट बार्न्स के कुछ चर्चित टिप्पणी-उद्धरण संक्षेप में नीचे दे सकते हैं, ताकि पाठक को पारम्परिक समझ मिले—परन्तु इन्हें संपूर्ण उद्धरण रूप में नहीं दोहराया गया है।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण (संक्षेप):
- "निष्ठा की परीक्षा में परमेश्वर के विरुद्ध न जाना चाहिए; विपरीत स्थिति में भी ईश्वर के साथ आस्था बनाए रखना चाहिए।" (Matthew Henry, paraphrased)
- "जो लोग दबाव में भी विश्वसनीय निवास बनाते हैं, उन्हें उद्धार और विश्वास की गहराई मिलती है।" (Albert Barnes, paraphrased)
- "बुरे समय में सद्गुण का प्रदर्शन ही सच्ची भक्ति है, और यही पथ प Mys. (Adam Clarke, paraphrased)
ध्यान दें: ऊपर के उद्धरण संक्षेप अर्थ बुझाने के लिए लिए गए हैं; पूर्ण पाठ उनके मौलिक स्पष्टीकरणों के अनुरूप नहीं हैं।