Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 8:1 दानिय्येल 8:2 दानिय्येल 8:3 दानिय्येल 8:4 दानिय्येल 8:5 दानिय्येल 8:6 दानिय्येल 8:7 दानिय्येल 8:8 दानिय्येल 8:9 दानिय्येल 8:10 दानिय्येल 8:11 दानिय्येल 8:12 दानिय्येल 8:13 दानिय्येल 8:14 दानिय्येल 8:15 दानिय्येल 8:16 दानिय्येल 8:17 दानिय्येल 8:18 दानिय्येल 8:19 दानिय्येल 8:20 दानिय्येल 8:21 दानिय्येल 8:22 दानिय्येल 8:23 दानिय्येल 8:24 दानिय्येल 8:25 दानिय्येल 8:26 दानिय्येल 8:27



मुख्य व्याख्या बिंदु
दानिय्येल 8:27 में दानिय्येल की दृष्टि से हास्यास्पद भले ही अस्थिर स्थिति आती है—उसका बल गया, वह बीमार पड़ गया—पर अंततः उसने राजा के कार्य फिर से आरंभ कर दिए। इस verse में मानसिक और आत्मिक उत्तेजना के बीच स्वास्थ्य-लाभ और दृष्टि के प्रभाव का मिलाजुला चित्र मिलता है; यह दर्शाता है कि महान योजनाओं और ख找ों के बीच भी मानवीय कमजोरी संभव है, पर दिव्य वक्तव्य का पाठक पर प्रभाव बना रहता है।
भाषिक-साहित्यिक पृष्ठभूमि
8Chapter में, दमयन्त प्रभावशाली दृश्य दिखते हैं—तीव्र सिन्धु-घटना और पश्चात् मनुष्य की दशा में परिवर्तन। यदि हम देखें, तो दानिय्येल एक गहराई से देखने वाला भविष्यदृष्टा है, और उसके लिये यह दृश्य एक चेतावनी भी है कि परमेश्वर के रुझानों को समझना गहराई चाहिए। 8:27 में कमजोरी सच है, फिर भी कार्य-चाल (राजा का काम-काज) जारी रहा, यह दर्शाता है कि भ्रम या आशंका के बीच भी विश्वसनीय सेवा और जिम्मेदारी जारी रह सकती है।
चर्चित पवित्र ग्रंथों से सजग सम्बन्ध
आध्यात्मिक महत्व
यह verse हमें यह सिखाता है कि स्वर्गीय परियोजनाएं कभी-भी मानव अनुभव से पूरी तरह बची नहीं रहतीं—हमें स्वास्थ्य-जीवन के अनुभव होते हैं, पर परमेश्वर के उद्देश्य का विरोध नहीं हो पाता। दानिय्येल का उठना और कार्य फिर शुरू करना यह दिखाता है कि आस्था और कर्तव्य की डोर कभी टूटती नहीं; संकट के बीच भी दर्शन और सेवाकार्य न रुके।
पारिवारिक-आख्यान-सेतु
1) दानिय्येल में भय और दूरी दिखती है, फिर धैर्य से पुनः स्थिति संभाली जाती है; 2) यह चरित्र परस्पर निर्भरता और विश्वास-के भीतर स्थिति को संभालने के धर्मिक उदाहरण देता है; 3) विपत्ति के समय में भी सेवक-धर्म निभाने की प्रेरणा देता है।
– विचारणीय प्रश्न
कठिन परिशिष्ट निष्कर्ष
दानिय्येल 8:27 में एक सूक्ष्म, वास्तविक अनुभव सामने आता है—हमारे जीवन में उजाले के बीच अंधेरा भी आता है। परन्तु परमेश्वर के निर्देश और मार्गदर्शक दृष्टि के साथ, भक्त अपने कर्तव्य को नहीं छोड़ते; क्योंकि अंततः दिव्य राज-कार्य आगे बढ़ता है और हमारी कमजोरी भी उसकी महिमा के अवसर बन जाती है।
Cross-references (संक्षिप्त उल्लेख)
याकूब 1:2–4 से धैर्य विकसित होने की बात; 2 कुरिन्थियों 4:8–9 से विपत्ति में भी शांति की आशा; दानिय्येल 7:14 से शासन सत्ताओं के ऊपर परमेश्वर की स्थायित्वता।
उद्धरणीय समर्थन सामग्री
यदि उपलब्ध हों, निम्न अनुभाग केवल संकेतक के रूप में: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के समानार्थ उद्धरण—उचित संदर्भ में