Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
व्यवस्थाविवरण 1 व्यवस्थाविवरण 2 व्यवस्थाविवरण 3 व्यवस्थाविवरण 4 व्यवस्थाविवरण 5 व्यवस्थाविवरण 6 व्यवस्थाविवरण 7 व्यवस्थाविवरण 8 व्यवस्थाविवरण 9 व्यवस्थाविवरण 10 व्यवस्थाविवरण 11 व्यवस्थाविवरण 12 व्यवस्थाविवरण 13 व्यवस्थाविवरण 14 व्यवस्थाविवरण 15 व्यवस्थाविवरण 16 व्यवस्थाविवरण 17 व्यवस्थाविवरण 18 व्यवस्थाविवरण 19 व्यवस्थाविवरण 20 व्यवस्थाविवरण 21 व्यवस्थाविवरण 22 व्यवस्थाविवरण 23 व्यवस्थाविवरण 24 व्यवस्थाविवरण 25 व्यवस्थाविवरण 26 व्यवस्थाविवरण 27 व्यवस्थाविवरण 28 व्यवस्थाविवरण 29 व्यवस्थाविवरण 30 व्यवस्थाविवरण 31 व्यवस्थाविवरण 32 व्यवस्थाविवरण 33 व्यवस्थाविवरण 34Verse
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व्यवस्थाविवरण 24:20 का साधारण अर्थ
यह वचन बताता है कि जो कृषि कर्म होते हैं, उनमें दया और न्याय का संतुलन रखें। जब तुम अपने जैतून के वृक्ष से तने-झाड़ि निकालते हो, तब फलों को बर्बाद न करें ताकि जो संभवतः किसी निर्बल या निर्धन पर निर्भर हो, वह भी उसे लाभ उठा सके। यह दृष्टिकोण बताता है कि सामाजिक दायित्व और उदारता भी खेती के नियमों का भाग हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह ओबेद-उत्पत्ति नहीं, बल्कि व्यवस्थाविवरण का हिस्सा है जहाँ मिस्र-नागरिकों के लिए नियम बनते हैं ताकि सामाजिक सुरक्षा बनी रहे। प्रचलित कानूनों में श्रम–विक्रय और पट्टे-सम्बन्धी नियम शामिल हैं; इस Verse में खेती के कृषि-कार्य के साथ दयालुता का नैतिक दबाव दिया गया है।
व्याख्यात्मक निष्कर्ष
शब्द-सार और हल्के संकेत
इस अनुच्छेद से प्रेरित तीन प्रमुख विचार:
अन्य आयतों से सम्बन्ध
यहाँ कुछ संबंधित आयतें हैं जो इस सिद्धांत को और स्पष्ट करती हैं:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि समाज की संपत्ति और सुरक्षा के नियम एक दूसरे से गहराई से जुड़े हैं—केवल कानून नहीं, आचरण भी आवश्यक है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
जब तुम अपनी खेती से लाभ निकालते हो, तो एक अंश उन लोगों के लिए छोड़ दो जो निर्भर हैं—परदेशी, अनाथ और विधवा की सहायता से समाज अधिक स्थिर और दयालु बनता है।
चर्चित टिप्पणीकारों के संयुक्त विचार
मार्थर Henry, Barnes और Clarke के सार्वजनिक-डायरे में प्रस्तुत उद्धरणों से समरूपতা यह है कि अधिकारयुक्त संपत्ति में भी दयालुता और सामाजिक सुरक्षा का दायित्व निहित है।
अगर किसी उद्धरण की स्पष्ट शब्दावली उपलब्ध हो तो उसका संक्षिप्त उल्लेख नीचे दे रहे हैं:
“हर प्रकार की दया और न्याय साथ-साथ चलता है; उसके बिना धर्म अधूरा है।” (उद्धरण संकेत – Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के समान धारणा के अनुरूप)
कानूनी-नैतिक संतुलन की सीमा
न्याय के कानून के भीतर भी दया की जगह है; यह न केवल पालन-नियम है बल्कि समाज के हरेक सदस्य के प्रति उत्तरदायित्व का भाग है।