Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
व्यवस्थाविवरण 1 व्यवस्थाविवरण 2 व्यवस्थाविवरण 3 व्यवस्थाविवरण 4 व्यवस्थाविवरण 5 व्यवस्थाविवरण 6 व्यवस्थाविवरण 7 व्यवस्थाविवरण 8 व्यवस्थाविवरण 9 व्यवस्थाविवरण 10 व्यवस्थाविवरण 11 व्यवस्थाविवरण 12 व्यवस्थाविवरण 13 व्यवस्थाविवरण 14 व्यवस्थाविवरण 15 व्यवस्थाविवरण 16 व्यवस्थाविवरण 17 व्यवस्थाविवरण 18 व्यवस्थाविवरण 19 व्यवस्थाविवरण 20 व्यवस्थाविवरण 21 व्यवस्थाविवरण 22 व्यवस्थाविवरण 23 व्यवस्थाविवरण 24 व्यवस्थाविवरण 25 व्यवस्थाविवरण 26 व्यवस्थाविवरण 27 व्यवस्थाविवरण 28 व्यवस्थाविवरण 29 व्यवस्थाविवरण 30 व्यवस्थाविवरण 31 व्यवस्थाविवरण 32 व्यवस्थाविवरण 33 व्यवस्थाविवरण 34Verse
व्यवस्थाविवरण 33:1 व्यवस्थाविवरण 33:2 व्यवस्थाविवरण 33:3 व्यवस्थाविवरण 33:4 व्यवस्थाविवरण 33:5 व्यवस्थाविवरण 33:6 व्यवस्थाविवरण 33:7 व्यवस्थाविवरण 33:8 व्यवस्थाविवरण 33:9 व्यवस्थाविवरण 33:10 व्यवस्थाविवरण 33:11 व्यवस्थाविवरण 33:12 व्यवस्थाविवरण 33:13 व्यवस्थाविवरण 33:14 व्यवस्थाविवरण 33:15 व्यवस्थाविवरण 33:16 व्यवस्थाविवरण 33:17 व्यवस्थाविवरण 33:18 व्यवस्थाविवरण 33:19 व्यवस्थाविवरण 33:20 व्यवस्थाविवरण 33:21 व्यवस्थाविवरण 33:22 व्यवस्थाविवरण 33:23 व्यवस्थाविवरण 33:24 व्यवस्थाविवरण 33:25 व्यवस्थाविवरण 33:26 व्यवस्थाविवरण 33:27 व्यवस्थाविवरण 33:28 व्यवस्थाविवरण 33:29



व्यवस्थाविवरण 33:25 के संदर्भ में प्रवेश
यह पद वासना, सुरक्षा और स्वरूपण के साथ परमेश्वर की देखरेख की अनुभूति कराता है। मूस के वंशजों के मार्ग-निर्देश के समय यह वचन यह संकेत देता है कि परमेश्वर अपनी प्रजा के हर दिन के लिए आवश्यक शक्ति और सुरक्षा प्रदान करते हैं। जहां एकल-इतिहास के पन्नों में कठिनाइयों का सामना होता है, वहीं ईश्वर की सहायता आकर उनके चलने को पूर्णता दे देती है।
पद का मुख्यार्थ: परमेश्वर की सहायता और दिन के अनुसार शक्ति
पद कहता है: तुम्हारे जूते लोहे और पीतल के होंगे, और जैसे तेरे दिन वैसी ही तेरी शक्ति हो। यह दोहरे अर्थ में है: पहला, संख्या और संसाधन के संदर्भ में—परमेश्वर अपने लोगों को आवश्यक सुरक्षा देता है, ताकि वे निर्भय होकर आगे बढ़ सकें। दूसरा, ऊर्जा-शक्ति के वैविध्य का संकेत है—यही शक्ति उनके दिन के अनुसार परिमित और पर्याप्त रहती है।
प्रमुख शब्दार्थ और चित्र
संधि-और संदर्भ: अन्य भागों से सम्बद्ध विचार
– उत्पत्ति 28:15 में ईश्वर अपने वचन की पूर्ति के लिए साथ होने का आश्वासन देते हैं—“जहाँ तुम जाते हो, मैं तुम्हारे साथ रहूँगा।” यह विचार यहाँ दिखाए गए सुरक्षा-शक्ति के प्राकृतिक विस्तार की तरह है।
– यूहन्ना 14:16-17 में यीशु पवित्र आत्मा के रूप में साथ रहने का वादा करते हैं, जो दैनिक जीवन की कठिनाइयों में प्रेरणा और सुरक्षा देता है।
– भजन 18:32-33 में कहा गया है कि परमेश्वर शक्ति का स्रोत हैं और उनके द्वारा ही पथ दृढ़ होते हैं—यह पद के “तेरे दिन के अनुसार शक्ति” के समान भावना बनती है।
महत्वपूर्ण शब्दों की संक्षिप्त व्याख्या
मूर्त-समझ: यह वचन न केवल भौतिक सुरक्षा का संकेत देता है, बल्कि ईश्वर के साथ रिश्ते की दृढ़ता को दर्शाता है। यह बताता है कि कठिन समय में भी उनका मार्गदर्शक वही है जो समय-समय पर आवश्यक संसाधन और ऊर्जा प्रदान करते हैं।
2–3Cross-references और उनका संक्षेप स्पष्टीकरण
1) उत्पत्ति 28:15 — ईश्वर का साथ हर परिस्थिति में अविराम रहने का आश्वासन; यह पंक्ति इस वचन के साथ एक स्थिर सुरक्षा के चित्र को बनाती है।
2) भजन 18:32 — परमेश्वर की ऊर्जा और मार्गदर्शन, जो पग-पग पर शक्ति देती है; यह स्पष्ट करता है कि शक्ति जीवन के हर दिन की आवश्यकता के अनुसार मिलती है।
3) यूहन्ना 14:16-17 — यीशु के साथ आत्मा का अवतरण, दैनिक जीवन में सहायता और सत्य की स्मृति; यह दर्शाता है कि किस प्रकार आस्तित्व की अनुभूति नई और टिकाऊ बनती है।
आज के पाठ के लिए अनुप्रयोग
– आप जिस मार्ग पर चलें, परमेश्वर आपके साथ है और हर दिन की जरूरत के अनुसार शक्ति देगा—यही सीख इसे व्यवहार में लाती है।
– कठिनाइयों के समय में भी शांत रहें; ईश्वर आपके लिए एक सुरक्षित मार्ग और स्थिर ग्रहणशीलता बनाते हैं।
कथा-सार
यात्रा-समय के कठिन रास्तों पर ईश्वर अपनी प्रजा के लिए आवश्यक सुरक्षा-शक्ति सुनिश्चित करते हैं; ऐसे समय में ही विश्वास की ठहराव और आशीर्वाद समझ में आता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke) प्रकाशित करने योग्य: नीचे संक्षेप उद्धरण हैं; साइट के लिए आवश्यक होने पर इन्हें छोटा किया गया है:
Matthew Henry: “God will provide strength according to the day.”
Albert Barnes: “The provision here is not an excess, but what is sufficient for each day’s journey.”
Adam Clarke: “The phrase denotes that God’s care is proportioned to each day’s trials.”