Old Testament
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सभोपदेशक 1:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैंने अपना मन लगाया कि जो कुछ आकाश के नीचे किया जाता है, उसका भेद बुद्धि से सोच सोचकर मालूम करूँ*; यह बड़े दुःख का काम है जो परमेश्वर ने मनुष्यों के लिये ठहराया है कि वे उसमें लगें।
सभोपदेशक 1:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सभोपदेशक 1:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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सभोपदेशक 3:10 (HINIRV) »
मैंने उस दुःख भरे काम को देखा है जो परमेश्वर ने मनुष्यों के लिये ठहराया है कि वे उसमें लगे रहें।

उत्पत्ति 3:19 (HINIRV) »
और अपने माथे के पसीने की रोटी खाया करेगा, और अन्त में मिट्टी में मिल जाएगा; क्योंकि तू उसी में से निकाला गया है, तू मिट्टी तो है और मिट्टी ही में फिर मिल जाएगा।”

सभोपदेशक 1:17 (HINIRV) »
और मैंने अपना मन लगाया कि बुद्धि का भेद लूँ और बावलेपन और मूर्खता* को भी जान लूँ। मुझे जान पड़ा कि यह भी वायु को पकड़ना है।
मतलब का संक्षेप
सभोपदेशक 1:13 में लेखक ने मन तपा कर एक संगत निष्कर्ष दिया है: जिन चीजों को आकाश के नीचे किया जाता है, वे गूढ़ हैं और उन्हें समझना कठिन है; परमेश्वर ने मानव क्रम के लिए यह भेद कुछ-कुछ कठिन और दुःखद ठहराया है ताकि मनुष्य निरंतर खोज और प्रयास में रहें। यह वाक्य कहता है कि बुद्धि से निरीक्षण और विवेचना आवश्यक है, परन्तु यह भी स्पष्ट करता है कि तथ्य-आधारित समझ अंततः ईश्वर के उद्देश्य और समय को समझने के लिए है, जिसे पूर्णतः मानवीय शक्ति से नहीं समझा जा सकता।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
सभोपदेशक की पुस्तक आत्म-समझ, जीवन के अर्थ और व्यवहारिक अनुभवों की प्रकृति पर केंद्रित है। यहाँ लेखक दुनिया के लम्बे अनुभवों से सीख लेने की कोशिश कर रहा है: जिसमें प्रकृति की अंतहीन गतिविधियाँ और मानव प्रयासों की सीमा दोनों शामिल हैं। यह पद उन कठिनाईयों को रेखांकित करता है, जिनसे भीषण थकान और निराशा उत्पन्न हो सकती है, यदि हम भुण्ड-भण्डारण ज्ञान से आगे नहीं बढ़ पाते।
व्याख्यात्मक अवलोकन
1 पंक्तिीय संदर्भ (cross-references) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
सार और व्यावहारिक takeaway
हमारी खोज-यात्रा में बुद्धि एक पथदर्शक है, परन्तु यह पथ केवल ईश्वरीय योजना के प्रकाश के साथ ही चल सकता है। जिन चीजों को लोग “आकाश के नीचे” देखते हैं वे समझने में कठिन हैं; परंतु परमेश्वर के साथ जुड़कर और उसके समय-सार को मानकर, हमें धैर्य बनाए रखना चाहिए और सच्चे विवेक से कर्म करना चाहिए।
सम्बन्धित विचार
1) यह अनुभूति हमारे मन में संदेह के विरुद्ध एक संतुलन बनाती है — न तो ज्ञान-उन्माद, न ही अंध भरोसा।
2) जीवन की अस्थिरता के बीच, परिशोधन की आवश्यकता बनी रहती है—जो कुछ भी समझ आता है, उसे नम्रता से ईश्वर के प्रकाश में जाँचना चाहिए।
क अंतर्निहित उद्धरण (जहाँ उपलब्ध) और नोट
क्लेरिकल, अटल, और शास्त्रीय टीका-लेखक जो सामान्य-जन के लिए उपलब्ध हैं, उनके कार्यों में इस प्रकार की विवेचना में भिन्न-भिन्न शब्दांकन मिलते हैं, पर उनके तत्त्व एक ही धुरी पर टिकते हैं: ज्ञान, धर्म और जीवन के प्रयोजन की खोज। (कृपया ध्यान दें कि इस पंक्ति में सीधे पूर्ण पाठ उद्धरण नहीं दिया गया है, बल्कि विचार-स्वरूप सार प्रस्तुत है)
याद रखने योग्य विषय-विक्रय: यह Verse प्रायः जीवन के उद्देश्य और सीमाओं के बारे में चिंतन कराता है; यह नीतिगत या मत-मतान्तर नहीं बनाता, बल्कि विवेक और परमेश्वर-भय के साथ जीवन को देखने का आग्रह करता है।