Old Testament
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सभोपदेशक 6:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और न सूर्य को देखा, न किसी चीज को जानने पाया; तो भी इसको उस मनुष्य से अधिक चैन मिला।
सभोपदेशक 6:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सभोपदेशक 6:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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अय्यूब 3:10 (HINIRV) »
क्योंकि उसने मेरी माता की कोख को बन्द न किया और कष्ट को मेरी दृष्टि से न छिपाया।


सभोपदेशक 6:5 पर टिप्पणी
पर्वणियाँ में सभोपदेशक के सन्देश में यह वाक्य दर्शाता है कि भौतिक उपलब्धियाँ नहीं मानवीय शान्ति की असली धुरी बनतीं। आगे-पीछे भरण-पोषण व सुख-सुविधाओं की आकािक्षा के बीच, कभी-कभी मनुष्य निर्जीव वस्तुओं और सूर्य-ज्योत्स्नाओं से भी अधिक शांत होता है, क्योंकि उसकी अंतरात्मा को शान्ति का अनुभव होता है। यह दृष्टि संसारिक प्रबलताओं के महत्त्व को चुनौती देती है और ईश्वर की योजना के प्रति एक गहरी तसल़ी का संकेत देती है।
मुख्य अर्थ
इस पद में कहते हैं कि व्यक्ति ने सूर्य नहीं देखा और कुछ वस्तुएँ नहीं जानीं—यह एक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है जो दिखाती है कि कुछ लोग बाहरी चकाचौंध और ज्ञान के अभाव के बावजूद अद्भुत संतोष पा लेते हैं। वे संसार के कई सुखों से वंचित रहते हुए भी आंतरिक चैन को अनुभव कर लेते हैं। यह शांति अनुभव तब होती है जब व्यक्ति अपनी स्थिरता और सुरक्षा को परमेश्वर की योजना में पाता है, न कि केवल बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर रहते।
2–3 प्रमुख विषय
संबद्ध आयाएँ
प्रत्येक संदर्भ में वही ध्वनि है जो जीवन के सत्य को उजागर करती है:
व्यावहारिक विचार
क्योंकि जीवन में बहुत बार अज्ञान और कमी के बावजूद भी मन शांत रहता है, हमें अपनी परिस्थितियों में आशा के स्रोत खोजने चाहिए—खासकर ईश्वर की देहली में। यदि हम अपनी पसंदीदा दृष्टियों के बजाय परमेश्वर की योजना को प्राथमिकता दें, तो भीतर की शांति स्थिर रहती है।
संक्षिप्त समापन
यह वाक्य संसार की नज़ाकत के बावजूद मन की शांति की सच्ची जड़ को उजागर करता है—ईश्वर के साथ संबंध और उसकी योजना में विश्वास, बाहरी ज्ञान या सूर्य की रोशनी से भी अधिक स्थिर है।
Cross-reference (संक्षेप परिचय)
1) नीतिवचन 3:5–6: परमेश्वर पर भरोसा रखना और अपने समझदारी पर निर्भर न होना—यही आंतरिक शांति का मार्ग है।
2) सभोपदेशक 2:26: जिन्हें परमेश्वर ने कृपा दी है, वे वास्तविक संतोष पाते हैं; जो नहीं, वे उसे नहीं पाते।
3) यशायाह 26:3: निरंतर स्थिर मन को दृढ़ शांति मिले, क्योंकि वह तुम्हारे विचारों पर स्थिर रहता है।
मुख्य उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke) — केवल जहाँ उपलब्ध हों:
• Adam Clarke: "Even if he had seen nothing of the sun... yet he has more quietness than the man who does; his inward peace is greater than outward appearances." (संक्षेप सार)