Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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सभोपदेशक 7:21 का पाठ और उसका तत्काल संदर्भ
यह पद सभोपदेशक के ज्ञान-वाक्य से उठता है कि बहुत-सी बातों पर ध्यान देकर हम बेचैन हो जाते हैं और कभी-कभी अपने दु:खों को बढ़ाते हैं। परमात्मा के प्रेरित साहित्य में यह स्पष्ट संकेत है कि मनुष्य को सीमा में रहकर विवेक से चलना चाहिए, क्योंकि अधिक सूचनाओं और तर्कों के बीचiguarding होने से गलत निष्कर्ष निकल सकते हैं।
पाठ से परमेश्वर की शिक्षा
यह वाक्य बताता है कि इस जीवन में हर छोटी-बड़ी बातों को लेकर बगैर विचारे सावधान रहने की जरूरत है; लेकिन साथ ही यह चेतावनी देता है कि कुछ शब्द और तर्क अकेले में सुख-चैन नष्ट कर सकते हैं। परमेश्वर चाहता है कि हम विवेक, नम्रता और संतुलन अपनाएं, ताकि दया, प्रेम और सत्य के बीच संतुलित अस्त्र रखें।
महत्वपूर्ण शब्दावलियाँ और चित्र
Related Cross-References (संक्षिप्त समझ के साथ)
1) नीतिवचन 17:27—धीमी और सोच-विचारकर बोलना बुद्धिमानी है; बिना कारण उन्मत्त statements से बचना चाहिए।
2) जागह 3:7—समय और अवसर के अनुसार बात करना, अनावश्यक बहस से बचना चाहिए।
3) रोगतश्वर 4:23—मन को संचालित करने वाले विचारों की निगरानी, क्योंकि यह शांति और विवेक बनाते या बिगाड़ते हैं।
पद का मूल संदेश और आज का अनुप्रयोग
आज के जीवन में हम सूचना-भरपूर सामाजिक जगत में रहते हैं। इस वचन से यह सीख मिलती है कि अनावश्यक शब्दों और आलोचनात्मक तर्कों से दूसरों को श्राप देने की स्थिति बन सकती है—यह उद्धार नहीं, बल्कि अनेक बार गलतफहमी और टकराव को बढ़ाता है। अतः आवश्यक है कि हम: - तेजी से मत भिन्न हों, पर सत्य को यहाँ-वहाँ से जोड़े बिना शांत रहें। - दूसरों के दायरे में प्रवेश करने से पहले प्रतिक्रिया सोचें। - अपने शब्दों की जिम्मेदारी स्वीकार करें और विनम्रता बनाए रखें। - विशुद्ध विवेक के साथ दूसरे के दृष्टिकोण को समझने की कोशिश करें, ताकि आत्मिक शांति बनी रहे।
समापन समेकन
इस पाठ में प्रभु के अनुग्रह के साथ संतुलन का संदेश है: किसी की निंदा करने से पहले अपने आप को परखेँ, और शब्दों को वहन करने योग्य बनाएं। ईमानदार बातचीत और प्रेमपूर्ण विवेक से ही समाज में शांति और सच्चाई बनी रहती है।
मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बर्न्स, एडम क्लार्क से विचार (संक्षेप)
मैथमेटिक रूप से उद्धृत रूप से, हेनरी-एलबर्ट-एड्म के वे दो-तीन प्रभावशाली विचारों का सार यह है कि हर बहस में कटु-शब्दों से बचना चाहिए और बोलने का उद्देश्य सम्मान और सहायता होना चाहिए; ऊँचे विचारों के साथ नम्रता आवश्यक है।