सभोपदेशक 7:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

सुख के दिन सुख मान, और दुःख के दिन सोच; क्योंकि परमेश्‍वर ने दोनों को एक ही संग रखा है, जिससे मनुष्य अपने बाद होनेवाली किसी बात को न समझ सके।

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सभोपदेशक 7:14 पद-दर-पद बाइबल टीका

सभोपदेशक 7:14 (HINIRV) — सुख और दुःख का संग-साथ

परिप्रेक्ष्य में यह verse युग-युग से मनुष्यों के अनुभव को छूता है: जीवन के सुखद दिनों में भी कभी-कभी अवसाद और मुस्कान के पीछे की वास्तविकताओं को समझना कठिन होता है, और विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर की व्यवस्था का गहरा कारण खोजना पड़ता है। वेदोक्त विचार यहाँ यह कहता है कि परमेश्वर ने दोनों चरणों को साथ रखा है ताकि मनुष्य भविष्य की बातों को अस्पष्ट रहते हुए भी जी सके और आत्म-समझ का अभ्यास कर सके।

मुख्य सार और अर्थ

कहावत का केंद्रीय संदेश है: जीवन में सुख-समय और दुख-समय दोनों एक साथ रहते हैं, ताकि हमें अंततः यह न समझ में आए कि आने वाले दिनों में क्या होगा। परमेश्वर ने स्थिति-परिस्थितियाँ इस प्रकार बनाईं ताकि मनुष्य अपनी सीमाओं को समझे और भरोसे में रहें। यह न केवल परिस्थितियों की विविधता को स्वीकारने का विषय है, बल्कि परमेश्वर के नियंत्रण और न्याय-पूर्ण योजना पर अचूक विश्वास का आह्वान भी है।

तीन प्रमुख विषय

  • जीवन की अस्थिर संरचना: सुख और दुःख एक साथ चलना—यह एक वास्तविकता है जिसे स्वीकारना चाहिए, ताकि भागदौड़ में भी हृदय शान्त रहे।
  • ईश्वर की योजना की गहराई: अच्छाई-बुराई के बावजूद परमेश्वर का विधान स्थिर रहता है; परिस्थिति में परिवर्तन उसकी योजना का मानक नहीं है।
  • धैर्य और आत्म-निरीक्षण: सुख के दिनों में भी विनम्रता और दुःख के दिनों में भी आस्था विकसित करना आवश्यक है; इससे भविष्य की बातों पर मन निष्क्रिय नहीं रहता।

संदर्भित वचनों से सम्बन्ध

यह पंक्ति अन्य नीतिपरक शिक्षाओं से संगति बनाती है, जैसे कि एकांत-आह्वान में धैर्य और विवेक की महत्ता बताने वाले विचार। साथ ही, कुशलता से जीवन के विविध-परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखने के लिए परमेश्वर के चुनावित उद्देश्य पर भरोसा रखने की प्रेरणा देता है।

संलग्न क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त):

  • नीतिवचन 3:5–6 — भरोसे के साथ प्रभु पर निर्भर रहने की शिक्षा; सभी मार्गों को उसी के अनुसार चलाने का निर्देश।
  • रोमियों 8:28 — परमेश्वर की योजना सभी चीजों के लिए सामंजस्य बनाती है; जो प्रेम करते हैं, उन के लिए प्रयोजन है।
  • यहोशू 1:9 — साहस और धैर्य के साथ, भय के बिना कदम उठाने की प्रेरणा।

इन संदर्भों के योग से स्पष्ट है कि दुख-समय और सुख-समय मिलकर जीवन-धारणा को गहराते हैं और परमेश्वर की सार्वभौमिक योजना को ग्रहण करने की आवश्यकता है।

व्यावहारिक चिंतन

आज के दिन आप अपने दैनिक अनुभवों में देखें: क्या आप सुख के क्षणों में भी परमेश्वर की दिशा पर विचार कर रहे हैं? और दुःख की घड़ियों में, क्या आप धैर्य बनाकर उसे एक पवित्र परीक्षण के रूप में स्वीकारते हैं? इस वचन का उद्देश्य है कि हम अपनी क्षणिक खुशी-या दर्द से ऊपर उठकर ईश्वर के स्थिर शासन पर नजर बनाए रखें, ताकि भविष्य की बातों पर अधिक सहज और विश्वासपूर्ण प्रतिक्रिया दे सकें।

संक्षेप

सभोपदेशक 7:14 यह बताता है कि सुख और दुःख दोनों ही एक साथ रहते हैं ताकि मनुष्य के भीतर ईश्वर-आस्था और विवेक विकसित हो सके। जीवन की अनिश्चितताओं के बीच, परमेश्वर की योजना पर अडिग विश्वास और धैर्य-सीढ़ी बनाए रखना ही सही उत्तर है।

परिचायक उद्धरण (संदर्भित सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों में से एकाधिक जगह मिली):

मैथ्यू हेनरी, Albert Barnes, Adam Clarke के सामान्य, सार्वजनिक-डोमेन विचारों से प्रेरित निष्कर्ष एकीकृत रूप में प्रस्तुत हैं। यदि किसी पंक्ति में उनके ठोस शब्द सीधे उद्धृत किए गए हों, तो नीचे उल्लेख किया गया है:

“Sorrow is a discipline for the soul, and joy is no licence to forget God.”

Note: उपरोक्त वाक्य उनके कार्यों के हल्के सार का प्रतिनिधित्व है और वास्तविक टेक्स्ट की पूर्ण उद्धरणावृत्ति के लिए मूल ग्रंथों के पाठ देखें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

सभोपदेशक 7:14 समानांतर पद और संबंधित वचन

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