Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
सभोपदेशक 3:1 सभोपदेशक 3:2 सभोपदेशक 3:3 सभोपदेशक 3:4 सभोपदेशक 3:5 सभोपदेशक 3:6 सभोपदेशक 3:7 सभोपदेशक 3:8 सभोपदेशक 3:9 सभोपदेशक 3:10 सभोपदेशक 3:11 सभोपदेशक 3:12 सभोपदेशक 3:13 सभोपदेशक 3:14 सभोपदेशक 3:15 सभोपदेशक 3:16 सभोपदेशक 3:17 सभोपदेशक 3:18 सभोपदेशक 3:19 सभोपदेशक 3:20 सभोपदेशक 3:21 सभोपदेशक 3:22



सुलझे हुए समयों में जीवन के विविध रंग
सभोपदेशक 3:4 में कहा गया वचन हमें जीवन की बहुउत्पाती प्रकृति से परिचित कराता है. समय के साथ परिस्थितियाँ बदलती हैं—रोना भी और हँसना भी, पीड़ा भी और आनंद भी. कवि ने उन सभी विपरीत घटनाओं के बीच एक स्थिरता की बात नहीं की, बल्कि समय-समय पर होने वाले बदलावों को स्वीकारने की शिक्षा दी है. यह विषय अतीत के अनुभवों, वर्तमान के अनुभवों, और भविष्य की आशाओं – तीनों को संतुलित रखने में सहायक है.
मुख्य अर्थ
परिवर्तन संसार का नियम है; उसी प्रकार हर अनुभव का एक समय तय है. रोना और हँसना, क्रोध और शांति, शोशा-उत्साह और चुप्पी—ये सब एक जीवनचर्या के हिस्स हैं. इसका उद्देश्य हमें यह याद दिलाना है कि खुशियों का समय उतना ही वास्तविक है जितना दुखों का समय, और दोनों को ईमानदारी से स्वीकारना चाहिए. जीवन के उतार-चढ़ाव में ईश्वर के नियंत्रण और वाणी-आचरण की स्थिरता बसे रहनी चाहिए.
दो मुख्य विषय
संबद्ध अंश
यह विचार अतीत की धार्मिक लेखनों में भी आता है—कहावतें बताती हैं कि जीवन में धारणाओं का क्रम स्थिर नहीं रहता. नीचे दिए गए क्रॉस-रेफरेंसेस आपके ध्यान को व्यापक बनाते हैं:
व्यावहारिक विचार
1) कठिन समय में रोना का हिंडोला स्वीकारें, पर तुरंत ईश्वर की कृपा की आशा रखें. 2) खुशियों के क्षण में भी दया, करुणा और संयम बनाए रखें ताकि आनंद सीमाओं में न बँध जाए. 3) अपने जीवन के प्रत्येक समय के लिए एक प्रार्थना-आचार बनाएं—“ईश्वर, इस क्षण में मेरी जरूरतें और मेरी प्रतिक्रिया दोनों तेरे हाथों में हैं.”
संक्षिप्त समापन
3:4 हमें याद दिलाता है कि जीवन समय-समय पर बहु-पक्षीय अनुभवों से भरा है, और हर क्षण में ईश्वर की उपस्थिति और परामर्श आवश्यक है. अपनाने योग्य पाठ यह है कि हम भिन्न-भिन्न समयों को पूर्ववत् स्वीकारें, अपनी भावनाओं को नियंत्रित करें, और हर स्थिति में ईश्वर की योजना पर विश्वास रखें.
छोटा उद्धरण संदर्भ (चिह्नित मानक टिप्पणियाँ)
यदि आप क्लासिक टिप्पणीकारों के विचार देखें, तो Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke ने इस प्रकार के परिवर्तनशील समय के बारे में विस्तार से लिखा है: वे कहते हैं कि मानव जीवन के विविध क्षण परमेश्वर के प्रबोधन के भाग हैं और मेंटेनेंस ऑफ़ पवित्र आस्था के लिए आवश्यक हैं. नीचे पंच-वाक्य उनके विचारों के मुख्य बिंदु से सम्बद्ध हैं:
नीचे के अंश आवश्यक उद्धरण नहीं हैं, परन्तु संबंधित विचार उनके साहित्य में प्रकट होते हैं: