सभोपदेशक 3:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

रोने का समय, और हँसने का भी समय; छाती पीटने का समय, और नाचने का भी समय है;

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सभोपदेशक 3:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

सुलझे हुए समयों में जीवन के विविध रंग

सभोपदेशक 3:4 में कहा गया वचन हमें जीवन की बहुउत्पाती प्रकृति से परिचित कराता है. समय के साथ परिस्थितियाँ बदलती हैं—रोना भी और हँसना भी, पीड़ा भी और आनंद भी. कवि ने उन सभी विपरीत घटनाओं के बीच एक स्थिरता की बात नहीं की, बल्कि समय-समय पर होने वाले बदलावों को स्वीकारने की शिक्षा दी है. यह विषय अतीत के अनुभवों, वर्तमान के अनुभवों, और भविष्य की आशाओं – तीनों को संतुलित रखने में सहायक है.

मुख्य अर्थ

परिवर्तन संसार का नियम है; उसी प्रकार हर अनुभव का एक समय तय है. रोना और हँसना, क्रोध और शांति, शोशा-उत्साह और चुप्पी—ये सब एक जीवनचर्या के हिस्स हैं. इसका उद्देश्य हमें यह याद दिलाना है कि खुशियों का समय उतना ही वास्तविक है जितना दुखों का समय, और दोनों को ईमानदारी से स्वीकारना चाहिए. जीवन के उतार-चढ़ाव में ईश्वर के नियंत्रण और वाणी-आचरण की स्थिरता बसे रहनी चाहिए.

दो मुख्य विषय

  • कृत्यों का संतुलन: हर अनुभूति की अपनी जगह है; संतुलन वही है जो हमारी आत्मा को स्थिर बनाए रखे—आंसुओं में भी और हास्य में भी.
  • ईश्वर की योजना की स्वीकार्यता: समय के हर चरण में परमेश्वर की योजना चल रही है; हम अनेक घटनाओं के बीच उसकी प्रियादर्शिता को खोजते हैं.

संबद्ध अंश

यह विचार अतीत की धार्मिक लेखनों में भी आता है—कहावतें बताती हैं कि जीवन में धारणाओं का क्रम स्थिर नहीं रहता. नीचे दिए गए क्रॉस-रेफरेंसेस आपके ध्यान को व्यापक बनाते हैं:

  • उत्पत्ति 38:25—जीवन के विविध रंगों का संकेत: दुख और आनंद एक साथ आते हैं.
  • नहीं तो चिन्ना 3:1—समय के अनुसार क्रिया-प्रवृत्ति का धारा बदलती है.
  • फिलिप्पियों 4:12—हर स्थिति में संतोष की शिक्षा: अलग-अलग समयों में संतोष बनाए रखना चाहिए.

व्यावहारिक विचार

1) कठिन समय में रोना का हिंडोला स्वीकारें, पर तुरंत ईश्वर की कृपा की आशा रखें. 2) खुशियों के क्षण में भी दया, करुणा और संयम बनाए रखें ताकि आनंद सीमाओं में न बँध जाए. 3) अपने जीवन के प्रत्येक समय के लिए एक प्रार्थना-आचार बनाएं—“ईश्वर, इस क्षण में मेरी जरूरतें और मेरी प्रतिक्रिया दोनों तेरे हाथों में हैं.”

संक्षिप्त समापन

3:4 हमें याद दिलाता है कि जीवन समय-समय पर बहु-पक्षीय अनुभवों से भरा है, और हर क्षण में ईश्वर की उपस्थिति और परामर्श आवश्यक है. अपनाने योग्य पाठ यह है कि हम भिन्न-भिन्न समयों को पूर्ववत् स्वीकारें, अपनी भावनाओं को नियंत्रित करें, और हर स्थिति में ईश्वर की योजना पर विश्वास रखें.

छोटा उद्धरण संदर्भ (चिह्नित मानक टिप्पणियाँ)

यदि आप क्लासिक टिप्पणीकारों के विचार देखें, तो Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke ने इस प्रकार के परिवर्तनशील समय के बारे में विस्तार से लिखा है: वे कहते हैं कि मानव जीवन के विविध क्षण परमेश्वर के प्रबोधन के भाग हैं और मेंटेनेंस ऑफ़ पवित्र आस्था के लिए आवश्यक हैं. नीचे पंच-वाक्य उनके विचारों के मुख्य बिंदु से सम्बद्ध हैं:

नीचे के अंश आवश्यक उद्धरण नहीं हैं, परन्तु संबंधित विचार उनके साहित्य में प्रकट होते हैं:

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

सभोपदेशक 3:4 समानांतर पद और संबंधित वचन

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