Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीएस्तेर 7:7 बाइबल पद की व्याख्या
एस्तेर 7:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
राजा क्रोध से भरकर, दाखमधु पीने से उठकर, राजभवन की बारी में निकल गया; और हामान यह देखकर कि राजा ने मेरी हानि ठानी होगी, एस्तेर रानी से प्राणदान माँगने को खड़ा हुआ।
एस्तेर 7:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एस्तेर 7:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एस्तेर 1:12 (HINIRV) »
खोजों के द्वारा राजा की यह आज्ञा पाकर रानी वशती ने आने से इन्कार किया। इस पर राजा बड़े क्रोध से जलने लगा।

नीतिवचन 19:12 (HINIRV) »
राजा का क्रोध सिंह की गर्जन के समान है, परन्तु उसकी प्रसन्नता घास पर की ओस के तुल्य होती है।

प्रकाशितवाक्य 3:9 (HINIRV) »
देख, मैं शैतान के उन आराधनालय वालों* को तेरे वश में कर दूँगा जो यहूदी बन बैठे हैं, पर हैं नहीं, वरन् झूठ बोलते हैं—मैं ऐसा करूँगा, कि वे आकर तेरे चरणों में दण्डवत् करेंगे, और यह जान लेंगे, कि मैंने तुझ से प्रेम रखा है।
एस्तेर 7:7 – पथ्य क्रोध और शालीनता का सवाल
इस verse में राजा अjoch के आक्रोश के साथ एक निर्णायक मोड़ आता है: क्रोध ने उसे तुरंत निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया और दाखमधु के प्रभाव ने उसे और उकसाया. यह दृश्य एस्तेर और उसकी चतुराई के पीछे की कथा में नया तत्त्व जोड़ता है: सत्य और निष्ठा के पथ पर एक क्षणभर का संयमहीन क्रोध कितनी बड़ी चुनौतियाँ खड़ी कर सकता है। साथ ही, होमान की स्थिति साफ़ करती है कि छल-छद्म और महत्त्वाकांक्षा किस तरह नीति-निर्णय को विकृत कर देते हैं।
आयतन के भीतर verse का स्वर
यह पंक्ति एक राजा के क्रोध और शराब के प्रभाव के ऊपर प्रकाश डालती है—राजा ने सम्राटगृह की बारी में कदम रखा, और अपने क्रोध से प्रेरित होकर वह निर्णय लेने के लिए आगे बढ़ता है। होमान यह देख चौंक उठता है कि उसकी ही योजनाओं से उसके लिए खतरा आ सकता है। कथा का यह भाग अतीत की एक बड़ी चतुराई से जुड़ा है—एस्तेर की सुरक्षा और उसकी जातीय पहचान के बावजूद सही मार्ग पर पकड़ बनाए रखना।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
- क्रोध शासकियत में प्रवेश करे तो निर्णय पक्षपाती हो सकता है; शांतचित्त विचार और सत्यता की जगह जल्दबाजी लाभकारी नहीं रहती।
- व्यक्तिगत हितों के सामने नैतिक अधिकार और दया की मानवीय संवेदना बनी रहनी चाहिए।
अन्य बाइबल संदर्भ से समरूपता
1) नीतिवाक्य 16:32 — धैर्य और क्रोध में तुलना: धैर्य बड़ा राजा है; क्रोध से बढ़कर अधिपतियां नहीं।
2) मत्ती 5:39 — प्रतिशोध की जगह संयम की महिमा: बुरे के सामने भी उत्तम रास्ता अपनाने की शिक्षा।
3) यहोद 1:9 — सत्य के लिए ठहराव और मौन स्वभाव: सत्ता के दबाव से ऊपर सत्य की महत्ता।
व्यावहारिक आवेदन
संक्षेप
एस्तेर 7:7 में राजा का क्रोध और होमान की मायूस प्रतिक्रिया कथा में एक नैतिक धागा जोड़ते हैं: सत्ता के केंद्रीय दबाव के बीच भी सत्य के लिए मार्ग ढूंढ़ना चाहिए, और भावनात्मक निर्णयों के कारण असुरक्षित कदम से दूर रहना चाहिए। इस पाठ से प्रेरित होकर हम सीखते हैं कि कठिन समय में भी संयम, सत्य और निष्ठा ही सच्चे निर्णय की कुंजी है।
चर्च-नोट्स
आप पढ़कर देखें: यह verse एक ठहराव देता है—क्रोध-निर्णय बनाम विवेक-निर्णय. यदि आप चाहें, मैं इस पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संकलनों से 2-3 छोटे उद्धरण संक्षेप में दे दूँ।
Cross-references के संक्षेपार्थ: - नीतिवाक्य 16:32 — धैर्य को अधिक शक्तिशाली मानना. - मत्ती 5:39 — प्रतिशोध के बदले शांत प्रतिक्रिया. - यहोद 1:9 — सत्य की रक्षा के लिए ठहरना.