Old Testament
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एस्तेर 7:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अतः राजा और हामान एस्तेर रानी के भोज में आ गए।
एस्तेर 7:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एस्तेर 7:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एस्तेर 5:8 (HINIRV) »
कि यदि राजा मुझ पर प्रसन्न है और मेरा निवेदन सुनना और जो वरदान मैं माँगू वही देना राजा को स्वीकार हो, तो राजा और हामान कल उस भोज में आएँ जिसे मैं उनके लिये करूँगी, और कल मैं राजा के इस वचन के अनुसार करूँगी।”

एस्तेर 3:15 (HINIRV) »
यह आज्ञा शूशन गढ़ में दी गई, और डाकिए राजा की आज्ञा से तुरन्त निकल गए। राजा और हामान तो दाखमधु पीने बैठ गए; परन्तु शूशन नगर में घबराहट फैल गई*।
एस्तेर 7:1 का संदर्भ और अभिप्राय
इस पंक्ति में ध्यान दिया गया है कि राजा और हामान एस्तेर रानी के भोज में आ जाते हैं। कृत्य संदिग्ध भय और दबाव के समय के एक निर्णायक मोड़ को दर्शाता है। यह क्षण सभा-व्यवस्था के भीतर अश्वस्त वातावरण को उजागर करता है, जहां Ester के प्रयास और उद्गार अब प्रत्यक्ष कार्रवाई के करीब पहुँच रहे होते हैं। यह वही क्षण है जहाँ हवास और योजना के बीच सत्य की परख होती है और परमेश्वर की योजना के संदर्भ में पात्रों की प्रतिक्रिया निर्धारित होती है।
मुख्य अर्थ
यह वाक्य कथा की उन्नति में एक ऐतिहासिक और नीतिगत मोड़ दिखाता है: भोज का अवसर जिसमें महारानी Ester और न恶म के अधिकारी एकत्र हैं। भोज के माध्यम से Ester अपने अनुरोध के लिए उचित मंच बनाती है, जबकि राजा के साथ हामान की महत्त्वाकांक्षा और उसकी चालाकी की पहचान स्पष्ट होती है। यह दृश्य महान विरोध और मानवीय दुर्बलताओं के बीच ईश्वर की क्रिया की संभावना की ओर इशारा करता है।
तीन मुख्य विषय
पठन-संदर्भ और क्रॉस-रेफरेंसे
• एस्तेर 7:3–4: Ester का निवेदन अब स्पष्ट रूप से सामने आता है—हामान के दुष्कृत्यों का प्रतिकार और उसके विरुद्ध राष्ट्र की सुरक्षा की मांग।
• एस्तेर 6:6–7: राजा के दौरे और स्थिति की नाजुकता को दर्शाते हैं, जहाँ भ्रम और आपसी सुगबुगाहट बढ़ते हैं।
• दानिएल 5:23–27 का संदर्भ-आर्किटेक्चर: सत्ता के भीतर pride और कटुता का प्रकट होना और सत्य की परख कैसे संभव है।
व्यवहारिक विवेचन
जीवन में अवसर आने पर सत्यपूर्ण ध्येय को कैसे प्रस्तुत किया जाए, इसका शिक्षण Ester के भोज-स्थिति से मिलता है। एक नेक उद्देश्य के लिए उचित मंच और धीरज बनाए रखना आवश्यक है, ताकि दबाव के समय भी नैतिक दिशा न बदले। यह दृश्य दिखाता है कि राजसी आनंद और सार्वजनिक भोज भी न्याय-योजना के लिए एक मंच बन सकता है, जब हृदय में सत्य और धैर्य रहे।
संक्षिप्त समापन
एस्तेर 7:1 में भोज के समय की यह प्रवेशिका कथा-योजना की दिशा निर्धारित करने की ओर संकेत करती है। यह दर्शाता है कि कैसे परमेश्वर की योजना मानव मंच पर क्रियान्वित होती है, भले ही पात्र पहली दृष्टि में औचित्य और उद्देश्य से अंजान हों।