Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीएस्तेर 3:15 बाइबल पद की व्याख्या
एस्तेर 3:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यह आज्ञा शूशन गढ़ में दी गई, और डाकिए राजा की आज्ञा से तुरन्त निकल गए। राजा और हामान तो दाखमधु पीने बैठ गए; परन्तु शूशन नगर में घबराहट फैल गई*।
एस्तेर 3:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एस्तेर 3:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एस्तेर 8:15 (HINIRV) »
तब मोर्दकै नीले और श्वेत रंग के राजकीय वस्त्र पहने और सिर पर सोने का बड़ा मुकुट धरे हुए और सूक्ष्मसन और बैंगनी रंग का बागा पहने हुए, राजा के सम्मुख से निकला, और शूशन नगर के लोग आनन्द के मारे ललकार उठे।

एस्तेर 4:16 (HINIRV) »
“तू जाकर शूशन के सब यहूदियों को इकट्ठा कर, और तुम सब मिलकर मेरे निमित्त उपवास करो, तीन दिन-रात न तो कुछ खाओ, और न कुछ पीओ। और मैं भी अपनी सहेलियों सहित उसी रीति उपवास करूँगी*। और ऐसी ही दशा में मैं नियम के विरुद्ध राजा के पास भीतर जाऊँगी; और यदि नाश हो गई तो हो गई।”

नीतिवचन 1:16 (HINIRV) »
क्योंकि वे बुराई ही करने को दौड़ते हैं, और हत्या करने को फुर्ती करते हैं। (रोम. 3:15-17)
शास्त्रार्थ का सीधा अर्थ
एस्तेर 3:15 में उत्तरदायित्वपूर्ण आदेश के साथ- साथ शूशन के नगर में भय का फैलना दिखाया गया है: दुष्ट योजना के तुरंत बाद रानी और हामान राजसी भोजन-कौशल में मग्न थे, किन्तु नगर शूशन में घबराहट से कांप उठा। यह उद्धरण यह संकेत करता है कि शत्रु योजना के बाद भी परमेश्वर के नियम और क्षेत्रीय परिस्थितियाँ किसी-न-किसी प्रकार से प्रभावित होती हैं, और दुष्टों के योजनावाहक दृश्य एक क्षण में अस्थिर हो जाते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ एस्तेर कथा के मध्य की कठिनाई की स्थिति को दिखाता है—हामान की आतंकित योजना के निष्पन्न परिणाम। राजा का आदेश “यह आज्ञा शूशन गढ़ में दी गई” है, परन्तु वास्तविक प्रभाव शूशन नगर में फैलता है। यह घटना नीति-नियोजन के साथ-साथ राज्य-व्यवस्था, राजदरबार के आचरण और उत्साह-भय के बीच के तनाव को उजागर करती है।
अर्थ-गहराई और विचारशील टिप्पणियाँ
मुख्य विषय-सार (संक्षिप्त सूची)
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में और संदर्भ के कारण)
1) प्रेरित केंद्रों में उद्धृत अन्य विवरण: ऐसी परिस्थितियाँ जहाँ व्यक्ति-परायनों के निर्णय अचानक उलट जाते हैं—यह दर्शाता है कि परमेश्वर के नियंत्रण के भीतर ही स्थितियाँ चलती हैं।
2) समान प्रेरणाओं वाले पथ-चरित्र: ताकतवर के अभिमन्यू और संस्थाओं की सीमाओं के बीच परमेश्वर का मार्गदर्शन स्पष्ट होता है।
3) भय और आशा के वैविध्य: राजसी सत्ता और सामान्य जनता दोनों में भय-घबराहट के समय धार्मिक विश्वास की भूमिका स्पष्ट हो सकती है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम देखते हैं कि अस्थिरता के समय भी सत्यनिष्ठा और परमेश्वर के नियंत्रण की आशा बनाए रखना चाहिए। दुष्टों के योजनाओं के बावजूद, हमारे विश्वास को न डगमगने दें और समुदाय के बीच न्याय और सच को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित हों।
पूर्वजन-विश्लेषण (सार)
इस वाक्य का उद्देश्य यह दिखाना है कि शूशन नगर उस क्षण दुष्टों की योजना के प्रभाव में था, परन्तु परमेश्वर की योजना के भीतर ही सत्य उभर रहा था। यह पाठ प्रेरक है कि हम भय के बावजूद सत्य पर टिके रहें और परिस्थिति के अनुरूप निर्णय लें।
महत्वपूर्ण उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से एक-दो संक्षिप्त शब्द):
“यद्यपि संसार की शक्तियाँ शराब के आह्लाद में मग्न होती हैं, परमेश्वर की योजना सर्वोपरि रहती है।”
टीका-टिप्पणी का संकलन: यह पाठ तात्कालिक भय और राजसी लालच के बीच एक चेतावनी है कि प्रशासनिक निर्णय और सामाजिक गर्दिश के समय भी धार्मिक विवेक बनाए रखना आवश्यक है।