Old Testament
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एस्तेर 3:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब राजा के कर्मचारी जो राजभवन के फाटक में रहा करते थे, उन्होंने मोर्दकै से पूछा, “तू राजा की आज्ञा का क्यों उल्लंघन करता है?”
एस्तेर 3:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एस्तेर 3:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एस्तेर 3:2 (HINIRV) »
राजा के सब कर्मचारी जो राजभवन के फाटक में रहा करते थे, वे हामान के सामने झुककर दण्डवत् किया करते थे क्योंकि राजा ने उसके विषय ऐसी ही आज्ञा दी थी; परन्तु मोर्दकै न तो झुकता था और न उसको दण्डवत् करता था*।

निर्गमन 1:17 (HINIRV) »
परन्तु वे दाइयां परमेश्वर का भय मानती थीं, इसलिए मिस्र के राजा की आज्ञा न मानकर लड़कों को भी जीवित छोड़ देती थीं।

अपना पाठ: एस्तेर 3:3
तब राजा के कर्मचारी जो राजभवन के फाटक में रहा करते थे, उन्होंने मोर्दकै से पूछा, “तू राजा की आज्ञा का क्यों उल्लंघन करता है?”
कथन का अवरोध और पाठ का स्थान
यह दृश्य एस्तेर के समय की एक घोर राजनीतिक उद्भावना है, जहाँ मोर्दकै ने एक नागरिक नियम को नहीं माना, क्योंकि वह यह मानता था कि उसकी निष्ठा परमेश्वर के कानून के अनुरूप है। राजभवन के फाटक पर खड़े अधिकारी उसका सवाल उठाते हैं: क्यों Tul राजा की आज्ञा का उल्लंघन हो रहा है? यह प्रसंग बताता है कि ईमानदार परम-विश्वास व्यक्ति चाहकर भी सत्ता-चक्र के दबाव के बीच खड़ा रहता है, और उसका विवेक सामाजिक दबाव के विरुद्ध जाता है।
ईश्वरीय विश्वास से जुड़ी व्याख्या
- परमेश्वर का नाम सीधे यहाँ नहीं आता, पर यह घटना विश्वास-निष्ठा के परीक्षण को दर्शाती है। मोर्दकै का निर्णय एक ऐसी स्थिति का प्रतीक है जिसमें मानवीय निर्देश अधिकृत हों या नहीं—पर उसकी निष्ठा परमेश्वर के विधान पर टिकी है। यह वही प्रेरणा देती है जो डरों से परे पीछे हटकर “जो सत्य है, उसमें स्थिर रहो” के पक्ष में है।
प्रमुख शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
अन्य पाठ से सम्बन्ध (क्रॉस-रेफरेंसेस)
- धर्म और विवेक के संघर्ष पर यह पाठ दाऊद के समय या पर्तों के बीच विभेद का याद दिलाता है, जहाँ विश्वास के अनुसार नियमों को देखना पड़ता है।
- यहूदा-प्रेरणा वाले दृश्य उन परिस्थितियों की तुलना कराते हैं जहाँ लोग सामाजिक दबाव के सामने अपनी सच्चाई से समझौता नहीं करते।
- परमेश्वर के युवराजों की कथाओं में भी ऐसे अवसर मिलते हैं जहाँ ईमानदारी और विवेक के कारण विरोध झेलना पड़ता है।
प्रमुख टिप्पणीकारों के संवेदनशील शब्द (सार-संयोजन)
यहाँ मोर्दकै का साहस और विवेक सचेत करता है कि: - ईश्वर का भय मानवीय आदेश से ऊपर होता है, और विश्वास की राह पर कठिन विवेक कभी-कभी सामाजिक शौर्य demand करती है।
आज-के-युग में आवेदन
यह पाठ हमें सिखाता है कि: - सत्ता-प्रयोग चाहे कितना भी सशक्त हो, धर्म-निष्ठा और सत्य-निष्ठा को कभी भी त्यागना नहीं चाहिए। - विवेक और ईमानदारी के साथ निर्णय लेने में समुदाय के दबाव के बीच भी नैतिकता की कसौटी से समझौता नहीं करना चाहिए।
संक्षेप सार
मोर्दकै की स्थिति यह दर्शाती है कि विश्वासी विवेक के साथ निर्भय होकर सत्य पर टिके रहते हैं, भले ही राजा की आज्ञा के उल्लंघन जैसा कठिन अवसर क्यों न आ जाए। यहूदियों में साहस, ईमानदारी और परमेश्वर के विश्वास की गहराई को उजागर करता है।
नोट: नीचे मोर्दकै के प्रति Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त शब्दों से पूरक उद्धरण केवल विशिष्ट संदर्भ के लिए आवश्यकतानुसार शामिल हैं।