Old Testament
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एस्तेर 3:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसने केवल मोर्दकै पर हाथ उठाना अपनी मर्यादा से कम जाना। क्योंकि उन्होंने हामान को यह बता दिया था, कि मोर्दकै किस जाति का है, इसलिए हामान ने क्षयर्ष के साम्राज्य में रहनेवाले सारे यहूदियों को भी मोर्दकै की जाति जानकर, विनाश कर डालने की युक्ति निकाली।
एस्तेर 3:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एस्तेर 3:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 83:4 (HINIRV) »
उन्होंने कहा, “आओ, हम उनका ऐसा नाश करें कि राज्य भी मिट जाए; और इस्राएल का नाम आगे को स्मरण न रहे।”

प्रकाशितवाक्य 12:12 (HINIRV) »
“इस कारण, हे स्वर्गों, और उनमें रहनेवालों मगन हो; हे पृथ्वी, और समुद्र, तुम पर हाय! क्योंकि शैतान बड़े क्रोध के साथ तुम्हारे पास उतर आया है; क्योंकि जानता है कि उसका थोड़ा ही समय और बाकी है।” (प्रका. 8:13)
एस्तेर 3:6 पर टिप्पणी—विनाश की योजना और वह मनुष्य जो शोषण से प्रेरित हो
अध्याय 3 में हामान की एक चतुर योजना उभरती है जिसे उसने मोर्दकै के कारण जन्म दिया: यहूदियों के विनाश की नीति। इस व verse में हम देखते हैं कि हामान ने मोर्दकै को सम्मानित न मानकर उसकी जाति के आधार पर उनकी मृत्यु की धमकी दी और फिर पूरे साम्राज्य के बीच भय बन गया। यह घटनाक्रम न सिर्फ एक राजनीतिक चाल है, बल्कि एक आध्यात्मिक परीक्षण भी है: क्या लोग भय, ग़लत उद्देश्य और जड़ें देखकर निर्णय लेते हैं, या न्याय के प्रकाश में व्यवहार करते हैं?
मुख्य विचार और विवरण
इस पद में सीधे-सीधे स्पष्ट किया गया है कि मोर्दकै के विरुद्ध नापाक योजना का मूल कारण एक जाति-आधारित असहिष्णुता है। हामान ने मोर्दकै को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि वह राजा के दरबार में नहीं, बल्कि अपनी धार्मिक नैतिकता और आचरण के कारण अलग खड़ा था। परंपरागत टिप्पणीकार इसे एक नैतिक और सामाजिक परीक्षण मानते हैं: क्या बहुरूपी सत्ता भी धार्मिक पहचान के कारण सजग असहिष्णुता के पंजे में फंस सकती है?
आध्यात्मिक पाठ और संदर्भ
यहाँ एक सीख यह है कि दुष्ट योजनाओं का अंत अक्सर उन्हीं के द्वारा होता है जिन पर उसने विश्वास किया था। हामान की शक्ति से भरी साजिश मोर्दकै के लिए नहीं, बल्कि खुद उसके अहंकार के लिए वरदान बन गई। यहूदियों के लिए यह एक स्पष्ट चुनौती थी कि वे अपने विश्वास और पहचानों के साथ कैसे विचरें, विशेषकर ऐसे समय में जब खतरे अधिक मुखर होते हैं।
अन्य कुरआन-उद्धृत तुलनाएं
- इरशिया पथ के अन्य नायकों की तरह मोर्दकै भी जोखिम के बीच अपनी पहचान को ढाला रहा था, और प्रजाति-आधारित खतरे के सामने भी ईमानदारी और दयालुता की वृत्ति नहीं छोड़ी।
- कुछ अन्य ग्रंथों में भी यहदेयिताएँ मिलती हैं कि असल शक्ति अहंकार नहीं, बल्कि सत्य और नैतिकता की स्थिरता है, भले परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो।
संदर्भ-उद्धरण (संक्षेप)
उद्धरण अक्सर शांत टिप्पणीकारों से मिलता है जो कहते हैं कि एक भयानक योजना तब आती है जब लोग एक-दूसरे की सुरक्षा और समानता को भुला बैठते हैं।
अनुप्रयोग
व्यावहारिक रूप से हम अपने जीवन में यह देख सकते हैं कि किसी भी सामाजिक दबाव के समय हमें अपने आस्था के मूल्यों और दया-शीलता को बनाए रखना चाहिए, ताकि सामाजिक उथल-पुथल के बीच सत्य और न्याय से मार्ग भटके न।
हाइलाइटेड अवलोकन
यह पाठ यह संकेत देता है कि ध्रुव-युद्ध केवल बाहरी शक्तियों के बीच नहीं, बल्कि आंतरिक नैतिक निर्णयों के कारण होता है। यहूदियों के लिए अपनत्व, ईमानदारी, और धैर्य का परीक्षण है—जब खतरा बढ़े, तब भी नैतिक दूरी बनाए रखना चाहिए ताकि भय के बावजूद वास्तविक न्याय बने रहे।
Cross-references
- उत्पत्ति 50:20 से प्रेरित विचार: परस्थितियाँ कठिन हों तो भी ईश्वर की दिशा में विश्वास बनाए रखना। आपने जो किया वही परिणाम बन सकता है; परमेश्वर का उद्देश्य सत्यापन के रास्ते खोलता है।
- नीति 3:5-6: डर और दबाव के सामने सत्य का साहस दिखाने की चेतावनी; अन्याय से दूरी बनाए रखने की प्रेरणा।
- रोम 12:17-19: न किसी के विरुद्ध न कर, परन्तु अपने आप को ईश्वर के न्याय के अधीन रखना और pursuance of peace रखना।
यह commentary एक समेकित सार है—हामान की योजना शक्ति का भ्रम दिखाती है, पर कवची परिणामों के बीच ईश्वर की न्याय-यात्रा को भी उजागर करती है।
समाप्ति सार: एस्तेर 3:6 हमें याद दिलाता है कि दुष्ट पुरुष अपनी मूर्त शक्ति से नहीं, बल्कि अपने अहंकार और जातीय पूर्वाग्रह से विनाश का मार्ग बनाते हैं; परन्तु ईश्वर के साथ चलने वाले विश्वासी वही रहते हैं जो सत्य, दया और न्याय के साथ खड़े रहते हैं।