Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीएस्तेर 6:14 बाइबल पद की व्याख्या
एस्तेर 6:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वे उससे बातें कर ही रहे थे, कि राजा के खोजे आकर, हामान को एस्तेर के किए हुए भोज में फुर्ती से बुला ले गए।
एस्तेर 6:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
एस्तेर 6:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

एस्तेर 5:8 (HINIRV) »
कि यदि राजा मुझ पर प्रसन्न है और मेरा निवेदन सुनना और जो वरदान मैं माँगू वही देना राजा को स्वीकार हो, तो राजा और हामान कल उस भोज में आएँ जिसे मैं उनके लिये करूँगी, और कल मैं राजा के इस वचन के अनुसार करूँगी।”

व्यवस्थाविवरण 32:35 (HINIRV) »
पलटा लेना और बदला देना मेरा ही काम है, यह उनके पाँव फिसलने के समय प्रगट होगा; क्योंकि उनकी विपत्ति का दिन निकट है, और जो दुःख उन पर पड़नेवाले हैं वे शीघ्र आ रहे हैं। (लूका 21:22, रोमी. 12:19)

एस्तेर 5:14 (HINIRV) »
उसकी पत्नी जेरेश और उसके सब मित्रों ने उससे कहा, “पचास हाथ ऊँचा फांसी का एक खम्भा बनाया जाए, और सवेरे को राजा से कहना, कि उस पर मोर्दकै लटका दिया जाए; तब राजा के संग आनन्द से भोज में जाना।” इस बात से प्रसन्न होकर हामान ने वैसा ही फांसी का एक खम्भा बनवाया।
एस्तेर 6:14 पर हिंदी टिप्पणी — राजा के भय और धैर्य की परीक्षा
पन्ने के उद्देश्य के अनुसार इस छोटे से पाठ में यह दर्शाया गया है कि सत्ता और योजनाओं के बीच मानव व्यवहार कैसे तपता है। Esther 6:14 में हम देखते हैं कि अचानक परिस्थितियाँ कैसे उलट सकती हैं—जब महाराज के मंत्री और उच्च अधिकारी अपने-अपने हितों में कुछ कर रहे थे, उस समय शरणार्थी के स्मरण में भीषण बदलाव आ सकते हैं। इस पद का केंद्रीय पाठ यह है कि किस प्रकार राजा के आदेश से हामान के फण की चुभन से बचने के लिए योजना बन रही थी, जबकि Esther के पास भी एक अदृश्य धर्म/परमेश्वर की प्रत्यक्ष योजना चल रही थी।
पठ की स्थिति और संदर्भ
यह पंक्ति Esther 6 के बीच आती है जहाँ राजा खुसरो हामान के मान-अपमान के बाद उद्धारक के रूप में Esther की भूमिका को परख रहा है। राजा के खोजे (क्वेस्ट) में, भोजन-आह्वान के बीच हामान को एस्तेर के भोज में बुलाते हैं—यह एक पल-परिवर्तन का दृश्य है, जहां धन्य और अधर्मी के बीच सत्ता-तत्वों की उलटफेर दिखती है।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
1) परमेश्वर की आगे की योजना छुपी हो सकती है, पर उसकी पलकें प्रत्येक घटनाक्रम में चलती रहती हैं। इस पाठ में बताने के लिए एक संकेत है कि “जो घटनाएँ दिखती हैं उनके पीछे एक योजना है”—परमेश्वर की देखरेख कभी-कभी मनुष्य की चालों के बीच से दिशा बनाती है।
2) समय-चक्र में भय और सलाह—हामान की ईर्ष्या और राजा के आदेश के बीच Esther की स्थिति भी अंशतः शांत रहती है। यह बताता है कि शांत और विवेकपूर्ण आचरण कैसे कठिन क्षणों में भी मोड़ ला सकता है, ताकि परमेश्वर की सिद्धि प्रकट हो।
अन्य बाइबिल संदर्भों से संगति
उद्धृत अन्य ग्रंथों से संकेत यह है कि कैसे विनम्रता और सत्य की राह पर चलना योजना-निर्माताओं के बीच परमेश्वर के उद्देश्य को पूरा करता है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
छोटे-से किन्तु महत्त्वपूर्ण उद्धरण
यहां सीधे Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के पूर्ण वाक्यों का संक्षेप उद्धरण उपलब्ध नहीं है; पर उनके सामान्य निष्कर्षों के अनुरूप यह विचार प्रस्तुत हो रहा है कि परमेश्वर की व्यवस्था मानव इतिहास में सक्रिय है और संकट के क्षणों में भी उसकी योजना प्रकट होती है।
पाठ के साथ 2-3 क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षिप्त विश्लेषण
संक्षेप
Esther 6:14 में एक क्षणिक उलटफेर के बीच यह संकेत मिलता है कि परमेश्वर के उद्देश्य इतिहास के हर मोड़ पर सक्रिय रहते हैं। राजा की खोज और हामान की उपदेश-युक्त योजना के बीच Esther का भाग्य और उसकी सूझ-बूझ एक ठोस स्वाद देती है कि किस प्रकार विवेकपूर्ण धैर्य और ईश्वर की योजना मिलकर उद्धार की दिशा बनाते हैं।