Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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तत्वार्थ का सीधा स्पष्ट संदेश
यहेजकेल 33:25 में परमेश्वर कहता है कि इस देश के अधिकारी और नागरिक जो माँस, लहू, मूर्तिपूजा और हिंसा में लिप्त रहते हैं, वे भीषण धार्मिक और सामाजिक भ्रष्टाचार के कारण सुरक्षा और सम्मान के अधिकारी रहने योग्य नहीं माने जा सकते। असली सत्ता और सुरक्षा के लिए 하나님 के चित्यों के अनुरूप जीवन चाहिए; अन्यथा वे सत्ता के अधिकारी पूर्ण रूप से निष्प्रभावी समझे जाएँगे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहेजकेल के समय बंधुत्व और शास्त्रार्थ में भ्रष्टाचार बढ़ रहा था। इस आयतन में परमेश्वर यहोवा यह स्पष्ट करते हैं कि न केवल सैनिक-युद्धों में हिंसा—बल्कि समाज के दैनिक व्यवहार, अग्निपूजा, और हत्या-सम्बन्धी अपराध—इन सबके कारण देश की नैतिक रीढ़ टूट रही है। विधि का पालन और धर्मी जीवन उनकी सुरक्षा का आधार है; यदि लोग इन मानकों से दूर जाते हैं, तो वे आंतरिक और बाह्य दण्ड के पात्र बन जाते हैं।
interpretive observations
संक्षिप्त थीमैटिक बिंदु
अन्य संदर्भों के साथ संकेतन
कथा-युक्त समापन
यह कविता यह दिखाती है कि धार्मिक आडंबर और सत्तात्मक भ्रष्टाचार एक ही जड़ से जुड़ा है। यदि अधिकारी और नागरिक मिलकर सच, न्याय और श्रद्धा के मानक नहीं पकड़ेंगे, तो देश की सुरक्षा-कायामती टिक नहीं पाएगी। परमेश्वर का आह्वान है कि हम अपने दिलों को स्पष्ट, निष्कपट और ईश्वर-आश्रित बनाएं, ताकि हमारे शासन और समाज में सत्य की शक्ति बना रहे।
व्यावहारिक takeaway
उद्धृत ग्रंथ-आधार
ऐतिहासिक टिप्पणी में उपलब्ध Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों के संक्षिप्त संदर्भ इस प्रकार मिलते हैं: धर्म-जीवन और समाज में प्रशासन की नैतिकता को संयोजित करने पर उनका सामान्य संकेत मिलता है—परमेश्वर के न्याय से ही राष्ट्र की सुरक्षा है। यदि आप चाहें, मैं उनके साक्षात्कार-उद्धरणों को संक्षेपित कर सकता हूँ, किन्तु यहाँ पूर्ण उद्धरण नहीं देगा गया है।