Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 41:6 का सरल अर्थ
यहहल का सूर्य-विधि-निष्ठ भवन बाहरी कोठरियाँ तीन मंजिला थीं; प्रत्येक महल में तीस-तीस कोठरियाँ थीं, और इन कोठरियों को भवन के आस-पास की दीवार से सहारा मिला था ताकि वे दीवारों के भीतर एक- दूसरे के ऊपर टिके रहें।
पृष्ठभूमि
यहेजकेल की visión एक स्वपन-नीति और आध्यात्मिक-वर्णन दोनों है। इस भाग में मंदिर-योजना के विस्तृत वर्णन मिलते हैं, जो प्राचीन ग्रीक-जैसे वास्तुकला के भीतर परमेश्वर की महिमा को दर्शाने के उद्देश्य से रचित था। यहां बाहरी कोठरियाँ मंदिर के चारों ओर तीन मंजिलों में सजाई गईं दिखती हैं, जिससे विस्तृत व्यवस्था और क्रम की महत्ता स्पष्ट होती है।
मुख्य टिप्पणियाँ
वैचारिक संकेत और विद्वत्तापूर्ण दृष्टिकोण
एक संतुलित मंदिर-योजना के साथ यह पाठ दर्शाता है कि परमेश्वर की व्यवस्था कैसे सुव्यवस्थित और क्रमबद्ध तरीके से हर भाग को महिमा के प्रकाश में बाँधती है। यह संकेत देता है कि हर क्षेत्र, चाहे वह बाहरी या भीतरी हो, परमेश्वर की योजना के भीतर एक निर्धारित स्थान रखता है।
संदर्भ-लिंक्स (संक्षिप्त व्याख्या)
1) मंदिर के ढांचे और व्यवस्था पर चर्चा दूसरे भागों में जहाँ परमेश्वर की महिमा सप्ताह-भर के निर्णयोचित कर्मों के साथ जुड़ती है—यह परस्पर गतिशीलता दर्शाती है।
2) बाह्य आंतरिक विभाजन का संकेत—व्यावहारिक सेवा-क्रम में हर व्यक्ति के कर्तव्य का स्पष्ट स्थान; समुदाय के लक्ष्य के अनुरूप समन्वय।
3) संरचना के साथ स्थिरता का संकेत—दीवार और सहारे से, संरचना टिके रहने के लिए परमेश्वर की स्थिर व्यवस्था की याद दिलाता है।
आस्था-विज्ञप्ति का संक्षिप्त takeaway
यह शास्त्रीय विवरण यह सिखाता है कि परमेश्वर की योजनाएं क्रमबद्ध और सुव्यवस्थित होनी चाहिए। हर भाग का अपना स्थान है, और ठीक-ठीक व्यवस्था के साथ ही यह मंदिर—या जीवन—सारमय फल दे सकता है।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप)
וכן उदाहरण: प्रेरितों के कार्यों में पवित्र-संगठन की व्यवस्था का महत्व; पवित्र स्थल की संरचना और उसके क्रम का आध्यात्मिक अर्थ।
उचित उद्धरणों की सूचना
अगर आवश्यक हो, तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संक्षिप्त कथन नीचे उद्धृत किये जा सकते हैं; यहाँ फिलहाल किसी स्पष्ट उद्धरण को नहीं जोड़ा गया है ताकि मूल पाठ के अनुरूप न हो।