Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48
यहोकेएल 42:17— मुख्य बिंदु
यह पाठ बताता है कि मंदिर की विस्तृत परिधि के कुछ भाग विशिष्ट माप से निर्धारित किए गए थे, ताकि पवित्र स्थान के मानक और संतुलन स्पष्ट रहें। बाँसों से मापा गया यह 500 बाँस का क्षेत्र दर्शाता है कि परमेश्वर के घर की मर्यादा और क्रम कितने सुसंगत और नियंत्रित थे; ताकि कलाकार, अधिकारी और परमेश्वर के लोग एक जैसी धारणा से निकट रहें।
पाठ-विधेय और साहित्यिक संदर्भ
यहोकेएल की किताब में मंदिर-निर्माण तथा मर्यादाओं का विवरण दृश्यमान है; भिन्न-भिन्न स्थानों की मापों के साथ—आंतरिक और बाहरी पवित्रता की रेखांकित प्रकृति उजागर होती है। यह भाग बताता है कि पवित्र परिसर के प्रत्येक क्षेत्र की एक निश्चित दूरी और आकार है, ताकि पवित्रता की भावना स्थिर रहे।
थियोलॉजीकिल significance (धार्मिक अर्थ)
500 बाँस के पारिस्थितिक माप से मंदिर की स्थायित्वशील संरचना की पुष्टि मिलती है। यह दृश्य दर्शाता है कि परमेश्वर के सामने व्यवस्थित और योजना बद्ध परंपरा कितनी महत्त्वपूर्ण है। यह क्रम परमेश्वर के मालिकाना अधिकार और उसकी महिमा के केंद्र में एक सुव्यवस्थित बाह्य रूप देता है, जिसमें लोग श्रद्धा और अनुशासन के साथ आते हैं।
Across Scripture: क्रॉस-रेफरेंस
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि माप और संरचना केवल भौतिक विवरण नहीं, बल्कि परमेश्वर के घर में क्रम, पवित्रता और उसकी महिमा की पुष्टि के संकेत हैं।
चिंतन के प्रश्न
सार-सार निष्कर्ष
यहोकेएल 42:17 में बताई गई माप से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के मंदिर का हर भाग एक निर्धारित क्रम और मर्यादा में बनना था। यह न केवल एक वास्तु-ग्रंथ है, बल्कि जीवन में_order_ और पवित्रता के सिद्धांतों को भी इंगित करता है। जैसे मंदिर के पवित्र क्षेत्र की दूरी और आकार निर्धारित थे, वैसे ही हमारे आचरण में भी स्पष्ट सीमाओं और उद्देश्य की आवश्यकता है—ताकि हमारे हर कदम में परमेश्वर की महिमा बढ़े।
संক্ষिप्त उद्धरण और स्रोत-ज्ञान
यह commentary पारंपरिक सार्वजनिक-डोमेन विचारधारा के आधार पर है, जिसमें Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke आदि के सुमधुर विचारों का सूक्ष्म समाकलन किया गया है।