Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48



यहेजेकेल 8:11 का व्याख्यात्मक सार
इस्राएल के घराने के पुरनियाँ चित्रों के सामने खड़े हैं और हर एक धूपदान लिए है; धूप के धुएँ की सुगंध उठ रही है। यह दृश्य ईश्वरीय उपस्थिति-चिन्हों के माध्यम से धार्मिक भ्रष्टाचार और आस्था के बाह्य प्रदर्शन कोतुलनात्मक रूप से प्रस्तुत करता है—जो धार्मिक अनुष्ठान से अधिक अन्दर की हृदय-उत्सर्ग और परमेश्वर के साथ सच्ची निष्ठा पर प्रश्न उठाता है।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
यहेजकेल का यह भाग babylonian-काल के समय का है, जब यहूदा के लोगों ने पाखंडी आराधनाओं और मूर्तिपूजा के प्रभाव में आकर मंदिर के अंदर भी धर्म-निष्ठा के बजाय दिखावे को अपनाया। प्रभु के सामने यह दृश्य यह संकेत करता है कि उनके पवित्र स्थानों में भी अकर्तव्य निष्क्रियता और भ्रष्टाचार पीठ-पीछे चल रहा है।
interpretive observations (संक्षिप्त व्याख्या)
संक्षिप्त शीर्षक-उद्धरण (हितकर बिंदु)
मथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डोमिनेंट टिप्पणियों से मिली कि यह दृश्य एक चेतावनी है—धार्मिक परंपरा में निष्ठा और हृदय परिवर्तन की कमी को दर्शाने वाला। नीचे उनके तात्पर्य के सार का संक्षेप रूप है:
– अगर उद्धरण के वास्तविक शब्द उपलब्ध हों, उन्हें संक्षेप में उद्धृत किया गया है; विशिष्ट शब्दचित्र नीचे के संकेतों में मिलेंगे।
cross-references (संदर्भित पंक्तियाँ)
व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारे जीवन में बाहरी धार्मिक क्रिया-कलाप कितने भी स्थापित हों, यदि हृदय और मन परमेश्वर के प्रति सत्य नहीं हैं, तो वे खाली दिखावा बन जाते हैं। परमेश्वर ऐसी श्रद्धा चाहते हैं जो आंतरिक आत्म-समर्पण, उद्धार की वास्तविक अनुभूति और विश्वास-कार्य से प्रमाणित हो।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह संकेत देता है कि धार्मिक-रेवा सिर्फ परिधान और चित्रों से नहीं चलती; परमेश्वर को निष्ठा, पवित्रता और दिल से प्रेम चाहिए। एक प्रेरक चेतावनी कि ईश्वर के सामने हमारी आस्था का वास्तविक मानदंड क्या है—बाहरी प्रदर्शन बनाम आंतरिक परिवर्तन।