Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
गलातियों 1:1 गलातियों 1:2 गलातियों 1:3 गलातियों 1:4 गलातियों 1:5 गलातियों 1:6 गलातियों 1:7 गलातियों 1:8 गलातियों 1:9 गलातियों 1:10 गलातियों 1:11 गलातियों 1:12 गलातियों 1:13 गलातियों 1:14 गलातियों 1:15 गलातियों 1:16 गलातियों 1:17 गलातियों 1:18 गलातियों 1:19 गलातियों 1:20 गलातियों 1:21 गलातियों 1:22 गलातियों 1:23 गलातियों 1:24



गलातियों 1:3 का सीधा अर्थ
इस वाक्य का सार यह है कि पवित्रता, अनुग्रह और शांति परमेश्वर पिता और यीशु मसीह से क्रमशः प्राप्त होती है। यह उद्धरण यह दिखाता है कि ईश्वर के साथ हमारे संबंध का केंद्र, उनके अनुग्रह का मेहरबान प्रेम और शांति का स्थाई अनुभव है, जो मसीह के कारण संभव होता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
गलातियों के पत्र की शुरुआत प्रेरित पौलुस द्वारा है, जिसे गलातियों में ईसाई समुदायों के बीच विश्वास के सार और मूर्तिकृत चाक-चौबंद नियमों के विरुद्ध तर्क करने के लिए लिखा गया था। यह वाक्य ईश्वर के पिता और उद्धारकर्ता मसीह के नाम से उद्धार का संबंध स्पष्ट करता है—अनुग्रह वह कृपा है जो हमें बाहर से नहीं, बल्कि परमेश्वर के स्वामित्व में दी गई है। शांति यहाँ केवल आंतरिक शांति नहीं, बल्कि ईश्वर के मान्यजो निष्काम प्रेम से उत्पन्न एक सुसंगत जीवन का अनुभव है।
विद्वानों के विचार (संक्षेप, मात्र अनुप्रास के लिए)
कतिपय पवित्र टिप्पणीकारों के अनुसार, यह अभिव्यक्ति दो आयाम प्रस्तुत करती है: अनुग्रह (ईश्वर की कृपा) और शांति (हमारे अंदर का शांति-पूर्ण स्थायित्व)—दोनों का स्रोत परमेश्वर और यीशु मसीह के संबंध में स्पष्ट किया गया है।
interpretive observations
संक्षिप्त थीम-सूची
अन्य संबंधित पद
1) प्रेरितों के कार्य और अन्य पात्रों के आश्वासन में "अनुग्रह और शांति" का समन्वय बार-बार उभरता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर का संबंधीय उद्धार एक निरन्तर अनुभव है।
2) रोमियों 5:1-2 में कहा गया है कि हमारे विश्वास के कारण शांति मिली है; यह उसी अनुग्रह की पुष्टि है जो यहां प्रियश्री से पहले दर्शाया गया है।
3) फिलिप्पियों 4:7 में दिल की शांति का उल्लेख है, जो परमेश्वर की शांति से आती है और विचारों को मसीह में स्थिर रखती है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
अपने जीवन में आप किस तरह परमेश्वर के अनुग्रह को अनुभव कर रहे हैं? दिनचर्या में प्रार्थना और विश्वास के अभ्यास से शांति बनाये रखें; चुनौती के समय में भी यीशु पर भरोसा रखें।
कथन-उद्धृत संदर्भ
यह पाठ स्पष्ट रूप से मसीह-परक अनुग्रह और शांति के स्रोत के रूप में परमेश्वर पिता और यीशु मसीह की ओर संकेत करता है।