Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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गलातियों 3:14 का संदर्भ और अर्थ
पारगमन का यह उद्धरण पवित्र शास्त्र के उस महत्वपूर्ण क्षण को दर्शाता है जब प्रभु यीशु मसीह के कारण अनेकों देशों के लोग, जो विश्वास में आते हैं, अभिषिक्त होते हैं। यह वचन कहता है कि अब्राहम की आशीष उन जातियों तक पहुँचे ताकि विश्वास के द्वारा हम आत्मा को प्राप्त करें—यानी पवित्र आत्मा की प्रतिज्ञा जो विश्वास के साथ मिलती है।
क्या दिखाते हैं ये शब्द भगवान और विश्वास के बारे में
यह वचन दिखाता है कि ईश्वर की वचनबद्धता एक सार्वभौमिक आशीष है, केवल यहूदियों तक सीमित नहीं है। मसीह यीशु के द्वारा गैर-यहोदियों को भी आशीष मिलती है, और यह विश्वास के द्वारा ही संभव है। पवित्र आत्मा की प्राप्ति, जो अभिषेक और परिवर्तन का स्रोत है, उस प्रतिज्ञा का केंद्र है।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र स्पष्ट करना
पवित्र ग्रन्थ के संबंधित अंश
यह सिद्धान्त बहुधा रोम 1–3 में विश्वास के द्वारा धर्म से मुक्त होने, और एपी. 2 में एक नया समाज बनना दिखाता है। साथ ही गलातियों 3 में विश्वास के माध्यम से मरम्मत और आत्मा की देन पर बल दिया गया है।
1) रोम 4:16-17—आशीष का सार्वभौम स्वरूप। 2) एफि 2:8-9—उद्धार का विश्वास-आधार। 3) गलाती 3:28—कठोर विभाजन नहीं, बल्कि नया एकत्व।
आज के लिए अनुप्रयोग
हम में से हर एक के लिए यह स्पष्ट है कि आशीष और आत्मा तक पहुँच सामूहिक नहीं केवल व्यक्तिगत अनुभव है। विश्वास के द्वारा हम उस आत्मा की कृपा से बदलते हैं, और हमारी जीवन-स्पिरिटुअल दिशा परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप ढलती है। गैर-यहोदियों के लिए भी यह आशीष खुली है—यानी ईश्वर की कृपा समस्त मानवजाति के लिए है।
सार-सार्श्व प्रभाव
यह पाठ एकता, विश्वास और आत्मा के प्रभाव की एक ऐसी धारा बनाता है जिसमें परमेश्वर की आशीष सारे जातियों तक पहुँचती है। मसीह के कारण जो स्वर्ग-आशीष आई है, वह आत्मा के साथ हमारे जीवन को परिचालित करती है और हमें पवित्र जीवन की ओर अग्रसर करती है।
एवं 2-3 क्रॉस-रेफरेंस और उनके संक्षेप
1) रोम 4:16-17: आशीष का ग्रहण-योग्यता विश्वास के द्वारा, न कि कर्म से।
2) एफिस 2:8-9: उद्धार का उपहार विश्वास पर निर्भर है।
3) गलातियों 3:28: विभिन्न जातियों के बीच एकता के लिए मसीह।
महत्वपूर्ण उद्धरण (जहाँ उपलब्ध) — Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से: कुछ पंक्तियाँ जो इन विचारों को स्पष्ट करती हैं, वे एक सजग पाठक के रूप में पाठ के साथ संलग्न करते हैं।
नोट: इस पंक्ति के भीतर Henry, Barnes, या Clarke के सटीक संपूर्ण उद्धरण सिर्फ तब ही उद्धृत होते हैं जब उनके सार्वजनिक-domain टिप्पणी-ग्रंथों से आवश्यक भाग सीधे उतरते हों। इस पाठ में प्रयुक्त कथन उनकी सामान्य भावना के अनुरूप हैं, परन्तु पूर्ण उद्धरण नहीं दिए जाते थे—ताकि मूल विचारunodशित रहे।