Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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अय्यूब 12:23 —Immediate Setting
यह पद अय्यूब की गहरी विरोधाभासी अनुभूति के बीच आता है। अपने दुख के बीच वह चाहता है कि लोग उसकी तकलीफ की वजह समझें। परन्तु परमेश्वर के सामर्थ्य और हुकूमत की व्यापकता पर निर्भर रहते हुए, इस आयत में लिखित सत्य सामने आता है कि परमेश्वर न केवल व्यक्तिगत जीवन में घटनाओं का निरीक्षक है, बल्कि जातियों की स्थिति बनाते और बिगाड़ते हैं, उन्हें प्रसार या बंदी बनाते हैं, और सत्ता-लापत Hankering नहीं—बल्कि His sovereign will के अनुसार ही सब कुछ संचालित होता है।
इस पाठ से परमेश्वर या विश्वास के बारे में क्या उद्घाटित होता है
इस पाठ से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर का शासन व्यापक, पूर्ण और निर्बाध है। वह जातियों की गतियों को नियंत्रित करता है—उनकी वृद्धि, पतन, फैलाव या दमन—सब उसकी योजना के अनुसार होता है। विश्वास की दृष्टि से यह बात आश्वस्त करती है कि संसार की घटनाएँ भाग्यशाली या विपत्ति-जनित नहीं, बल्कि परमेश्वर के विशिष्ट उद्देश्य के अनुरूप घटती हैं। अय्यूब की पीड़ा के बीच यह संदेश यह है कि कष्ट के कारणों की खोज में भी हम परमेश्वर की सार्वभौम सत्ता को स्वीकार करें, क्योंकि वही हर चीज का निर्णयकर्ता है।
महत्वपूर्ण शब्दों/चित्रों की स्पष्टता
संबद्ध पाठ (Cross-references)
1) द्न २:६-८— परमेश्वर की सत्ता से राष्ट्रों का उठना-गिरना कैसे उसकी योजना में है; 2) नीतिवचन 21:1— परमेश्वर के हृदय का मार्ग राजाओं के साथ कैसे बदलता है; 3) प Psalm 75:7— स्वर्गिक सत्ता से कर्तव्य और निर्णय होते हैं।
इन संदर्भों में यह देखा जाता है कि शक्तिशाली स्थितियाँ, दमन या स्वतंत्रता, सब परमेश्वर के हाथ में हैं और वह इतिहास को अपनी न्यायमय योजना के अनुसार चलाते हैं।
आज के लिए आवेदन
दुख के समय में भी हमें याद रखना चाहिए कि किसी भी परिस्थिति में परमेश्वर की सत्ता अंतिम है। हमारे लिए यह आस्था कि यह सारी घटनाएँ उसकी योजना के अनुरूप हैं, दर्द के बीच भी संतोष और धैर्य पैदा करती है। साथ ही, यह हमारे समाज के बारे में सचेत बनाती है कि हम शांति, समानता और न्याय के लिए दूसरों के साथ प्रेमपूर्ण और नम्र व्यवहार करें, क्योंकि परमेश्वर के राज में हर जाति और हर देश का स्थान है।
महत्वपूर्ण उद्धरण — पुरातन टिप्पणीकारों के सारभूत विचार
यद्यपि यह पंक्ति सीधे उद्धृत नहीं है, Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पारंपरिक विचारों के अनुरूप, परमेश्वर के souverain नियंत्रण की पुष्टि—न सिर्फ व्यक्तिगत बल्कि भीड़-भाड़ और राज्यों के स्तर पर—यह पाठ उनकी अंतःस्थापना में आती है। नीचे संक्षेप सार है:
नोट: इनमें से कोई भी पाठ में सीधे उद्धृत नहीं हो रहा है; केवल समन्वयित, सार्वजनिक-डायरेक्ट commentary से प्राप्त धारणा है।