अय्यूब 12:23 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह जातियों को बढ़ाता, और उनको नाश करता है; वह उनको फैलाता, और बँधुआई में ले जाता है।

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अय्यूब 12:23 पद-दर-पद बाइबल टीका

अय्यूब 12:23 —Immediate Setting

यह पद अय्यूब की गहरी विरोधाभासी अनुभूति के बीच आता है। अपने दुख के बीच वह चाहता है कि लोग उसकी तकलीफ की वजह समझें। परन्तु परमेश्वर के सामर्थ्य और हुकूमत की व्यापकता पर निर्भर रहते हुए, इस आयत में लिखित सत्य सामने आता है कि परमेश्वर न केवल व्यक्तिगत जीवन में घटनाओं का निरीक्षक है, बल्कि जातियों की स्थिति बनाते और बिगाड़ते हैं, उन्हें प्रसार या बंदी बनाते हैं, और सत्ता-लापत Hankering नहीं—बल्कि His sovereign will के अनुसार ही सब कुछ संचालित होता है।

इस पाठ से परमेश्वर या विश्वास के बारे में क्या उद्घाटित होता है

इस पाठ से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर का शासन व्यापक, पूर्ण और निर्बाध है। वह जातियों की गतियों को नियंत्रित करता है—उनकी वृद्धि, पतन, फैलाव या दमन—सब उसकी योजना के अनुसार होता है। विश्वास की दृष्टि से यह बात आश्वस्त करती है कि संसार की घटनाएँ भाग्यशाली या विपत्ति-जनित नहीं, बल्कि परमेश्वर के विशिष्ट उद्देश्य के अनुरूप घटती हैं। अय्यूब की पीड़ा के बीच यह संदेश यह है कि कष्ट के कारणों की खोज में भी हम परमेश्वर की सार्वभौम सत्ता को स्वीकार करें, क्योंकि वही हर चीज का निर्णयकर्ता है।

महत्वपूर्ण शब्दों/चित्रों की स्पष्टता

  • जातियों को बढ़ाता/घटाता—गणितीय नहीं, बल्कि योजनात्मक नियंत्रण: कुटुम्बों, राष्ट्रों और समुदायों के इतिहास में प्रभु की दिशा-संरचना।
  • नाश करता है / फैलाता है / बँधुआई में ले जाता है—तीन परस्पर सम्बंधित क्रम जो प्रभु की न्याय-व्यवस्था दिखाते हैं: सुख-शांति बनाम विपत्ति, स्वतंत्रता बनाम दमन, और सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तन।

संबद्ध पाठ (Cross-references)

1) द्न २:६-८— परमेश्वर की सत्ता से राष्ट्रों का उठना-गिरना कैसे उसकी योजना में है; 2) नीतिवचन 21:1— परमेश्वर के हृदय का मार्ग राजाओं के साथ कैसे बदलता है; 3) प Psalm 75:7— स्वर्गिक सत्ता से कर्तव्य और निर्णय होते हैं।

इन संदर्भों में यह देखा जाता है कि शक्तिशाली स्थितियाँ, दमन या स्वतंत्रता, सब परमेश्वर के हाथ में हैं और वह इतिहास को अपनी न्यायमय योजना के अनुसार चलाते हैं।

आज के लिए आवेदन

दुख के समय में भी हमें याद रखना चाहिए कि किसी भी परिस्थिति में परमेश्वर की सत्ता अंतिम है। हमारे लिए यह आस्था कि यह सारी घटनाएँ उसकी योजना के अनुरूप हैं, दर्द के बीच भी संतोष और धैर्य पैदा करती है। साथ ही, यह हमारे समाज के बारे में सचेत बनाती है कि हम शांति, समानता और न्याय के लिए दूसरों के साथ प्रेमपूर्ण और नम्र व्यवहार करें, क्योंकि परमेश्वर के राज में हर जाति और हर देश का स्थान है।

महत्वपूर्ण उद्धरण — पुरातन टिप्पणीकारों के सारभूत विचार

यद्यपि यह पंक्ति सीधे उद्धृत नहीं है, Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पारंपरिक विचारों के अनुरूप, परमेश्वर के souverain नियंत्रण की पुष्टि—न सिर्फ व्यक्तिगत बल्कि भीड़-भाड़ और राज्यों के स्तर पर—यह पाठ उनकी अंतःस्थापना में आती है। नीचे संक्षेप सार है:

  • Matthew Henry: परमेश्वर सभी राष्ट्रों के इतिहास के प्रभारी हैं; उनकी कार्रवाई मानवीय समझ से परे हो सकती है, पर उद्देश्य सदैव न्याय और उसकी महिमा के लिए होता है।
  • Albert Barnes: परमेश्वर का शासन विश्व के हर क्षेत्र पर प्रभाव डालता है; वह मकसद के अनुसार लोगों को कठिनाई या उपलब्धि देता है ताकि लोग उसकी प्रेरणा को पहचानें।
  • Adam Clarke: परमेश्वर की सत्ता के अटल होने के कारण मानव की पीड़ा भी एक बड़े उद्देश्य की ओर इशारा करती है—विश्वास, धैर्य और आशीष।

नोट: इनमें से कोई भी पाठ में सीधे उद्धृत नहीं हो रहा है; केवल समन्वयित, सार्वजनिक-डायरेक्ट commentary से प्राप्त धारणा है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

अय्यूब 12:23 समानांतर पद और संबंधित वचन

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परन्तु तूने जाति को बढ़ाया; हे यहोवा, तूने जाति को बढ़ाया है; तूने अपनी महिमा दिखाई है और उस देश के सब सीमाओं को तूने बढ़ाया है।

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यशायाह 9:3 (HINIRV) »
तूने जाति को बढ़ाया, तूने उसको बहुत आनन्द दिया; वे तेरे सामने कटनी के समय का सा आनन्द करते हैं, और ऐसे मगन हैं जैसे लोग लूट बाँटने के समय मगन रहते हैं।

भजन संहिता 107:38 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 107:38 (HINIRV) »
और वह उनको ऐसी आशीष देता है कि वे बहुत बढ़ जाते हैं, और उनके पशुओं को भी वह घटने नहीं देता।

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