यशायाह 26:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु तूने जाति को बढ़ाया; हे यहोवा, तूने जाति को बढ़ाया है; तूने अपनी महिमा दिखाई है और उस देश के सब सीमाओं को तूने बढ़ाया है।

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यशायाह 26:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 26:15 — पाठ का पृष्ठभूमि और अर्थ

परन्तु तूने जाति को बढ़ाया; हे यहोवा, तूने जाति को बढ़ाया है; तूने अपनी महिमा दिखाई है और उस देश के सब सीमाओं को तूने बढ़ाया है।

पृष्ठभूमि और immediate setting

यशायाह ने तब के समय की पवित्र योजना और यहूदा के भविष्य की आशाओं को उजागर किया है। यहाँ संसारिक सीमाओं के विस्तार की बातें परमेश्वर की कृपा और राज्य के ढांचे से जुड़ी हुई हैं। बानगी के रूप में, इस पद में यहूदी राष्ट्र के आकार-चौड़ाई की चर्चा है—पर परमेश्वर की महिमा और आशीष के कारण ही यह संभव हुआ। यह उन दिनों की कथा से जुड़ती है जब परमेश्वर अपने लोगों को सुरक्षित रखता है, उन्हें बंधनों से मुक्त करता है और उन्हें ऐसी स्थिति में डालता है जहाँ उनकी भलाई में बढ़ोत्तरी हो।

ईश्वर या विश्वास के बारे में क्या प्रकट होता है

यह वचन दिखाता है कि परमेश्वर एक सर्वव्यापक और महिमान्वित राजमहल खड़ा करने वाला हैं—न केवल रहने के लिए बल्कि उन आशीषों के माध्यम से जो राष्ट्रों के बीच उनकी महिमा को प्रकट करते हैं। यह कहना है कि ईश्वर ने जाति (या राष्ट्र) को बढ़ाया है—यह बढ़ोतरी कोई आत्म-उद्धार नहीं बल्कि उसकी करुणा, वर्चस्व, और सामर्थ्य के कारण है। साथ ही यह विश्वास दिलाता है कि राष्ट्र की सीमा और महिमा परमेश्वर की योजना के अंतर्गत है, न कि मानव आकांक्षा से स्वतंत्र।

महत्वपूर्ण शब्दों और imagery का स्पष्टीकरण

  • जाति को बढ़ाया— यहाँ "जाति" से तात्पर्य एक विस्तृत, स्थिर और सुरक्षित राष्ट्र स्वयं परमेश्वर की कृपा से प्राप्त होता है, न कि केवल जनसंख्या वृद्धि।
  • तूने अपनी महिमा दिखाई है— परमेश्वर की प्रकृति और सामर्थ्य का प्रकट होना; वह अपने लोगों के जीवन में अपने गुणों के माध्यम से रहती है।
  • देश के सीमाओं को बढ़ाया— भौगोलिक और सामाजिक-राजनैतिक सीमाओं की वृद्धि, जो कि परमेश्वर की सुरक्षा और समृद्धि का प्रभाव है।

अन्य सम्बन्धित ग्रंथार्थ

यह विचार अन्य उद्धृत भागों से जुड़ता है जो परमेश्वर की कृपा, सुरक्षा और राष्ट्र के लिए उनकी योजना को दर्शाते हैं:

  • यशायाह 9:6-7— मसीह के शासन और शांति के विस्तार की भविष्यवाणी। यह दिखाता है कि परमेश्वर की महिमा स्थिर रहती है जब उसका राज स्थापित होता है।
  • यशायाह 54:2-3— सीमा-रेखा का विस्तार और राष्ट्रों के साथ जोड़ने की आशा; परमेश्वर के लोगों के लिए आशीष का विस्तार।
  • प्रकृति कर्म से जुड़ी प्रेरणा— परमेश्वर की कृपा और सत्ता के कारण राष्ट्रों की सुरक्षा और समृद्धि संभव होती है।

इनत्रुटियों का मिलान शास्त्रीय टिप्पणियों से भी होता है, जैसे कि मॉथ्यू मसी, ऐल्बर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क के प्रकाशनों में वर्णित विचार, जो परमेश्वर की योजना और सत्ता को रेखांकित करते हैं।

मौजूदा समय के लिए अनुप्रयोग

हम कैसे इस वचन से सीखें? पहला—परमेश्वर की योजना और उसकी महिमा राष्ट्रों से भी भिन्न नहीं है; हमें भी अपने जीवन में उसकी इच्छा के अनुसार आगे बढ़ना चाहिए। दूसरे—आशीष केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं, बल्कि सामूहिक कल्याण के लिए है; समुदाय के लिए सुरक्षा और अवसरों की वृद्धि उसकी कृपा का परिणाम है। तीसरा—भरोसा बनाए रखें कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, परमेश्वर की सीमा और महिमा का विस्तार होता है, और हम उनके साथ जुड़कर उनके उद्देश्य में भागीदार बनते हैं।

सूक्ष्म cross-references और उनके अर्थ

यशायाह 26:15 से सम्बद्ध अन्य दास-आत्मिक बिंदु:

  • यशायाह 54:2-3 — विश्वास के साथ आशीषों के विस्तार की प्रतीकात्मकता। यह बताता है कि परमेश्वर के शब्द और वादे राष्ट्रों के बीच कैसे फैलते हैं।
  • यशायाह 9:6-7 — फिर से यह दिखाता है कि परमेश्वर के राज्य की महिमा और शांति कितनी स्थिर और व्यापक है, जो मानव सीमाओं से परे है।
  • रोमियों 15:27 — सामुदायिक आशीषों का वितरण और यह कि यहूदियों के साथियों के बीच भी परमेश्वर की कृपा कैसे फैलती है।

उद्धृत संदर्भों के संक्षिप्त सूत्र में, पूर्व-उल्लेखित टिप्पणीकारों के विचारों में परमेश्वर की प्रतिफलनशील शक्ति और राज्य-व्यवस्था की महत्ता प्रमुख है; यह पाठ उनके प्रकाश में एक छोड़ देता है: परमेश्वर ही वह स्रोत है जो राष्ट्रों को ऊँचा उठाता है और उसकी महिमा से विश्व में प्रकाश फैलता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 26:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और मैं तुझ से एक बड़ी जाति बनाऊँगा, और तुझे आशीष दूँगा, और तेरा नाम महान करूँगा, और तू आशीष का मूल होगा।

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