यशायाह 26:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जैसे गर्भवती स्त्री जनने के समय ऐंठती और पीड़ा के कारण चिल्ला उठती है, हम लोग भी, हे यहोवा, तेरे सामने वैसे ही हो गए हैं। (भज. 48:6)

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यशायाह 26:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 26:17 पर टिप्पणी — गर्भवती स्त्री की पीड़ा जैसी स्थिति

पाठ-सार: इस पद में यशायाह ने यहूदा के लिए आशीष और संकट के बीच की अस्थिर स्थिति को कोमल रूप में प्रस्तुत किया है। जैसे गर्भवती स्त्री प्रसव के समय पीड़ा और चिल्लाहट से चीत्कार करती है, वैसे ही हम भी तेरे सामने आह्वान करते हैं कि हे यहोवा, हमारे लिए यह कठिन समय एक मानवीय अभिव्यक्ति है—हम तेरे दर्शन और उद्धार के लिए आपातकालीन गुहार लगाते हैं। यह याद दिलाता है कि परमेश्वर के सामने हमारा रोना और दृढ़ आशा एक ही बात से जुड़ी है: वे हमारे उद्धारकर्ता हैं।

पद का संदर्भ और अनुभूतियाँ

यहशायाह 26 पूरे अध्याय में भविष्य के आराम और न्याय की आशा को केन्द्रित करता है। संदर्भ बताता है कि जो लोग परमेश्वर के राज्य की ओर आंख उठाते हैं, वे विश्वास के साथ सुरक्षित रहते हैं। यहाँ गर्भवती स्त्री की चिल्लाहट एक प्राकृतिक प्रकाशन है—प्रकृति की पीड़ा से मिलती-जुलती हमारी आंतरिक पीड़ा। भक्तजन अपने आत्मिक माँगों के साथ परमेश्वर के सामने आकर आत्मीयता से विनती करते हैं।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

  • विश्वास की गहराई: यहह्वा के साथ का भरोसा जन्म देता है कि कठिन समय में भी हमारा रोना एक वास्तविक क्रिया है, जो परमेश्वर के प्रेम के दिग्दर्शन को प्रकट करती है।
  • उद्धार की क्षितिज-दृष्टि: पीड़ा के बीच भी यहोवा के राज्य की सुरक्षा और आशीष की उम्मीद हमें धैर्य देती है।
  • आवाज़ और आशा का संतुलन: अपने दायित्वों के साथ आँसू बनाम चिल्लाहट—परंतु आशा में गहराई, क्योंकि परमेश्वर हमारी पीड़ा को जानते हैं और उसकी योजना में ही हमारा उद्धार है।

अन्य पवित्र ग्रंथ से संबंध

– भजन 48:6 में भी ऐसी ही पीड़ा और उद्धार के बीच के संबंध पर संकेत मिलता है कि परमेश्वर के आकाशीय राज्य के सामने मानव स्थिति कितनी छोटी और भयग्रस्त होती है, परंतु वही प्रभु हमारा पनाह और उद्धार है।

– यशायह 25:9 में कहा गया है कि उस दिन लोग कहेंगे कि यह वह दिन है जब हमारा परमेश्वर हमें मुक्त किया, जो दुख से निकल कर जय-जयकार से भरे हैं। इस संदर्भ से यह बात मजबूत होती है कि पीड़ा के बीच भी आशा का लक्ष्य स्पष्ट है: परमेश्वर का उद्धार हमें दिखता है।

गतिशील आवेदन

आपमें अगर जीवन में ऐसा समय है जब प्रतीत होता है कि समय-सीमा, दर्द और चिल्लाहट से भरा है, तब याद रखें: यहोवा से गहरा संवाद और विश्वास की आवाजें आपकी सच्ची अभिव्यक्ति हैं। अपने दिल की पीड़ा को खुले दिल से प्रस्तुत करें, ताकि परमेश्वर के साथ आपकी साझीदारी और विश्वास पुनः मजबूत हो। साथ ही, समुदाय के साथ प्रार्थना और समर्थन को भी खुली छत दें: क्रूर समय में भी एक दूसरे के लिए दया और सहायता परमेश्वर के राज्य को मजबूत करती है।

संक्षेप सार

यशायाह 26:17 हमें सिखाता है कि कठिन समय में हमारी क्रिया—गर्भवती स्त्री की तरह चिल्लाहट और पीड़ा—ईमानदार प्रार्थना है जो परमेश्वर के पास पहुँचती है। यहोवा हमारे यातनाओं को देखता है, और उसकी योजना में उद्धार की दिशा स्पष्ट है। यह शिक्षा हमें धैर्य और विश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

पठन-उद्धृत छोटे तत्व

यह पद अन्य कृतियों के साथ इस प्रकार जुड़ता है कि क्रोधित समय में भी हम परमेश्वर के राज्य की आकर्षक आशा को न भूलें।

लघु क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षिप्त स्पष्टीकरण

– यहोवा के राज्य के लिए उम्मीद की दृष्टि: यहोवा की सहायता से पीड़ा के बावजूद उद्धार संभव है, इसलिए दृढ़ विश्वास रखें।

– भजन 48:6: पीड़ा के दौरान भी प्रभु का दयालु नेतृत्व स्मरणीय रहता है; परमेश्वर की महिमा दूरदर्शी रूप से उजागर होती है।

– यशायाह 25:9: उस दिन उद्धार का घोष, विश्वास की स्थिरता और जय-यशस्वी समापन की पुष्टि करता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 26:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और वे घबरा जाएँगे। उनको पीड़ा और शोक होगा; उनको जच्चा की सी पीड़ाएँ उठेंगी। वे चकित होकर एक दूसरे को ताकेंगे; उनके मुँह जल जाएँगे। (1 थिस्स. 5:3)

यूहन्ना 16:21 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यूहन्ना 16:21 (HINIRV) »
जब स्त्री जनने लगती है तो उसको शोक होता है, क्योंकि उसकी दुःख की घड़ी आ पहुँची, परन्तु जब वह बालक को जन्म दे चुकी तो इस आनन्द से कि जगत में एक मनुष्य उत्‍पन्‍न हुआ, उस संकट को फिर स्मरण नहीं करती। (यशा. 26:17, मीका 4:9)

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यशायाह 21:3 (HINIRV) »
इस कारण मेरी कटि में कठिन पीड़ा है; मुझको मानो जच्चा की सी पीड़ा हो रही है; मैं ऐसे संकट में पड़ गया हूँ कि कुछ सुनाई नहीं देता, मैं ऐसा घबरा गया हूँ कि कुछ दिखाई नहीं देता।

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