यशायाह 13:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और वे घबरा जाएँगे। उनको पीड़ा और शोक होगा; उनको जच्चा की सी पीड़ाएँ उठेंगी। वे चकित होकर एक दूसरे को ताकेंगे; उनके मुँह जल जाएँगे। (1 थिस्स. 5:3)

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यशायाह 13:8 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 13:8 का संदर्भ और सार-संकलन

यशायाह में बइन-हू या बाबत के लिए आने वाले विश्वापनों के पूर्व भाग में, कवरेज यह दर्शाता है कि परमेश्वर के नियत समय में बुरी ताकतें भी भय के काले बादलों में टूटेंगी। अध्याय 13 विश्राम के बजाय एक आर्त आह्वान है—बेबीलोन के आक्रमण के समय से पहले, जिस तरह मिस्र का दमन और अन्य जातियाँ ऐसी स्थिति का सामना करेंगी। इस कविता-भर पाठ में व्यक्ति-परक भय नहीं, बल्कि व्यापक दंड और न्याय का संकेत है।

मुख्य अर्थ और संदेश

यह आयत दुष्ट राष्ट्रों के ऊपर परमेश्वर के निर्णय की कठोरता को उजागर करती है। दास-स्थिति में रहने वाली दुनिया में भय, पीड़ा और प्रसूति-सी पीड़ाएँ होंगी—यानी अचानक और भारी दुख का अनुभव। इसके साथ संदेशन है कि लोग एक-दूसरे को देख कर भय से मुँह जलाते हैं, अर्थात दहशत का आतंक हर स्मृति-प्रतिमा को ढह देता है। यह चिह्नित करता है कि दंड समय पर आता है और मानवीय सुरक्षा-प्रणालियाँ असहाय पड़ जाती हैं।

तीन केंद्रीय विषय

  • न्याय का समय: दुष्ट राष्ट्रों के लिए ईश्वर का निर्णय स्पष्ट रूप से आता है, जो सब व्यवस्था के विरुद्ध है।
  • भय और पीड़ा: मानवीय सुरक्षा का क्षरण और पीड़ा का दृष्य, जो अंततः आत्म-धारणा को झकझोर देता है।
  • रास्ते की आत्म-उत्थान की आवश्यकता: इन चोटों के बीच भी लोग पूरी तरह से दिशा-भ्रमित न रहें, बल्कि परमेश्वर की ओर मुड़ें और सत्य को ढूंढ़ें।

संबद्ध पवित्र ग्रन्थ के संदर्भ

- 1 थिस्सलonians 5:3: “जब लोग कहते हैं, शांति-चक्र में, तब अचानक संकट आ जायेगा”—यकीनन यशायाह के महद दंड के साथ इस विचार की परछाईं है।

- यशायाह 24:18-19: पृथ्वी के उद्धृत भय के द्योतन, दुष्टों के लिए अंधकार और ध्वंस का पूर्व संकेत।

- संदेश–न्याय के साथ कल्याण: यह तुलना दर्शाती है कि समय के अंत में विश्वासियों के लिए सुरक्षा का स्थान है और दण्ड के ये दृश्य संसार के लिए चेतावनी हैं।

यथार्थ उपयोग: एक व्यावहारिक चिंतन

हमें इस आयत से यह सीख मिलती है कि स्थितियाँ कितनी भी भयावह क्यों न लगें, परमेश्वर के न्याय का समय अटल है। तब भी हमें मानव-निर्भरता छोड़कर विश्वास-आधार पर टिके रहना चाहिए। कठिन समय में प्रार्थना, संयम और आशा को बनाए रखना आवश्यक है, ताकि हम डर के सामने निर्भयता और दृढ़ता से खड़े रह सकें।

छोटे cross-ref विचार

- “शांति” के बजाय “संकट” का शब्द, विश्वास के लिए परीक्षा बन सकता है—प्रेरित-उत्पादन।

- यशायाह की भविष्यवाणी में दंड और उद्धार एक साथ चलते हैं; साथ ही, परमेश्वर का अनुभव धैर्य और भरोसे से जुड़ा है।

संक्षिप्त समापन

यशायाह 13:8 हमें बताता है कि परमेश्वर का न्याय कठिन पर सत्य है; भय और पीड़ा के समय में भी पथ-प्रदर्शक है कि कौन सा मार्ग मिलने पर प्रभु की ओर मुड़ना है। यह शास्तिरीय पाठ हमें विश्वास और सेवा के साथ जीवन के कठिन क्षणों को पार करने की प्रेरणा देता है।

उद्धृत विचारधारा के छोटे उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke):

“क़यामत के दिन में दुष्ट राजाओं के लिए भय और दुख अनिवार्य है; जो अपने आप को बचाने को नहीं जानते, वे ही इस दंड से भयभीत होंगे।”

नोट: ऊपर के स्पष्टीकरण संदर्भित पवित्र-तत्त्वों के सार-संहिता के अनुसार हैं; पूर्ण उद्धरण प्रत्येक टीका-ग्रंथ से संक्षेप में संकलित हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 13:8 समानांतर पद और संबंधित वचन

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1 थिस्सलुनीकियों 5:3 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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जब लोग कहते होंगे, “कुशल हैं, और कुछ भय नहीं,” तो उन पर एकाएक विनाश आ पड़ेगा, जिस प्रकार गर्भवती पर पीड़ा; और वे किसी रीति से न बचेंगे। (मत्ती 24:37-39)

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यशायाह 26:17 (HINIRV) »
जैसे गर्भवती स्त्री जनने के समय ऐंठती और पीड़ा के कारण चिल्ला उठती है, हम लोग भी, हे यहोवा, तेरे सामने वैसे ही हो गए हैं। (भज. 48:6)

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वह खाली, छूछी और सूनी हो गई है! मन कच्चा हो गया, और पाँव काँपते हैं; और उन सभी की कटियों में बड़ी पीड़ा उठी, और सभी के मुख का रंग उड़ गया है!

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