Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 13:13 का स्पष्ट अर्थ
यह पद कहता है: आकाश काँप उठेंगे और पृथ्वी अपनी जगह से डगमगा जाएगी, क्योंकि यह श्रीश्री सेनाओं के यहोवा के भड़कते हुए क्रोध के दिन है। संक्षेप में, यह प्रति-प्रत्यय है कि परमेश्वर का निर्णय और क्रोध विश्व की संरचना को हलचल में डाल देगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यशायाह का यह भाग मिस्र, बशर्ते बाइबल की अन्यकथा के साथ, बुराई के शासन और द्रष्टाओं के सामने आने वाले दंड की चेतावनी देता है। यहां विशिष्ट संदेश है कि बाबुल-परित्याग की भविष्यवाणी के पीछे परमेश्वर की न्यायपूर्ण क्रोध है, ताकि अशुद्ध शासन और पापप्रणालियों का अंत हो सके। मसीही दृष्टिकोण में यह दिन न्याय के दिन के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें संसार की व्यवस्था झुक जाती है और ईश्वर की सत्ता स्पष्ट रहती है।
व्याख्या के प्रमुख बिंदु
संक्षिप्त थीमेटिक सूची
अन्य प्रासंगिक पदानुक्रम (Cross-References) से संक्षिप्त सहयोग
- दूसरी जगह क्रोध के दिन का विचार मिलता है: यशायाह के वही समय के साथ मिलकर यह दिखाता है कि दुख और दंड परमेश्वर के नियंत्रण में है। व्याख्या: परमेश्वर ही इतिहास के अंत में न्यायपूर्ण निर्णय लेते हैं।
- रोमियों 2:8-9 की तरह, परमेश्वर के क्रोध और प्रतिष्ठित न्याय का प्रसंग विश्व के सभी लोगों के लिए सामान्य चेतावनी बनते हैं। व्याख्या: पाप के परिणाम स्पष्ट हैं, परन्तु उद्धार भी संभव है जब व्यक्ति धर्म में चले।
- प्रकृति की विपत्ति को दंडस्वरूप देखने वाले दिनों को अति-रिक्त नहीं, बल्कि परमेश्वर की योजना के भाग के रूप में देखना चाहिए। व्याख्या: क्रोध की घटनाएँ परमेश्वर की पवित्रता की मांग को पूरा करती हैं।
व्यावहारिक takeaway
हमारे जीवन में यह स्मरण दिलाते हैं कि कोई सत्ता असीम नहीं है—परमेश्वर के दिन स्पष्ट और निर्णायक होते हैं। पाप के रास्ते छोड़कर ईश्वर के अनुकूल जीवन जीना और दयालु न्याय में विश्वास रखना हमारे लिए अनिवार्य है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (public-domain commentary से एकत्रित संदर्भ)
मार्थे केनी के अनुसार यह पाठ कहता है कि परमेश्वर के क्रोध का दिन पृथ्वी को रौंद डालने वाला होता है; उसकी शक्ति से आकाश कांपते हैं—यह वर्णन भय के साथ यह बताता है कि दंड क्यों आवश्यक है; यह न्याय का दिन है।
एडम क्लार्क के अनुसार, यहाँ यह दिखता है कि यह दंड केवल अत्याचारियों के लिए नहीं, बल्कि सभी उन मानव-व्यवस्थाओं के लिए है जो परमेश्वर के आदेश से प्रतिकूल हैं; सत्य यह है कि परमेश्वर अपने पवित्र उद्देश्य के लिए राज-कायदे को स्पष्ट करते हैं।
अल्बर्ट बार्न्स के विचारों के अनुसार, यहाँ क्रोध का दिन एक चेतावनी है कि पाप की स्थिरता नहीं है और न ही मानवीय शानदारताएँ अविनाशी हैं; परमेश्वर की मधुर दया तब तक स्पष्ट रहती है जब तक वह न्याय करता है।
नोट: ऊपर के उद्धरण सीधे पाठ-स्तर से नहीं लिए गए हैं; ये सामान्य मानक सरनाओं के अनुकरणीय सार हैं जो Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक डोमेन विचारों से मिलते-जुलते हैं।