यशायाह 13:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वहाँ जंगली जन्तु बैठेंगे, और उल्लू उनके घरों में भरे रहेंगे; वहाँ शुतुर्मुर्ग बसेंगे, और जंगली बकरे वहाँ नाचेंगे। (प्रका. 18:2)

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यशायाह 13:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 13:21 का संदर्भ और अर्थ

यशायाह 13 में बर्बण का दृश्य और नापाक राज्य बाबुल के विनाश की भविष्यवाणी है। यहाँ कथन एक तीखी दशा-व्यथा का प्रतीक है: पतन के बाद अस्थिर, हिंसक, और निर्जन स्थान बनेंगे। यह क्रंच-भरा संकेत है कि देवता की न्याय-प्रक्रिया किसी भी शक्तिशाली साम्राज्य को नहीं छोड़ती। खासकर इस verse में जंगली जंतु, उल्लू, शुतुर्मुर्ग और बकरों का बसेरा उसके विनाशी प्रभाव को दर्शाता है: एक जगह पर कण्ठ से भय, अवमानना और शांति की कमी। आगे के संदर्भ में प्रकाशित-प्रकाशन की दृष्टि से यह भाग ‘प्रका. 18:2’ के साथ तुलना देता है कि परमेश्वर का दंड कैसे अँधकार में आकर संसार से हर चिह्न को मिटा देता है।

मूल संदेश का केन्द्र

यह पद एक अलंकारिक चेतावनी नहीं बल्कि सत्य के गहरे अर्थ का स्मरण कराता है: जहाँ शक्ति और समृद्धि परमेश्वर के न्याय के सामने निरीह हो जाती है, वहाँ विनाश और निर्जनता व्याप्त हो जाती है। भागती बस्ती, शोर-शराबा और अत्याचार के पीछे की वास्तविकता यह है कि परमेश्वर की योजना में पाप का अंत स्पष्ट और निर्णायक है।

मुख्य विषयों के संकेत

  • न्याय का प्रहार और पतन: महान शासन भी जब परमेश्वर के विरुद्ध हो, तब उसका नम्र भाग हिलकर गिर सकता है।
  • निर्जनता के प्रतीक: जीव-जंतुओं का अनुकूल व्यवहार नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थिति में अजीब-सी बस्तियाँ—यह दंड की कथा बताती है।
  • कथा-न्याय बनाम मानवता: यह दृश्य धार्मिक सत्ता के दायरे से परे एक दिव्य निर्णय की पुष्टि करता है।

अन्य पवित्र ग्रंथों के संदर्भ

- इस प्रकार के चित्रण पुराने नियम में अक्सर “न्याय का दिन” और शासन के उथल-पुथल को दर्शाते हैं। प्रत्यक्ष उद्धरण नहीं दिया गया है, परन्तु यशायाह के समान प्रतीक बाबेल के अवसान और दंड के समय में प्रकट होते हैं (यशायाह 14–15; प्रकाशितवाक्यों 18)।

- उद्धरण-सम्बंध: प्रकाशितवाक्यों 18:2 से मिलती-जुलती चेतावनी कि बड़े शहरों की दिव्यता कब-कि कैसे गिर जाती है और अंधकार में पड़ती है।

- क्रिया-परिवर्तन का संकेत: वन्य जीव और अजीब प्राणी का वास—a संकेत कि मानव-निर्मित सुरक्षित ठिकानों का समापन हो सकता है।

व्यावहारिक विचार

इस verse से सीख मिलती है कि संसार की शक्तियों पर आश्रय नहीं पाना चाहिए; हमारी सुरक्षा परमेश्वर के न्याय और दया के भीतर है। जब जीवन में गम्भीर हानियाँ या अस्थिरता आती है, हमें दयालु ईश्वर के सामने आत्म-निश्चय और भरोसे को बनाए रखना चाहिए, ताकिपरिवर्तन की राह में धीर-धैर्य बना रहे।

संक्षिप्त सार

यशायाह 13:21 एक दुष्ट साम्राज्य के पूर्ण विनाश का द्योतक है, जहाँ प्रकृति के अजीब दृश्य उभरते हैं—यह एक चेतावनी और आश्वस्ति दोनों देता है: परमेश्वर के न्याय के सामने मानव-सम्पदा सीमित है, और उसकी व्यवस्था में शांति और पवित्रता बहाल होगी।

क्रॉस-रेफरेंसेस के संक्षिप्त संदर्भ

- गलती से नहीं, बल्कि समान प्रतीक: प्रकाशितवाक्यों 18:2—उल्लेखित देव-न्याय का एक रूपक चित्रण जो समान अंधकार और विनाश दिखाता है।

- यशायाह 14:4–6 के संदर्भ में दंड और शासन के विषय पर विचार किया जा सकता है: अत्याचारी साम्राज्यों का अन्त और उद्धार का समय एक साथ आते हैं।

- यशायाह 34:11-15 के वन्यजीव प्रतीक इसका समानार्थी रूप प्रस्तुत करते हैं, जो परमेश्वर के न्याय की तीव्रता को रेखांकित करता है।

टिप्पणी: इस पथ-आधार के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के फ्रेमवर्क में जहां-जहां उद्धरण मिलते हैं, वहाँ छोटे-छोटे कथन स्वतः उद्धृत हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 13:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उसने ऊँचे शब्द से पुकारकर कहा, “गिर गया, बड़ा बाबेल गिर गया है! और दुष्टात्माओं का निवास, और हर एक अशुद्ध आत्मा का अड्डा, और हर एक अशुद्ध और घृणित पक्षी का अड्डा हो गया। (यशा. 13:21, यिर्म. 50:39, यिर्म. 51:37)

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यशायाह 34:11 (HINIRV) »
उसमें धनेश पक्षी और साही पाए जाएँगे और वह उल्लू और कौवे का बसेरा होगा। वह उस पर गड़बड़ की डोरी और सुनसानी का साहुल तानेगा। (प्रका. 18:2, सप. 2:14)

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